अनमोल वचन

 

एक विचारक ने कर्म का महिमामंडन करते हुए कहा 'मत भूलो कि जीवन आदान-प्रदान का दूसरा नाम है। आप जैसा करोगे-वैसा भरोगे, जैसा बोओगे-वैसा ही काटोगे, कर भला हो भला।' जब मानव विनम्र भाव से दूसरों को सम्मान देता है, जो उसके हृदय से अहम भाव नदारद रहता है। उसे सृष्टि में सौंदर्य ही सौंदर्य दिखाई पडता है। वह उसे अपने आंचल में समेट लेना चाहता है, बांहों में भर लेना चाहता है। वह नहीं जानता कि यह सब स्थायी नहीं है, क्षणिक है। जो जन्मा है उसकी मृत्यु निश्चित है, जिसकी रचना हुई है उसका विनाश अवश्यमभावी है। इसलिए मानव को सांसारिक आकर्षणों तथा माया-मोह के बन्धनों में अधिक लिप्त नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह आसक्ति विनाश का हेतु है, जो उसे उसके लक्ष्य से भटका देती है। परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। निरन्तर अभ्यास से मुर्ख भी विद्वान बनकर संसार में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त कर सकता है। इसके लिए आवश्यकता होती है सार्थक चिंतन मनन और रचनात्मक कर्म की, जिसके सहारे मनुष्य आकाश की बुलन्दियों को छू सकता है। 'कौन कहता है आकाश में छेद नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो' दुष्यन्त की ये पंक्तियां मानव को ऊर्जा से भर देती है, परन्तु केवल उन्हें जो याद रखते हैं।

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