अनमोल वचन

 

रिश्ते और शीशे बडे नाजुक होते हैं। जैसे शीशे छोटी सी गलती से टूट जाते हैं, वैसे ही रिश्ते भी छोटी सी गलतफहमी में टूट जाते हैं। प्रशंसा और सम्मान मांगे नहीं जाते, वे अच्छे कर्म करके कमाये जाते हैं। जिन मूर्तियों को हम अपने आप बनाकर बडे गर्व से उनकी पूजा करते हैं, परन्तु जिन्होंने हमें बनाया है उन माता-पिता की सेवा करते हम शर्म करते हैं। कुछ हंसकर बोल दो, कुछ हंसकर टाल दो, परेशानियां बहुत है इस जीवन में कुछ वक्त पर डाल दो। जहां सूर्य की किरणे हो वहां प्रकाश ही प्रकाश होता है। जहां सेवा व प्रेम की भाषा हो वहां सुखी समृद्ध परिवार होता है। व्यवहार घर का शुभ कलश है और इन्सानियत घर की तिजोरी है। मधुर वाणी घर की दौलत है और शान्ति घर की महालक्ष्मी है। एकता ही घर की ममता है, व्यवस्था ही घर की शोभा है और हर समस्या का समाधान ही सच्चा सुख है। जिन्हें बुजुर्गों के आशीर्वाद की सम्पत्ति प्राप्त है, उन्हें कभी अभाव महसूस नहीं होता, जो माता-पिता की सेवा समर्पण भाव से करते हैं, उनकी हर मनोकामना पूरी होती है तथा घर मंदिर स्वर्ग के समान हो जाता है।

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