गाजियाबादः दिव्यांग होने के बावजूद इंटरनेशनल क्रिकेटर से कम नहीं है रामबाबू शर्मा, अपनी हिम्मत से क्रिकेटर बनने का सपना किया पूरा

 

गाजियाबाद। दिल में अगर जज्बा हो तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं है। ये बात गाजियाबाद में एक ऐसे क्रिकेटर ने साबित कर दिखाई है, जो कहने को तो दिव्यांग हैं। लेकिन उनका हौसला किसी इंटरनेशनल क्रिकेटर से कम नहीं। हम बात कर रहे हैं दिव्यांग क्रिकेटर रामबाबू शर्मा की। 7 साल की उम्र में एक ट्रेन हादसे में उन्होंने अपना एक पैर गंवा दिया था। लेकिन अपनी हिम्मत से उन्होंने अपने क्रिकेटर बनने का सपना पूरा किया है। आज रामबाबू शर्मा दिव्यांग क्रिकेट एसोसिएशन के बैनर तले खेलते हैं। फिलहाल वो यूपी टीम के कैप्टन है। गाजियाबाद में हुए एक दिव्यांग क्रिकेट टूर्नामेंट में, उनकी मेहनत से, उनकी टीम रनर अप रही। हालांकि फिलहाल रामबाबू शर्मा आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। लेकिन उन्होंने हालातों के सामने हार नहीं मानी है। उनका कहना है कि क्रिकेट से वो कभी दूर नहीं हो सकते। अपनी इसी मेहनत की वजह से उन्हें कई सम्मान हासिल हो चुके हैं। उन्हीं से मिली प्रेरणा की वजह से दिव्यांग क्रिकेट टीमें बन पाई हैं। जो अलग-अलग जगहों पर टूर्नामेंट का हिस्सा बन रही है।

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