कोरोना काल में घरों में ही मुस्लिमों ने मनाया ईद-उल-अजहा का त्यौहार

 

New Delhi: मुसलमानों का पवित्र एवं बड़ा त्योहार ईद-उल-अजहा यानी बकरीद शनिवार को मनाया गया। ईद-उल-अजहा की नमाज ईदगाह के बजाय अधिकतर गांवों, कस्बों व शहरों में मस्जिदों या पार्क इत्यादि में पढ़ी गई।

मुस्लिम समाज के लोगों ने कोरोना काल में सरकार की गाइडलाइन का पालन करने की पूरी कोशिश की। ईद-उल-अजहा यानि बक़रीद की नमाज के बाद जिस तरह लोग गले मिलकर एक दूसरे को बधाई देते हैं तथा हाथ मिलाते हैं, इस बार ये बिलकुल भी देखने को नहीं मिला। नमाज के बाद जब दुआ के लिए एक साथ सैकड़ों हाथ उठे तो मुल्क में अमन व शांति की दुआ के अलावा कोरोना का खात्मा करने की दुआ की गई।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर के जरिए देशवासियों को ईद की मुबारकबाद दी है। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को लोगों को ईद की मुबारकबाद दी और उम्मीद जताई कि यह त्योहार समाज में शांति और समृद्धि लेकर आएगा. ईद-उल-अजहा को कुर्बानी का त्योहार भी कहते हैं।

दरअसल, कोरोना ने देश में आर्थिक नुकसान के अलावा जान-माल की काफी क्षति की है। इससे हर वर्ग, हर व्यक्ति प्रभावित हुआ है। इस बार ईद उल फितर से लेकर ईद-उल-अजहा जैसे मुसलमानों के बड़े त्योहार कोरोना काल में ही मनाए गए हैं।

लॉकडाउन की वजह से मुस्लिम समाज के लोगों ने अपने-अपने घरों में जानवरों की कुर्बानियां की। इस दौरान सड़कें सुनसान नजर आईं। मस्जिद में मौलाना ने ईद-उल-अजहा की नमाज अता कराई।

मौलाना ने लोगों को ईद की नमाज से पहले बुराइयों से बचने, देश में अमन व खुशहाली की दुआ मांगने तथा स्वस्थ व जानदार जानवर की कुर्बानी इत्यादि के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी।

मुस्लिम समाज के लोग तरह-तरह की खुशबू के इत्र, परफ्यूम लगाकर नए कपड़े पहन कर ईद उल अजहा की नमाज अता करने के लिए गए। जब नमाज पढ़ने के बाद घर लौटे तो बच्चों को ईदी दी। उसके बाद ईद उल अजहा पर बनाए गए लजीज व्यंजनों का जायका लिया।

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