कांग्रेस का नव संकल्प शिविर: बैनर में परिवारवाद का जवाब, भाजपा कह रही झूठा दिखावा
 

 
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जयपुर। देश में लगातार चुनाव हार रही कांग्रेस पार्टी झीलों की नगरी उदयपुर के पांच सितारा होटल में अपनी दशा और दिशा में चिंतन शुरू कर चुकी है। गुजरे आठ सालों में पार्टी के केन्द्र की सत्ता से बाहर होने के बाद से उस पर परिवारवाद का आरोप लगा है। उदयपुर में चल रहे तीन दिवसीय नव संकल्प शिविर के दौरान कांग्रेस की ओर से लगाए गए बैनर्स में किया गया बदलाव इन्हीं आरोपों से बाहर निकलने की कवायद में उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। भाजपा इसे नेहरू-गांधी परिवार की छाया से बाहर निकलने की कोशिश बता रही है।

उदयपुर में चल रहे कांग्रेस के चिंतन शिविर में इस बार लगाए गए पोस्टर्स कुछ अलग हैं। आमतौर पर कांग्रेस के शिविरों, अधिवेशनों या सम्मेलनों के पोस्टरों में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू के साथ गांधी परिवार को तवज्जो दी जाती है या फिर संबंधित प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रदेशाध्यक्ष को महत्व मिलता है। इस बार सड़क के दोनों ओर लगे पोस्टर्स में महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, मनमोहन सिंह के साथ स्वतंत्रता सेनानियों को भी बराबर महत्व दिया गया है। पोस्टर में कांग्रेस का यह बदलाव चर्चा का मुद्दा बना हुआ है।

आमतौर पर कांग्रेस के कार्यक्रमों में पोस्टर में गांधी परिवार या मुख्यमंत्री-प्रदेशाध्यक्ष के ही चेहरे नजर आते हैं। इसे लेकर कांग्रेस पर कई बार परिवारवाद के आरोप भी लग चुके हैं। भाजपा ने कई बार आरोप लगाए हैं कि कांग्रेस पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी को याद करती है, लेकिन पीवी नरसिंह राव, सुभाष चंद्र बोस, लाला लाजपत राय जैसे नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान भूल गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस ने इन पोस्टर्स के जरिए परिवारवाद के आरोपों का मौन जवाब देने की कोशिश की है। उदयपुर एयरपोर्ट से लेकर शहर में कई जगह ऐसे पोस्टर लगाए गए हैं।

इन पोस्टर्स में मनमोहन सिंह के साथ पीवी नरसिंह राव, मौलाना अबुल कलाम आजाद के साथ बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद के साथ लाल बहादुर शास्त्री, गोपाल कृष्ण गोखले के साथ भगत सिंह, पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ सरदार वल्लभ भाई पटेल, लाला लाजपत राय के साथ महात्मा गांधी, रवींद्र नाथ टैगोर के साथ सुभाष चंद बोस, सरोजनी नायडू के चेहरों को स्थान दिया गया है। कांग्रेस चिंतन शिविर के ये पोस्टर पार्टी में बदलाव से जोड़कर देखे जा रहे हैं।

पार्टी के प्रदेश प्रभारी अजय माकन का कहना है कि पार्टी ने इन बड़े और पुराने नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों को हमेशा याद रखा है। भाजपा और आरएसएस वाले आजादी की लड़ाई में दूर-दूर तक नहीं दिखाई दिए। वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना हैं कि भाजपा राष्ट्रवाद का दिखावा करती है। हमारे नेताओं ने आजादी के लिए कुर्बानी दी। तब संघवाले और भाजपा के कौन से नेता शामिल हुए? हमारे नेताओं को हमेशा याद रखा जाएगा।

दूसरी तरफ भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां का कहना है कि ये कांग्रेस की नेहरू-गांधी खानदान की छाया से बाहर निकलने की विफल कोशिश है। कांग्रेस ने सुभाष चंद्र बोस को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से रोका गया। नरसिंह राव जिस सम्मान के हकदार थे, उन्हें कभी नहीं दिया गया। महापुरुषों के पोस्टर अपने नेताओं के साथ लगाना महज कांग्रेस का दिखावा है। अंदर से नीयत वंशवाद को ही पोषित करने की है।
 

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