कमीशन बढ़ाने की मांग को लेकर पेट्रोल डीलर मंगलवार को नहीं खरीदेंगे तेल

 
पेट्रोल डीजल में सातवें दिन भी बदलाव नहीं

नई दिल्ली। पेट्रोल पंप परिचालकों के संगठन दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन (डीपीडीए) ने सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) से डीलर कमीशन बढ़ाने की मांग और उत्पाद शुल्क में अकस्मात कटौती से अपने नुकसान की भरपाई के मुद्दे को लेकर ‘नो परचेज अभियान’ के तहत मंगलवार को देशभर में पेट्रोल पंपों द्वारा तेल न खरीदने की सोमवार को घोषणा की।

डीपीडीए के पदाधिकारियों ने दावा किया है कि 24 राज्यों के करीब 70 हजार पेट्रोल पंप कल तेल कंपनियों से वाहन ईंधन की खरीद नहीं करेंगे, लेकिन आम लोगों की सुविधा के लिए पेट्रोल पंप खुले रखे जाएंगे।

डीपीडीए अध्यक्ष अनुराग नारायणा ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ओएमसी और डीलर एसोसिएशन के बीच डीलर कमीशन को लेकर एक समझौता किया था कि कमीशन को हर छह महीने में संशोधित किया जाएगा, जिसे 2017 से संशोधित नहीं किया गया है।

श्री नारायणा ने कहा कि 2017 से ईंधन की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं, इसलिए व्यापार में कार्यशील पूंजी भी दोगुनी हो गई है। साथ ही, पिछले पांच वर्षों में बैंक शुल्क, बिजली बिल, वेतन आदि जैसे अतिरिक्त खर्च कई गुना बढ़ गए हैं। डीलर कमीशन को संशोधित करने की हमारी निरंतर मांग को ओएमसी द्वारा अनदेखा कर दिया गया है, ऐसा करके ओएमसी अपने स्वयं के नेटवर्क को आर्थिक रूप से अव्यवहारिक बना रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क में कटौती से देश के नागरिकों को दी गई राहत का हम स्वागत करते हैं, लेकिन इन अचानक कटौती से डीलरों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष चार नवंबर और इस वर्ष 21 मई को उत्पाद शुल्क में पेट्रोल पर कुल 13 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर कुल 16 रुपए प्रति लीटर कटौती किया गया, जिससे पेट्रोल पंप डीलरों को अपूरणीय क्षति हुई। उन्होंने कहा कि इससे करीब देशभर में पेट्रोल पंप डीलरों को करीब 21,000 करोड़ का नुकसान हुआ है।

डीपीडीए के अध्यक्ष ने कहा कि उत्पाद शुल्क में कटौती से हुए नुकसान को लेकर केंद्र सरकार से बात करेंगे ताकि पेट्रोल पंप डीलरों को इससे होने वाले क्षति से बचाया जा सकें।

गौरतलब है कि डीपीडीए ने तेल विपणन कंपनियों के मनमानी को रोकने के लिए देशभर के 24 राज्यों के पेट्रोल पंप डीलरों के समर्थन से डीलरों के वित्तीय संकट को उजागर करने के लिए 31 मई कोई खरीद नहीं करने का फैसला किया है। इन राज्यों में तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, बिहार, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, सिक्किम सहित अन्य शामिल है।

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