जेल में ही गुजरेगी दुर्गा पूजा, पार्थ चटर्जी को नहीं मिली जमानत

 
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कोलकाता। शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी की जमानत याचिका एक बार फिर खारिज हो गई है। उन्हें और 14 दिनों तक प्रेसीडेंसी जेल में ही रहना होगा। इसी मामले में गिरफ्तार एसएससी के पूर्व सलाहकार कल्याणमय गांगुली, एसपी सिन्हा और अशोक साहा को भी पांच अक्टूबर तक प्रेसीडेंसी जेल में रहना होगा। आज उनकी सीबीआई हिरासत खत्म हुई थी जिसके बाद बैंकशाल की विशेष सीबीआई कोर्ट में उन्हें पेश किया गया था।

उल्लेखनीय है कि ईडी ने शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़ी जांच में कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाया था। 50 करोड़ रुपये नगदी बरामद हो चुके हैं। इसके बाद 23 जुलाई को पश्चिम बंगाल सरकार के तत्कालीन मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी को गिरफ्तार कर लिया गया था। उस वक्त अर्पिता ने बताया था कि 2016 में एक बंगाली ऐक्टर ने उनका परिचय पार्थ चटर्जी से कराया था। तब से ही दोनों एक-दूसरे के करीब थे। खबरों के मुताबिक, अर्पिता ने पूछताछ में कथित तौर पर मान लिया है कि ये रकम ट्रांसफर पोस्टिंग के बदले ली गई घूस और कॉलेजों को मान्यता दिलाने के एवज में लिए गई थी।

आगे की जांच के बाद ईडी ने ये दावा किया कि पार्थ ने सिर्फ शिक्षा घोटाले के जरिए ही नहीं बल्कि दूसरे गैर कानूनी कामों से भी पैसे कमाएं हैं। ईडी ने चार्जशीट में कहा है कि जब्त की गई संपत्ति में 40.33 करोड़ रुपये की 40 अचल संपत्ति और 7.89 करोड़ रुपये की शेष राशि वाले 35 बैंक खाते शामिल हैं। जब्त की गई संपत्तियों में फ्लैट, एक फार्म हाउस, कोलकाता शहर में प्राइम लोकेशन की जमीन और बैंक बैलेंस शामिल हैं। ईडी के बाद सीबीआई ने पार्थ चटर्जी को अपनी हिरासत में लिया है।

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