शिवसेना सांसद संजय राउत को नहीं मिली राहत, अदालत ने 4 अगस्त तक ईडी की हिरासत में भेजा

 
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मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय ने शिवसेना नेता संजय राउत को गिरफ्तार किए जाने के बाद आज अदालत में पेश किया और केस में आगे की पूछताछ के लिए हिरासत की मांग की। अदालत ने एजेंसी की हिरासत की मांग को स्वीकार कर लिया है और शिवसेना नेता 3 दिन के लिए ईडी की कस्टडी में भेज दिया है। बता दें कि मुंबई के एक उत्तरी उपनगर में एक चॉल परियोजना के पुनर्विकास से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में पूछताछ के लिए ईडी ने उन्हें हिरासत में लिया है। बहस के दौरान ईडी के वकील ने तर्क दिया कि गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व निदेशक प्रवीण राउत ने एक पैसा भी निवेश नहीं किया, फिर भी उन्हें 112 करोड़ रुपये मिले। जांच से पता चलता है कि संजय और वर्षा राउत के खाते में 1.6 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे। राउत और परिवार 1.6 करोड़ रुपये के लाभार्थी थे. ईडी के वकील हितेन वेनेगांवकर ने अदालत को बताया कि जांच से पता चला है कि उस पैसे (1.6 करोड़ रुपये) में से अलीबाग के किहिम बीच पर एक भूखंड खरीदा गया था।  एक प्लॉट सपना पाटकर के नाम पर लिया गया था।  जांच में यह भी पता चला कि प्रवीण राउत संजय राउत का फ्रंट मैन था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रविवार देर रात शिवसेना नेता संजय राउत को गिरफ्तार कर लिया।  इस बीच देर शाम, ईडी के सूत्रों ने दावा किया कि राउत के आवास से 11.5 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद की गई थी।  वहीं मुंबई पुलिस ने अलग से रविवार को पात्रा चॉल मामले में ईडी की गवाह स्वप्ना पाटकर को कथित रूप से डराने-धमकाने के लिए सांसद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।  प्राथमिकी राउत और पाटकर के बीच कथित बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग पर आधारित है।  मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि वकोला पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 504, 504 और 509 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।  पाटकर ने राउत पर उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। 

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