जीवन में सफल होने के लिए बनें ऊर्जावान

- नीतू गुप्ता
 
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कभी उतार कभी चढ़ाव, कभी खुशी कभी गम, कभी उत्साह तो कभी निराशा, ये सब जिंदगी के विभिन्न रंग हैं। जो इन रंगों के साथ जीना सीख जाता है, वह जीवन को सफल बना लेता है। जो हार जाता है, वह असफल रहता है। जब जीवन में अधिक निराशा लगे तो उस अवसाद से बाहर निकलें। जीवन को उत्साह और उमंग से भरने का प्रयास करें क्योंकि उत्साह और उमंग जीवन को ऊर्जा से भर देते हैं। बिना उमंग के जीवन की हर चीज फीकी लगती है।

जीवन में यदि हम कुछ नियमों को निर्धारित करते हैं तो हम में जीने की उमंग अधिक होती है और यदि हम बिना नियमों के जीते हैं तो जिंदगी नीरस लगेगी। अगर आप जीवन को उत्साह और उमंग से भरना चाहते हैं तो स्वयं के लिए कुछ नियम निर्धारित करें और जिंदगी भर ऊर्जावान बने रहें।

स्वयं को रखें निरोगी:-
स्वयं को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए सबसे पहला कदम है स्वस्थ रहना। बनावटी जीवन शैली न अपना कर प्राकृतिक रूप से जिएं। अपने जीवन को सरल व सहज बनाएं। उसके लिए संतुलित आहार लें और अपनी दिनचर्या को सुचारू रूप से रखें। अपने लिए समय निकालें और व्यायाम करें। यदि समय की कमी हो तो प्रात: कुछ जल्दी उठें और सैर पर जाएं या घर पर स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें।
मन में निक्कय कर लें कि मुझे आगे स्वस्थ जीवन शैली को अपनाना है। यह नकारात्मक सोच दिल से निकाल दें कि मेरे पास समय नहीं है। समय प्रबंधन तो अपने हाथ में है। जो समय गप्पों में या टीवी में लगाते हैं, उस समय कोई काम कर प्रात: का समय अपने लिए रख सकते हैं। इसी प्रकार चाहें तो शाम को समय निकाल सकते हैं पर जो नियम निर्धारित करें, उस पर पूरा अमल करें। फिर देखें समय आपका है। एक बार आत्मविश्वास बन गया तो ऊर्जा अपने आप आपके पास आएगी।
समय प्रबंधन को दें महत्ता:-दिन के कार्यों को समय के अनुसार करते रहेंगे तो यही समय प्रबंधन होगा। चाहे आप घर पर रहते हैं या बाहर काम पर जाते हैं, टाइम मैनेजमेंट हर जगह अपना महत्व रखता है। अपने हम काम को समय सीमा में बांध कर कार्य करेंगे तो मन भी प्रसन्न रहेगा और सफलता भी मिलेगी। मन प्रसन्न और संतुष्ट है तो ऊर्जा आपके पास है। दिनभर की रूपरेखा तैयार कर कुशलता पूर्वक उसे निपटाएं। इससे आप दिनभर सक्रि य भी रहेंंगे और चुस्त भी।

पौष्टिक आहार को अभिन्न साथी बनाएं:-
ऊर्जावान बने रहने के लिए पौष्टिक आहार लेना अति आवश्यक है। यदि शरीर को भरपूर और पौष्टिक आहार मिल रहा है तो आप तन मन से चुस्त महसूस करेंगी। सुबह नाश्ता अवश्य करें। दिन में कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और प्रोटीन युक्त भोजन लें। प्रोटीन के लिए अंकुरित दालें, अनाज, सूखे मेवों को अपने नियमित आहार में रखें।
शाम को फल या फैटलेस नमकीन के साथ एक प्याला चाय ले सकते हैं। रात्रि में भी दाल, सब्जी सलाद, सूप लें। दिन में छोटे पौष्टिक आहार लेनेे से आपके शरीर में दिनभर ऊर्जा का प्रवाह बना रहेगा।

भरपूर पानी पिएं:-
कम पानी पीने वाले दिन में थकान अधिक महसूस करते हैं क्योंकि शरीर में डीहाइड्रेशन की समस्या पैदा हो जाती है। दिनभर में कम से कम 8 से 1० गिलास पानी पिएं। काम करते समय पानी की बोतल और गिलास पास में रखें ताकि ध्यान आते ही पानी पिएं। रसोई में काम करने से पूर्व गिलास पानी अवश्य पिएं नहीं तो काम में पानी पीना आप भूल जाएंगी।

सही डेऊसअप रहें:-
अपनी उम्र अनुसार अच्छे वस्त्र पहनें और हमेशा तैयार रहें ताकि आपको सुस्ती महसूस न हो। बढ़ती उम्र के बारे में सोचकर भयभीत  न हों। उम्र के अनुसार स्वयं को सक्रिय रखें। सक्रियता आपको हमेशा तन मन से ऊर्जावान रखती है। अपनी पसंद के वस्त्र पहनें और सजे संवरें। सुंदर दिखने से मन खुश रहता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। आत्मविश्वास और प्रसन्नता ऊर्जा बनाए रखने में ईंधन का काम करते हैं।

सोच रखें सकारात्मक:-
इंसान जैसा सोचता है, वैसा ही बनता है। मन में अच्छे विचारों को लाएं और सोचें मैं स्वस्थ, भाग्यशाली और सक्रिय हूं। मुझे भगवान ने सब कुछ दिया है। मेेरे अंग काम करने में सक्षम हैं। ऐसा दिन में चार पांच बार मन में दोहराएं, फिर देखें परिणाम। आप सच में स्वस्थ और सक्रिय बने रहेंगे। टीवी देख कर अपने दिमाग को निष्क्रिय न बनाएं। उस समय में आप पत्रिकाएं या अपनी पसंद की पुस्तकें पढ़कर विचारों में नवीनता और स्वतंत्रता लाएं ताकि आपकी सोच का दायरा बढ़ सके।
लंबे गहरे श्वांस लें:-प्राणायाम जीवन का आधार है। इससे हममें चेतना का संचार होता है। प्रात: या सायं समय कुछ प्राणायाम की आवृत्तियां दोहराएं। कपालभाति, भ्रस्रिका, अनुलोम विलोम दिन में 1० से 15 मिनट तक नियमित करें।

दूसरों को नहीं, स्वयं को बदलें:-
दूसरों के व्यवहार से परेशान होने के बजाए स्वयं को बदलें। मन शांत रखें। जब भी किसी पर गुस्सा या खीज आ रही हो, ऐसे में अपने आपको काम में व्यस्त कर लें। वैसे उस समय अपनी पसंद का काम मन को खुशी देगा। आज के बदलते समय में आप बच्चों के तौर तरीकों और व्यवहार को नहीं बदल सकते। अच्छा है आप सहना सीख जाएं।

न कहना भी सीखें:-
अपने मन को मारकर हमेशा दूसरों को खुश करने के लिए उनकी हां में हां न मिलायें। जो बात इच्छा के विरूद्ध हो या बिना इच्छा की हो, उसे न कहना सीखें पर कुछ इस तरह से कहें कि सामने वाले को बुरा न लगे। कई बार हां में हां मिलाते रहने से आप स्वयं कुंठाग्रस्त हो जाते हैं और कमजोर भी। इन सबसे बचने के लिए सरल सहज तरीके से मुस्कराते हुए न कहना भी सीखें।

पूरी नींद लें:-
शरीर की ऊर्जा बनाए रखने के लिए अच्छी नींद लेना बहुत जरूरी है। तभी आपको अगली सुबह ताजगी का अहसास होगा। 6-7 घंटे की नींद अवश्य लें। हो सके तो दिन में कुछ समय आराम करें ताकि शरीर में फिर से स्फूर्ति का संचार बना रहें।

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