चिंतन: धनप्रदायक चमत्कारी छल्ला
 

- गोपाल राजू
 
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पांच धातुएं - तांबा, चांदी, सोना, जस्ता तथा लोहा क्रमश: रविवार, सोमवार, शुक्रवार तथा शनिवार को जमा कर लें। ये धातुएं किसी भी मात्र अनुपात में ली जा सकती हैं। कुल मात्र लगभग इतनी चुनें जिससे कि आपकी अनामिका उंगली के नाप का छल्ला बन जाए। कलाई के कड़े, लॉकेट, अथवा अन्य किसी रूप में भी कुछ बनवाया जा सकता हैं। इनसे धन प्रदत्त यंत्र बनाने के लिए प्लेट भी बनवायी जा सकती है। जो कुछ भी बनवाना चाहेंगे, उसी के अनुरूप धातुुएं आपको जमा करनी पड़ेंगी। यह आपकी रूचि पर निर्भर है।

उक्त धातुओं में सोना ही सर्वाधिक महंगा है। इसका कोई विकल्प नहीं है। हां, अपनी सामर्थ्य से यह सूक्ष्मतम मात्रा में लिया जा सकता है। किसी भी रविवार से सूर्य की होरा में यह प्रयोग प्रारंभ करें। प्रात: नहा-धोकर सर्वप्रथम स्वच्छ हो जाएं। अब सर्वप्रथम तांबे के टुकड़े एक अखण्डित पान के पत्ते पर रख कर घर से बाहर किसी घने तथा छायादार वृक्ष के नीचे दबा आयें। वृक्ष यदि पीपल, अशोक तथा बड़ का हो तो और भी शुभकारक होगा। यह ध्यान रखें कि कहीं आपके पीछे कोई खोद कर यह निकाल न ले।

चोरी आदि को कैसे रोका जाए तथा कौन सा वृक्ष अपने कार्य के लिए चुना जाए, यह सब आप पर ही छोड़ता हूं। तांबे की तरह सोमवार को पान पर चांदी रखकर पहले वाले स्थान के आस-पास ही कहीं यह भी दबा दें। इसी तरह बुधवार को बुध की होरा में सोना, शुक्रवार को शुक्र  की होरा में जस्ता और शनिवार को शनि की होरा में लोहा पान पर रखकर दबा दें।

प्रत्येक दिन धातु दबाये जाने से घर लौटते समय तक मौन रहकर ऊं नमो नारायणाय मंत्र निरंतर श्रद्धा से जपते रहें। रोहिणी नक्षत्र तक समस्त धातुएं वहीं दबी रहने दें। पूरे उपाय काल में आपको कुछ भी क्रि या नहीं करनी है।

यदि समस्त काल में कर सकते हैं तो यह करिए-सोने से पूर्व 5-10 अथवा अपनी श्रद्धानुसार पैसे अपने सिरहाने रखकर सो जाएं। अगले दिन यह किसी दरिद्र व्यक्ति को दे दें। रोहिणी से एक दिन पूर्व अर्थात् कृतिका नक्षत्र में सूर्य अस्त होने के बाद किसी भी समय उस वृक्ष के नीचे जाकर एक दीपक जलाएं।

पूर्व दिशा की ओर मुंह करके मन से बोलें- पंच तत्व में समायी पंच धातुक को प्रकृति आप में सुख-संपदा संचित करने का गुणधर्म भर दे। मैं कल आपको लेने आऊंगा। इसके बाद चुपचाप घर लौट आयें। प्रात: नहा-धोकर सुविधानुसार किसी भी समय पांचों धातुएं खोदकर घर ले आएं। पान के पत्ते वहां ही दबे रहने दें। जहां-जहां गड्ढ़े हुए, वहां थोड़ी-थोड़ी चीनी छोड़ आएं। रोहिणी नक्षत्र के काल में ही बनना है।

घर लाकर यह छल्ला, कड़ा, लॉकेट जो कुछ भी आपने बनवाया है, अच्छी तरह से राख आदि से धोकर चमका लें। इसे कच्चे दूध में, गंगा जल में, शहद, दही आदि से पवित्र करके धूप-दीप दिखाएं। इसकी प्राण प्रतिष्ठा कर सकते हैं तो कर लें अन्यथा ऐसे पहन लें।
इसके बाद प्रत्येक रोहिणी नक्षत्र में इसे गंगा जल से धोकर पुन: पहनते रहें। इस छल्ले का चमत्कार आप स्वयं अनुभव करें। धनश्री आप पर कृपालु होगी।
 

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