बेटी को करवाएं वास्तविकता से परिचित

- सुनीता गाबा
 
- सुनीता गाबा

जब बेटियां युवावस्था में कदम रखती हैं तो अक्सर वे अपने भविष्य के बारे में सपने संजोने प्रारंभ कर देती हैं। उन्हें पति के रूप में एक राजकुमार की कल्पना होती है और घर के रूप में एक महल की जहां सभी सुख सुविधाएं पर्याप्त होती हैं और काम करने के लिए नौकर चाकर होते हैं।

वैसे अच्छी कामना करना और सपने देखना बुरा नहीं होता पर जब सपने पूरे नहीं होते तो बंदा आसमान से धरती पर उल्टे मुंह गिरता है और जीवन निराशा से भरा लगता है। तब स्थिति संभालना मुश्किल हो जाता है।

बड़ी होती बेटी को समझाएं कि मन की कल्पना के अनुसार सब कुछ नहीं मिलता। जो रंगीन दुनियाँ अब दिखाई दे रही है, वास्तव में शादी के बाद की दुनियां उतनी रंगीन नहीं होती है। बेटी को ऐसी शिक्षा दें कि शादी के बाद जब वास्तविकता से पाला पड़े तो वो तैयार रहे उसे सहने के लिए। कुछ टिप्स हैं माता-पिता के लिए जिन का पालन कर वे अपनी बेटी को वास्तविकता के धरातल पर रहना सिखा सकते हैं ताकि बेटी को निराशा हाथ न लगे।

अपनी बेटी को जीवन की सच्चाई, मूल्यों और नैतिकता की शिक्षा दें ताकि विवाह के बाद जीवन के साथ मधुरता पूर्वक समझौता कर अपने सपनों को साकार बना सके।

बेटी को यह समझाएं कि ससुराल में पति के अलावा अन्य सदस्य भी होते हैं। उनसे सामंजस्य बैठाना भी जरूरी है। तभी घर की बगिया महकती रहेगी और वातावरण मधुर रहेगा। बेटी को बताएं कि विवाह का अर्थ केवल सुख का उपभोग करना ही नहीं है। सुख दुख दोनों का सामना करना आना चाहिए।

अपनी लाडली बेटी को दहेज में आत्मविश्वास, स्नेहिल व्यवहार, सहनशीलता, सामंजस्य, धैर्य की शिक्षा जरूर दें ताकि वह अपना जीवन सुखी बना सके।

बेटी को यह जरूर समझाएं कि शादी का अर्थ नये-नये कपड़े और गहने पहनना, पति के साथ घूमना और लाड़ प्यार करना ही नहीं है बल्कि इसके अलावा जिम्मेदारी उठाना और जिम्मेदारी निभाना भी है।

बेटी के विवाह के पश्चात् माता-पिता लड़की की निजी जिंदगी में अनावश्यक दखलअंदाजी न करें। इससे बेटी अपनी समस्याओं को स्वयं निपटा नहीं सकती। उसे अपनी बुद्धि अनुसार समाधान निकालने दें। जब समस्या जटिल हो और वो आपकी राय मांगे तो उसे उचित राय दें।

जहां आपकी बेटी गलत हो उसकी गलती बताएं।

बेटी से कभी भी उसके ससुराल की बुराइयों को न कुरेदें बल्कि उसे अपना स्थान बनाने का हौंसला दें। आजकल बेटियां पढ़ी लिखी होती हैं और उन्हें योग्यता और शालीनता से अपना स्थान स्वयं बनाकर सपना साकार करना चाहिए।

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