सेहत के लिए खतरा बन सकते हैं खर्राटे

- भाषणा गुप्ता
 
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आमतौर पर खर्राटों को एक सामान्य क्रिया माना जाता है और कई बार तो यह हंसी का विषय भी बन जाता है परंतु यह बात शायद बहुत कम लोग जानते हैं कि ये स्वास्थ्य के लिए खतरा भी बन सकते हैं। एक अनुमान के मुताबिक संसार में लगभग 15 प्रतिशत जनसंख्या खर्राटे लेती है। इनमें से 10 प्रतिशत जनसंख्या के खर्राटों के शोर का स्तर 50 डेसिबल से अधिक है जो काफी ऊंचा माना जाता है।

आइए जानें कि हास्य के विषय खर्राटे स्वास्थ्य के लिए किस प्रकार खतरा बन सकते हैं।

अगर खर्राटे लगातार व जोर-जोर से लिए जाएं तो ये व्यक्ति को हृदय रोगी बना सकते हैं। साथ ही ऐसा व्यक्ति, जो खर्राटे लेता हो, 'स्लीप एप्निया' नामक रोग का शिकार होकर मर भी सकता है।

अक्सर कोई व्यक्ति जब खर्राटे लेता है तो हम मानते हैं कि वह गहरी नींद में सोया है, इसलिए खर्राटे ले रहा है परंतु इस बारे में हुए शोध के मुताबिक खर्राटे लेने वाला व्यक्ति दूसरों की नींद खराब करने के साथ-साथ स्वयं भी गहरी नींद नहीं सो पाता। विशेषज्ञों के अनुसार खर्राटे लेने वाला व्यक्ति कभी भी गहरी व आरामदायक नींद प्राप्त नहीं कर पाता जिससे उसे सांस व दिल की बीमारी लग सकती है।

चिकित्सकों के अनुसार यदि सोते समय व्यक्ति लम्बी अवधि तक खर्राटे लेता है तो कुछ समय के लिए उसका सांस लेने का मार्ग अवरूद्ध हो जाता है, जो 'स्लीप एप्निया' नामक रोग का लक्षण हो सकता है जिसका परिणाम यह होता है कि फेफड़ों में गैस का अदल-बदल नहीं हो पाता।

खून में ऑक्सीजन का स्तर कम व कार्बन डाई आक्साइड का स्तर अधिक हो जाता है जिससे व्यक्ति मर भी सकता है। अगर खर्राटों की आवाज अधिक हो तो सुनने वाला व्यक्ति बहरा भी हो सकता है।

खर्राटों का कारण:- विशेषज्ञों के अनुसार जब नाक की चोट या अन्य कारणों से नींद के प्राकृतिक चक्र  में बाधा उत्पन्न होती है तो खर्राटे पैदा होते हैं जबकि तथ्य यह है कि अगर नींद के दौरान नाक का मार्ग सूख जाता है तो मुंह से सांस लेने के कारण व्यक्ति खर्राटे लेता है।

कई बार मोटापा या बढ़े हुए टांसिल भी खर्राटों का कारण बनते हैं। अक्सर जिन बच्चों के टांसिल बढ़े हुए हों, वे बच्चे दस वर्ष की आयु तक खर्राटे लेते हैं व उम्र बढऩे के साथ-साथ उनकी यह आदत स्वयं ही छूटती चली जाती है परंतु जैसे ही उनकी आयु 3० वर्ष से अधिक होती है, वे पुन: खर्राटे लेना शुरू कर देते हैं।

वैसे सामान्य तौर पर सोते समय हम नाक से सांस लेते हैं परंतु यदि नाक के रास्ते से पर्याप्त वायु नहीं आ पाती तो मुंह स्वयंमेव ही सांस की क्रिया को प्रारम्भ कर देता है और मुंह द्वारा सांस लेने से फेफड़े फूलते हैं और गले की मांसपेशियां अपनी आवाज खो देती हैं व अंदर की ओर झुक जाती है, जिस कारण खर-खर की आवाज होती हैं और यही आवाज सांस लेते व निकालते वक्त बदलती जाती है।

खर्राटों के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं जैसे-शराब का अधिक सेवन, धूम्रपान व अधिक भोजन ग्रहण करना इत्यादि।

निदान:- चूंकि खर्राटे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकते हैं अतएव इनको हास्य का विषय मानकर चुप्पी नहीं साध लेनी चाहिए। इनका समय पर सही इलाज कराना अत्यंत आवश्यक है।
इनसे बचने के लिए जहां संतुलित आहार का सेवन आवश्यक है, वहीं धूम्रपान व शराब के सेवन से भी बचना अति आवश्यक है। मोटे व्यक्तियों को सम्भवत: अपना वजन कम करने के उपाय करने चाहिए। स्वास्थ्य के नियमों का सही ढंग से पालन करके खर्राटों से बचा जा सकता है।

इसके लिए चिकित्सक से सलाह लेकर किसी प्रशिक्षित व्यक्ति की देखरेख में भ्रस्तिका प्राणायाम का अभ्यास भी काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। सांस को तेजी से लेते हुए हाथों को ऊपर करें व मुटठी को बंद करते हुए हाथों को नीचे जाते वक्त तेजी से सांस छोड़ें। इस क्रिया को सुबह-सुबह खुली हवा में कम से कम 20 बार करें।

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