युवा पीढ़ी की दुश्मन हैं ये आदतें

 
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आधुनिक पीढ़ी आधुनिक सुविधाओं से इतनी लैस हो चुकी है कि उनकी दिनचर्या उसी के चारों तरफ उलझी रहती है जिसका परिणाम है उनकी सेहत का सत्यानाश। वैसे युवा पीढ़ी काफी स्मार्ट ओर तेज बुद्धि वाली है। बहुत से युवा तो इन सुविधाओं का प्रयोग अपनी सहूलियत और जरूरत के लिए करते हैं लेकिन कुछ उनकी अति करके अपना नुकसान कर लेते हैं। आइये जानें:-
तेज म्यूजिक सुनना
आज के युवा कानों में ईयर प्लग लगाकर तेज आवाज में म्यूजिक सुनना अपनी शान समझते हैं। उन्हें लगता है वे रिलैक्स महसूस कर रहे हैं जबकि लगातार तेज आवाज में म्यूजिक सुनना, वो भी ईयर प्लग के साथ उनके कान और दिल दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं। आज का म्यूजिक बहुत अजीबो गरीब आवाजों वाला होता है जो नुकसान अधिक पहुंचाता है, रिलैक्सेशन कम।
लगातार उत्तेजित करने वाला म्यूजिक दिमाग में संतुलन की समस्या ला सकता है। अगर आप म्यूजिक के शौकीन हैं तो धीमी आवाज में दिमाग को रिलैक्स करने वाला साफ्ट म्यूजिक सुनें जो आपके दिमाग को शांत बनाएगा। शांत दिमाग ही सही काम करने लायक होता है। इससे आपके कान और दिल दोनों को राहत महसूस होगी।
लगातार ज्यादा बोलना
जितना हम इंटरनेट से पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ाते हैं, हम सबको शौक होता है कि अपना ज्ञान दूसरों के साथ शेयर करें। इस आदत के पडऩे से हमें ज्यादा बोलने की आदत पड़ जाती है जो दिमाग को बिना कोई ठोस कार्य किए थका देती है। लड़कियों में वैसे ही अधिक गप्पें मारने की आदत होती है। इसी प्रकार सेल्समैन या मार्केटिंग वाले युवाओं को भी बहुत बोलने की आदत पड़ जाती है जो बिना वजह भी बोलना पसंद करते हैं चाहे सामने वाला बोर क्यों न हो रहा हो।
ज्यादा बोलने से आप कभी कभी ऐसा कुछ भी बोल जाते हैं जो दूसरों को हर्ट कर सकता है जिससे रिश्तों में दरार आ जाती है। कई बार एक दूसरे की बात दूसरे के सामने रख देते हैं जो ठीक नहीं होता और कभी कभी अपने सीक्रेट भी खुल जाते हैं। इससे एनर्जी व्यर्थ जाती है। अपनी ऊर्जा को बचा कर रखने के लिए कम बोलना हर हाल में आपके लिए लाभप्रद होगा।
व्यायाम न करना
व्यायाम हमारे शरीर, दिल और दिमाग को दुरूस्त रखता है इसलिए नियमित व्यायाम करना हमारे लिए लाभप्रद है पर युवा सोचते हैं कि अभी तो हमारे खाने व मस्ती मारने के दिन हैं।  बाद में व्यायाम कर लेंगे। अभी तो उम्र पड़ी है। वे यह नहीं जानते कि अधिक मस्ती उनके स्वास्थ्य पर कितनी भारी पड़ सकती है। योग, सैर, ऐरोबिक्स, ब्रिस्क वॉक, पावर योगा, तैराकी, साइकलिंग कर आप अपने शरीर और मन दोनों को प्रसन्न और स्वस्थ रख सकते हैं।
अगर नियमित व्यायाम नहीं करेंगे तो कई शारीरिक रोग लग सकते हैं। अगर तन अस्वस्थ रहेगा तो मन निराशा से भर जाएगा और दिमाग को सही आक्सीजन की मात्रा न मिलने से हमारा दिमाग भी शिथिल पड़ सकता है। अपने रक्त संचार को सुचारू रखने के लिए व्यायाम करना बहुत जरूरी है ताकि तन,मन स्वस्थ रहें।
आधुनिक गैजेट्स का अति प्रयोग
स्मार्टफोन, टीवी, आईपैड, म्यूजिक सिस्टम, टैबलेट, कंप्यूटर, लैपटॉप इन गैजेट्स के साथ युवा हर समय किसी न किसी रूप से जुड़ा रहता है जो उनके स्वास्थ्य हेतु नुकसानदेह है। कभी कभी युवा एक ही समय में दो उपकरणों का प्रयोग करते हैं जो ठीक नहीं। ये गैजेट्स हमारे आराम और आसानी के लिए ठीक जरूर हैं पर अति निर्भरता हमें नुकसान पहुंचाती है। युवा इससे बेखबर रहते हैं।
इन सबके ज्यादा प्रयोग से दिमाग के काम करने सोचने समझने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। बिजली के उपकरणों से निकलने वाली ध्वनि तरंगें हमारी ज्ञानेंद्रियों को प्रभावित करती हैं, नींद पूरी न होने से सिरदर्द, चक्कर आना आदि समस्याएं हमें घेर लेती हैं। इन सबसे दिमाग को पर्याप्त आक्सीजन नहीं मिलती और रक्त संचार भी प्रभावित होता है।
फास्ट फूड का अधिक सेवन
आज के युवा ने खाने पीने की आदतों को एकदम बदल दिया है। दूसरे देशों के फास्ट फूड को अपने खान-पान का अहम हिस्सा बना लिया है और अपने भारतीय व्यंजन उन्हें रास नहीं आते। आज के युवा वर्ग के नौकरी के घंटे भी भिन्न हैं। रात्रि में भी आफिस खुला रहता है। लेट ईवनिंग तक तो सभी प्राइवेट आफिस खुले रहते हैं। ऐसे में भूख मिटाने के लिए जंकफूड का सहारा लेना उनके लिए मजबूरी भी बन जाती है। फास्ट फूड आउटलेट और काफी शॉप्स और पिज्जा बर्गर की होम डिलीवरी के कारण युवाओं का जब मन करता है तो फोन पर आर्डर कर मंगवा लेते हैं और पेट की भूख को शांत करते हैं।
जंक फूड में बैड फैट्स और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होने से मोटापा बढ़ता है, दिमाग की सक्रियता कम होती है, असमय खाना खाने की आदत बनती है जो पेट और सेहत दोनों के लिए नुकसानदेह है।
लेट नाइट तक जागना:-
आज का युवा रात्रि में अगर फ्री है तो अपने आई पैड, मोबाइल, लैपटॉप पर बिजी रहता है। घंटों चैटिंग में व्यस्त रहने के कारण या इंटरनेट पर सर्च करने में उन्हें समय का पता नहीं लगता। लेट सोकर प्रात: भी देर से उठने की आदत बन जाती है जिससे उठते ही उनके शरीर में दर्द महसूस होता है, सिर भारी रहता है और देर से उठने के कारण काम पूरा नहीं हो सकता जिसका तनाव भी उनपर बना रहता है। अगर नींद पूरी न हो तो दिन भर दिमाग अशांत रहता है, इसका प्रभाव शरीर पर पड़ता है। चुस्ती और स्फूर्ति उनसे धीरे धीरे कोसों दूर होने लगती है।
- नीतू गुप्ता

 

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