कैल्शियम भी स्वास्थ्य के लिए जरूरी है
 

- राजेन्द्र मिश्र 'राज'

 
काकजस

शरीर के लिये 7 खनिज लवणों सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम, फास्फोरस, क्लोराइड, सल्फर,मैग्नीशियम की कुछ ज्यादा मात्रा तथा अन्य खनिज लवणों-आयरन, जिंक, कॉपर, आयोडीन, सिलेनियम, मैगनीज, कोबाल्ट इत्यादि की सूक्ष्म मात्रा में आवश्यकता होती है।

हमारे शरीर को सामान्य कार्यो के लिए अनेक पोषण तत्वों की भी इतनी ही आवश्यकता होती है। प्रोटीन, शर्करा, वसा, विभिन्न खनिज लवण, विटामिन तथा जल भी शरीर के लिए जरूरी हैं। सच तो यह भी है कि अन्य खनिज लवणों की तुलना में शरीर को कैल्शियम की कुछ ज्यादा ही आवश्यकता होती है।

यह हड्डियों और दांतों में जमा होकर इनको कठोरता प्रदान करता है। यह स्नायुओं के सामान्य कार्य, मांसपेशियों, हृदय के संकुचन, रक्त थक्का बनने, कोशिकाओं की बाह्य झिल्ली के सामान्य कार्यों के लिए भी आवश्यक है। यह अनेक एंजाइमों की क्रियाशीलता के लिए आवश्यक है। इतना ही नहीं, कैल्शियम आंतों से विटामिन बी-12 के अवशोषण में मदद करता है।

मानव शरीर में कुल कैल्शियम की मात्रा शरीर के वजन की 1.5 से 2 प्रतिशत अर्थात वयस्क व्यक्तियों में करीब 1000 से 1200 ग्राम होती है। शरीर में कुल कैल्शियम का करीब 99 प्रतिशत हड्डियों और दांतों में और शेष एक प्रतिशत अन्य ऊतकों और रक्त में होता है। स्वस्थ रहने के लिए भोजन के माध्यम से नियमित कैल्शियम की जरूरत लगभग 400 मि. ग्रा. प्रतिदिन होती है। महिलाओं में गर्भावस्था और शिशु को दुग्धपान कराते समय यह जरूरत और भी बढ़ जाती है। महिलाओं में रजोनिवृत्ति के पश्चात भी कैल्शियम की जरूरत ज्यादा होती है। कैल्शियम के अभाव में ही आस्टियोपोरोसिस की शिकायत उभरती है।

कैल्शियम और विटामिन डी में भी घनिष्ठ संबंध होता है। बचपन में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी से रिकेट्स रोग होने की संभावना हो सकती है। इन बच्चों का विकास मंद गति से होता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। हड्डियां भी कमजोर होने लगती हैं। यदि समय से उपचार नहीं किया गया तो हड्डियां स्थायी रूप से विकृत हो जाती हैं। युवावस्था में भी कैल्शियम की कमी से टिटेनी और आस्टियोमलेशिया रोग हो सकता है। इन मरीजों की हड्डियों में हमेशा ही दर्द रहता है। रजोनिवृत्ति के पश्चात महिलाओं का खान-पान यदि अनियमित रहा और कैल्शियम की कमी बढ़ती गई तो हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि कभी कभी हल्की सी चोट में भी वे टूट जाती हैं।

पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम की आपूर्ति के लिये आवश्यक है कि हम सभी दूध का सेवन करें। राजमां, सोयाबीन, बथुआ, करी पत्ता, हींग, सूखा नारियल, हल्दी,बादाम तथा मछली का भी सेवन फायदेमंद है। जिन्हें दूध पसंद नहीं, वे दूध से बने पदार्थ, खासकर, पनीर का सेवन करें। आंवला, केला, खजूर, संतरा और अंगूर का सेवन भी कैल्शियम की कमी को दूर करता है।
कैल्शियम की अधिकता भी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती हैं। रक्त में कैल्शियम की मात्रा बढ़ने से गुर्दे, आंतें और यहां तक कि मस्तिष्क भी प्रभावित हो सकता है। नये-नये शोध कार्यों से यह भी पता चला है कि कम मात्रा में कैल्शियम सेवन करने से ग्रास नली तथा बड़ी आंत के कैंसर होने की संभावनाएं बढ़ जाती है। धूप में भी रहना जरूरी है क्योंकि विटामिन डी की कमी से भी कैल्शियम की कमी विकट समस्याएं पैदा करती है। कैल्शियम की आपूर्ति संतुलित भोजन से की जा सकती है किंतु ऐसा हो नहीं रहा है। खान-पान के प्रति अभी हम उतने जागरूक नहीं हैं जितने अन्य पहलुओं को लेकर हैं। आस्टियोपोरोसिस रोग की संभावनाएं यदि कम करनी हैं तो हमें कैल्शियम की समुचित आपूर्ति के प्रति सजग होना होगा। याद रहे कि कैल्शियम शरीर के लिए एक अत्यंत ही महत्त्वपूर्ण खनिज है।

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