दिल के मरीज हैं तो हंसिए

- सीतेश कुमार द्विवेदी
 
हसना

रंजक प्रसंग आने पर हंसना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। हंसी से शरीर की भीतरी मांसपेशियों में हलचल होती है जो दिल के रोगी को भी लाभ पहुंचाती है।

हंसने से शरीर अनेक प्रकार के रोगों से मुक्त होता है। रक्त प्रवाह बढ़ता है। चयापचय की सक्रियता बढ़ती है। पाचन दुरूस्त रहता है। खाए गए पदार्थ से पोषक तत्वों का भरपूर शोषण होता है शरीर को लाभ मिलता है।

यह लाभ तभी मिलता है जब हंसी स्वाभाविक हो। कृत्रिम हंसी की तुलना में स्वत: आने वाली हंसी से अत्यधिक लाभ मिलता है।

दिल के रोगी यदि ऐसी स्वाभाविक हंसी का लाभ लें और हंसी के अवसरों का भरपूर उपयोग करें तो उन्हें रोग से राहत मिलेगी। दिल के दौरे की संभावना भी कम हो जाएगी।

वैज्ञानिकों एवं चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी पाया है कि जो व्यक्ति टीवी पर हंसने हंसाने वाले कार्यक्रम नियमित देखते हैं, उन्हें हृदय संबंधित रोग कम होते हैं।

हंसमुख व्यक्ति सरलता से हृदय रोग की गिरफ्त में नहीं आता। यदि कोई हृदय रोग से पीडि़त हो और हंसी मजाक की ओर झुकाव रखता हो, तब वह उसके  हृदय के लिए सुरक्षा कवच सिद्ध होगा। इससे कई अन्य लाभ भी हैं जैसे हंसने से तनावमुक्त हुआ जा सकता है। रक्तचाप सामान्य होता है। कोलेस्ट्रोल नहीं बढ़ता।

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