कब और कैसे खाएं भोजन?
 

- सुदर्शन भाटिया

 
कब और कैसे खाएं भोजन?

भोजन शरीर को चुस्त दुरूस्त रखने का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। स्वस्थ रहने तथा शरीर को क्रियाशील बनाए रखने के लिए भोजन संबंधी कुछ नियमों का पालन जरूरी है।

जिस समय आप काफी थके हैं, तब कुछ विश्राम करें। ऐसी अवस्था में भोजन की मेज पर मत जाएं। थोड़ा फ्रेश हो कर, हाथ मुंह धोकर, आंखों पर पानी के छीटें मारे, फिर भोजन करें।

शांत मन से तनाव रहित होकर भोजन करना चाहिए। चबा-चबा कर खाएं। सुपाच्य हो जाएगा। शीघ्र पचेगा। ऐसे में उस में लार अधिक होती है तथा पेट से निकलने वाले द्रव्य भी पूरा साथ दे कर भोजन पचा देते हैं।

जब भूख लगे, तभी भोजन करें। भूख न हो तो एक समय का भोजन त्याग दें। यही आधे दिन का व्रत हो जाएगा।

यदि भूख लगी हो और भोजन नहीं करेंगे तो बहुत हानि होगी। उस समय जठराग्नि प्रदीप्त हो चुकी होती है। भोजन जल्दी पच जाता है। अगला भोजन पाने को शरीर तैयार होगा।

भूख को टालना ठीक नहीं। इससे शरीर में दुर्बलता आ जाती है।

केवल दो मुख्य भोजन करें। तीन मुख्य भोजन लेना रोगी बना देता है। कुछ जपी-तपी तथा वृद्ध एक समय ही भोजन करते हैं। वे हर प्रकार से स्वस्थ भी रहते हैं। ऐसा इसलिए होता है कि वे तसल्ली से खाना खाकर उसे पचा भी सकते हैं।

नाश्ता और दोपहर के भोजन में चार घंटे का अंतर, दोनों मुख्य भोजन में सात घंटे का अंतर, नाश्ता तथा रात्रि भोजन में 11 घंटे का अंतर उचित माना जाता है।

सोने तथा रात्रि भोजन  में कम से कम दो घंटे का अंतर जरूर हो। रात के खाने के बाद टहलना जरूरी है।

सप्ताह में एक व्रत जरूर रखें। व्रत खोलने पर हल्का भोजन ही करें। दिन भर की कसर मत निकालें।

चबा-चबा कर भोजन करने से दांत तथा मसूड़े स्वस्थ रहते हैं।

भूख लगने पर खाया भोजन आसानी से पच जाता है। डकार शुद्ध आते हैं। अपान वायु कम बनती है तथा स्वत: निकल जाती है। भोजन विषाक्त नहीं हो पाता। दुर्गंध भी पैदा नहीं करता।

रात का भोजन हल्का हो। दिन भर का आहार संतुलित, सुपाच्य, नियमित, सादा, सात्विक हो। मिर्च मसाले, तेल, घी कम हो। किसी भी अवस्था में कब्ज न हो, इसके लिए खूब चबाकर खाएं। कब्ज हो जाए तो आंवला चूर्ण आदि लेकर इसे दूर करें।  

ये कुछ ऐसी बातें हैं जिन्हें ध्यान में रखकर, अपना कर हम अपने स्वास्थ्य को ठीक रख सकते हैं। रोग पास नहीं फटकेंगे। दीर्घ आयु पाना भी संभव होगा।

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