चालीस तक पहुंचने से पहले....

 
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आधुनिक महिलाएं अब 40 वर्ष पार करने पर न तो अधिक घबराती हैं और न ही अपनी खूबसूरती कम होने देती हैं क्योंकि उन्हें मालूम है कि उम्र के उस पड़ाव में वे अपने आपको कैसे कैरी कर सकती हैं। वे मानसिक रूप से पहले ही तैयारी कर चलती हैं जिसे उन्हें पहले वाली महिलाओं की तरह पछताना न पड़े।
हाल ही के शोध के अनुसार, महिलाएं अब 40 के पार जाने के लिए बिलकुल नहीं डरती क्योंकि वे आगे के होने वाले बदलावों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहती हैं। वे समय पर ही चिकित्सकों, मनोचिकित्सकों से परामर्श कर अपने आपको उसी अनुसार ढालने के लिए तैयार रहती हैं।
रिंकल्स से परेशान रहने वाली महिलाएं अब जान चुकी हैं कि जितने भी एंटी रिंकल प्रॉडक्ट्स हैं, वे त्वचा पर कुछ भी प्रभाव नहीं डालते, इसलिए अब वे इस ओर अधिक ध्यान नहीं देती।
फैशन के नये तौर तरीकों को आधुनिक महिलाएं आसानी से अपना लेती हैं। इसके लिए वे उम्र को रास्ते का रोड़ा नहीं मानती पर फैशन अप्रैल को लेकर की गई स्टडी के अनुसार 40 के बाद अक्सर महिलाओं को टांगें और थाइज दिखाना अधिक पसंद नहीं होता।
40 पार करने से पहले ही महिलाएं अपनी डाइट और फिगर के प्रति सावधान हो जाती हैं वे फैट्स और शुगर की मात्रा पर नियंत्रण रखना सीख जाती हैं और नियमित व्यायाम करना भी। उन्हें इस बात का ज्ञान होता है कि डाइट कंट्रोल और व्यायाम उन्हें आगे आने वाले जीवन में चुस्त रख सकते हैं।
40 पार करने से पहले ही महिलाएं इस बात को लेकर भी जागरूक रहती हैं कि उन्हें पार्टनर के साथ कैंडल लाइट डिनर लेना नहीं छोडऩा, न ही अपनी मित्र मंडली को त्यागना है और न ही बच्चों के साथ का त्याग करना है। वे अपने समय को योजनाबद्ध तरीके से लेकर चलती हैं ताकि उन्हें बाद में निराश न होना पड़े। अपनी जिंदगी को उसी अंदाज से आगे ले जाना जानती हैं चाहे वे वर्किंग हो या नॉनवर्किंग। हाउसवाइफ होने पर कोई क्लब जॉइन कर व अपने अंदाज से जीना जानती हैं।
आज की महिला 4० पार करने से पहले ही अपनी फिगर के अनुसार कपड़ों का चुनाव करती हैं और उसे पहनने में हिचक महसूस नहीं करती। वे जानती हैं कि उनकी फिगर पर क्या सूट करता है इसलिए पहनने में कोई परहेज नहीं करती।
उम्र के साथ वे अपने बालों को संवारना भी जानती हैं और अपने सफेद होने वालों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहती हैं। उन्हें समय पर ही मेंहदी, कलर जिसकी भी आवश्यकता हो, उस अनुसार बालों का ध्यान रखती हैं।
अपने साथी के प्यार के इज़हार के मामले में भी वो मैच्योर रहती हैं। उन्हें ओछी हरकतें अब अच्छी नहीं लगती, न ही वे अपने जन्मदिन और शादी की सालगिरह पर चॉकलेट और फूलों की आशा रखती हैं। इस उम्र तक पहुंचते पहुंचते प्यार का सही अर्थ समझती हैं। खाली प्रदर्शन पर ही विश्वास नहीं करती।
उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचते पहुंचते पैसों को कहां इनवेस्ट किया जाए और कौन से बिल क्रेडिट कार्ड द्वारा चुका दिए जाएं, मुश्किल वक्त के लिए पैसों को बचा कर रखा जाए, पेंशन प्लान कैसे किया जाए, सबकी समझ उन्हें आ जाती है और कुछ फैसले वे स्वयं कर लेती हैं।
इसलिए आधुनिक महिला 39 तक पहुंचकर परेशान नहीं होती। जीवन को कैसे और अच्छे ढंग से जीना है, पहले से उसकी तैयारी कर चलती हैं और अपने अच्छे क्षणों को संजो कर रखती हैं ताकि बढ़ती उम्र में निराशा का दामन न पकडऩा पड़े।
- नीतू गुप्ता

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