जब पति अपनी मां को ज्यादा महत्त्व दे !

- शिखा चौधरी
 
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अधिकतर परिवारों में यह समस्या होती है कि पति अपनी पत्नी को महत्त्व न देकर हर बात अपनी मां से ही पूछता है। मां जो कहती है वही करता है। अपने खाने-पीने, नहाने, धोने, कपड़े पहनने तक हर बात वह मां की मरजी के अनुसार ही करता है। वह शादी के बाद भी अपनी हर जरूरत के लिए अपनी मां पर ही निर्भर रहता है। यही बात पत्नियों के लिए आक्रोश भरी होती है।

प्रत्येक पत्नी हमेशा यही चाहती है कि उसका पति आत्म-निर्भर हो। वह किसी भी रूप से किसी पर भी निर्भर न हो लेकिन यदि वह सारी बातें अपनी मां की ही मानता है तो वह आत्मनिर्भर कहां हुआ।  इससे पत्नी का उससे नाराज होना लाजिमी है। इससे पति-पत्नी का रिश्ता कमजोर होता चला जाता है। सास-बहू के बीच भी दरार पड़ जाती है।

अपनी मां को सभी प्यार करते हैं बेटा भी, बेटी भी, और फिर सभी को अपनी मां को प्यार करना चाहिए, इसका महत्त्व स्वीकारना चाहिए किन्तु इसके साथ-साथ बाकी जिम्मेदारियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बेटे को अपनी मां के लाड-प्यार का सम्मान करना चाहिए, उसे महत्त्व भी देना चाहिए किन्तु शादी के बाद उसे यह भी ध्यान रखना चाहिए कि उसकी शादी हो चुकी है और उसकी पत्नी  को भी प्यार, सम्मान और महत्त्व की आवश्यकता है। एक लड़की अपना घर-परिवार छोड़कर अजनबी ससुराल में आती है तो उसका भी अपने पति पर कोई अधिकार बनता है। उसे यहां अपने पति के सहारे और विश्वास की जरूरत होती है।

पत्नी को भी अपनी सोच बदल देनी चाहिए। अगर आपका पति अपनी मां को ज्यादा महत्त्व दे रहा है तो आप भी उसकी मां को ज्यादा महत्त्व दे कर देखिये। पति के व्यवहार में परिवर्तन आएगा।

उसे धीरे-धीरे अहसास होगा कि हर फैसले में उसकी मां ही महत्त्वपूर्ण नहीं हो सकती। आप भी महत्त्वपूर्ण हो सकती हैं। वह धीरे-धीरे आपके करीब होता चला जाएगा किन्तु एक बात का खास ख्याल रखें कि जो सम्मान आप अपने पति से चाहती हैं, क्या उतना सम्मान या महत्त्व आप भी अपने पति को दे रही हैं।

कई बार क्या होता है कि लड़कियां भी अपने माता-पिता की लाडली होती हैं। शादी के बाद वे हर छोटी-बड़ी बात अपने मायके पहुंचाती रहती हैं जो पतियों को अक्सर नागवार गुजरता है। वे अपनी पत्नी को कई बार कोई भी बात कहते हुए हिचकते हैं। उन्हें यह डर होता है कि पता नहीं कब उनकी यह बात पत्नी अपने मायके में बता दे।

इस तरह पति के मन में भी असुरक्षा की भावना आ जाती है। उसे अपनी पत्नी पर भरोसा नहीं हो पाता। इससे दोनों के रिश्तों में दूरियां आने लगती हैं। इसलिए पत्नी को भी समझदारी से चलना चाहिए। सम्मान पाने के लिए पहले सम्मान देना पड़ता है।

इसलिए पति को अपनी मां और पत्नी को अपने मायके को महत्त्व उतना ही देना चाहिए जितना निभाया जा सके जिससे पति-पत्नी के रिश्ते में दरार न आये।

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