चीतों के भोजन के लिए चीतल छोड़े जाने का फैसला, बिश्नोई महासभा ने जताई आपत्ति 

 
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नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए 8 चीतों के लिए भोजन के रूप में राजगढ़ के चीतल छोड़े जाने पर अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा ने आपत्ति जताई है। बिश्नोई समाज ने इस फैसले को अवैज्ञानिक और संवेदनहीन बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। इस संबंध में सोमवार को महासभा के अध्यक्ष देवेन्द्र बूड़िया ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिख कर इसे तुरंत रोकने की मांग की है।

बिश्नोई महासभा ने कहा है कि नामीबिया से लाए गए 8 चीतों को देश के उद्यान में दोबारा बसाने की कोशिशों के बीच राजस्थान में विलुप्त हो रहे हिरण और चीतल को वहां भेजा जा रहा है। इस घटना से बिश्नोई समाज आहत है। समाज के लोग बरसों से वन्य जीव और पर्यावरण के संरक्षण के लिए अपने प्राणों की आहुति देता आया है। इसलिए सरकार को चीतों के लिए चीतल परोसने के इस अवैज्ञानिक और संवेदनहीन आदेश को निरस्त किया जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर देश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए 8 चीते छोड़े गए हैं।

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