सरकार का फैसला, अब दिल्ली से बाहर दक्षिणी कमान क्षेत्र में होगी सेना दिवस परेड

 
नई दिल्ली, 19 सितम्बर (हि.स.)। भारतीय सेना ने हर साल 15 जनवरी को दिल्ली कैंट में होने वाली सेना दिवस परेड को राष्ट्रीय राजधानी के बाहर स्थानांतरित करने का फैसला किया है। अगले साल की सेना दिवस परेड दक्षिणी कमान क्षेत्र में होगी। भारतीय सेना को 1949 में फील्ड मार्शल केएम करियप्पा के रूप में पहला कमांडर-इन-चीफ मिलने की याद में हर साल 'सेना दिवस' मनाया जाता है। भारत 2023 में अपना 75वां सेना दिवस मनाएगा और पहली बार दिल्ली से बाहर सेना दिवस की परेड होगी।  राष्ट्रीय राजधानी से महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और उत्सवों को स्थानांतरित करने के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप भारतीय सेना ने अपनी वार्षिक सेना दिवस परेड को दिल्ली से बाहर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है और अगले साल इसे दक्षिणी कमान क्षेत्र में आयोजित करेगी। भारतीय वायु सेना ने भी हर साल 'एयर फोर्स डे' पर 08 अक्टूबर को दिल्ली के पास हिंडन एयरबेस में होने वाले वार्षिक फ्लाई-पास्ट और परेड को चंडीगढ़ के लिए स्थानांतरित करने के लिए हाल ही में फैसला लिया है।  सेना के अधिकारियों ने कहा कि अब सेना दिवस परेड अलग-अलग स्थानों पर बारी-बारी से आयोजित की जाएगी और हर साल जगह बदली जाएगी। पिछले आठ वर्षों में दुनिया की सबसे बड़ी द्विवार्षिक रक्षा प्रदर्शनी डिफेन्स एक्सपो जैसे बड़े कार्यक्रम अलग-अलग शहरों में आयोजित किये गए हैं। पहली बार 2016 में डिफेन्स एक्सपो को दिल्ली से बाहर गोवा में आयोजित किया गया। इसके बाद 2018 में दक्षिण चेन्नई में, 2020 में लखनऊ में और अब 2022 में डिफेन्स एक्सपो का 12वां संस्करण 18-22 अक्टूबर के बीच गांधीनगर, गुजरात में आयोजित किया जा रहा है।  दिल्ली कैंट स्थित परेड ग्राउंड में हर साल 15 जनवरी को 'सेना दिवस' इसलिए मनाया जाता रहा है, क्योंकि इसी दिन 1949 को अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर से फील्ड मार्शल केएम करियप्पा ने पहले भारतीय सेनाध्यक्ष के रूप में चार्ज लिया था। परेड से दो दिन पहले सेना प्रमुख वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सेना की सालाना रिपोर्ट मीडिया के सामने रखते हैं। दिल्ली कैंट के परेड ग्राउंड में होने वाली 'परेड' हर भारतीय में गर्व, कृतज्ञता और सम्मान की भावना जगाती है। भारतीय सशस्त्र बल खूबसूरत मार्चिंग करके अपनी रेजिमेंटों और देश की 'अत्याधुनिक' रक्षा प्रणाली को पेश करके उसे देखने का मौका देते हैं।  भारतीय सेना 2023 में अपना 75वां सेना दिवस मनाएगी जिसे अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से बाहर दक्षिणी कमान के एक क्षेत्र में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है। ब्रिटिश शासन से भारतीय सेना में सत्ता के हस्तांतरण का यह जश्न सैन्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर दर्शाता है। यह दिन उन सैनिकों को भी सम्मानित करता है जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में अपने प्राणों की आहुति दे दी। सैन्य हार्डवेयर, आकस्मिक प्रदर्शन और लड़ाकू प्रदर्शन भी परेड का हिस्सा होते हैं और भारतीय सेना के बहादुर सैनिकों को भी सेना पदक जैसे वीरता पुरस्कार दिए जाते हैं।  फील्ड मार्शल करियप्पा स्वतंत्र भारत के इतिहास में पांच सितारा रैंक रखने वाले दो सेना अधिकारियों में से एक हैं। दूसरे फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ थे, जिन्होंने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान हमले में सेना का नेतृत्व किया था। भारतीय सेना की दक्षिणी कमान में दो कोर शामिल हैं जिनका मुख्यालय जोधपुर और भोपाल में है। स्थिर संरचनाओं में महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा शामिल हैं, जिसका मुख्यालय मुंबई में और दक्षिण भारत क्षेत्र चेन्नई में मुख्यालय के साथ है। कमांड में ग्यारह राज्य और चार केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। इसकी संरचना, प्रतिष्ठान और इकाइयां 19 छावनियों और 36 सैन्य स्टेशनों में फैली हुई हैं।  हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत
नई दिल्ली। भारतीय सेना ने हर साल 15 जनवरी को दिल्ली कैंट में होने वाली सेना दिवस परेड को राष्ट्रीय राजधानी के बाहर स्थानांतरित करने का फैसला किया है। अगले साल की सेना दिवस परेड दक्षिणी कमान क्षेत्र में होगी। भारतीय सेना को 1949 में फील्ड मार्शल केएम करियप्पा के रूप में पहला कमांडर-इन-चीफ मिलने की याद में हर साल 'सेना दिवस' मनाया जाता है। भारत 2023 में अपना 75वां सेना दिवस मनाएगा और पहली बार दिल्ली से बाहर सेना दिवस की परेड होगी।

राष्ट्रीय राजधानी से महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और उत्सवों को स्थानांतरित करने के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप भारतीय सेना ने अपनी वार्षिक सेना दिवस परेड को दिल्ली से बाहर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है और अगले साल इसे दक्षिणी कमान क्षेत्र में आयोजित करेगी। भारतीय वायु सेना ने भी हर साल 'एयर फोर्स डे' पर 08 अक्टूबर को दिल्ली के पास हिंडन एयरबेस में होने वाले वार्षिक फ्लाई-पास्ट और परेड को चंडीगढ़ के लिए स्थानांतरित करने के लिए हाल ही में फैसला लिया है।

सेना के अधिकारियों ने कहा कि अब सेना दिवस परेड अलग-अलग स्थानों पर बारी-बारी से आयोजित की जाएगी और हर साल जगह बदली जाएगी। पिछले आठ वर्षों में दुनिया की सबसे बड़ी द्विवार्षिक रक्षा प्रदर्शनी डिफेन्स एक्सपो जैसे बड़े कार्यक्रम अलग-अलग शहरों में आयोजित किये गए हैं। पहली बार 2016 में डिफेन्स एक्सपो को दिल्ली से बाहर गोवा में आयोजित किया गया। इसके बाद 2018 में दक्षिण चेन्नई में, 2020 में लखनऊ में और अब 2022 में डिफेन्स एक्सपो का 12वां संस्करण 18-22 अक्टूबर के बीच गांधीनगर, गुजरात में आयोजित किया जा रहा है।

दिल्ली कैंट स्थित परेड ग्राउंड में हर साल 15 जनवरी को 'सेना दिवस' इसलिए मनाया जाता रहा है, क्योंकि इसी दिन 1949 को अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर से फील्ड मार्शल केएम करियप्पा ने पहले भारतीय सेनाध्यक्ष के रूप में चार्ज लिया था। परेड से दो दिन पहले सेना प्रमुख वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सेना की सालाना रिपोर्ट मीडिया के सामने रखते हैं। दिल्ली कैंट के परेड ग्राउंड में होने वाली 'परेड' हर भारतीय में गर्व, कृतज्ञता और सम्मान की भावना जगाती है। भारतीय सशस्त्र बल खूबसूरत मार्चिंग करके अपनी रेजिमेंटों और देश की 'अत्याधुनिक' रक्षा प्रणाली को पेश करके उसे देखने का मौका देते हैं।

भारतीय सेना 2023 में अपना 75वां सेना दिवस मनाएगी जिसे अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से बाहर दक्षिणी कमान के एक क्षेत्र में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है। ब्रिटिश शासन से भारतीय सेना में सत्ता के हस्तांतरण का यह जश्न सैन्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर दर्शाता है। यह दिन उन सैनिकों को भी सम्मानित करता है जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में अपने प्राणों की आहुति दे दी। सैन्य हार्डवेयर, आकस्मिक प्रदर्शन और लड़ाकू प्रदर्शन भी परेड का हिस्सा होते हैं और भारतीय सेना के बहादुर सैनिकों को भी सेना पदक जैसे वीरता पुरस्कार दिए जाते हैं।

फील्ड मार्शल करियप्पा स्वतंत्र भारत के इतिहास में पांच सितारा रैंक रखने वाले दो सेना अधिकारियों में से एक हैं। दूसरे फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ थे, जिन्होंने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान हमले में सेना का नेतृत्व किया था। भारतीय सेना की दक्षिणी कमान में दो कोर शामिल हैं जिनका मुख्यालय जोधपुर और भोपाल में है। स्थिर संरचनाओं में महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा शामिल हैं, जिसका मुख्यालय मुंबई में और दक्षिण भारत क्षेत्र चेन्नई में मुख्यालय के साथ है। कमांड में ग्यारह राज्य और चार केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। इसकी संरचना, प्रतिष्ठान और इकाइयां 19 छावनियों और 36 सैन्य स्टेशनों में फैली हुई हैं।

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