पर्यावरण जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा, यह हमारे जीवन का मुख्य स्रोत

 
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मेरठ। आज ग्लोबल सोशल कनेक्ट ने वन विभाग तथा सिविल एकेडमी के सहयोग से उच्च प्राथमिक विद्यालय , मामेपुर में पर्यावरण एवं खेल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया । बेहतर पर्यावरण, बेहतर कल एवम अपने हुनर को पहचानों का मूल अर्थ समझाते हुए संस्था के सचिव अभिषेक शर्मा ने बच्चों को ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को समझाया और कहा कि हमारा पर्यावरण हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हमारे जीवन का मुख्य स्रोत है, क्योंकि हम पर्यावरण से भोजन, पानी, हवा प्राप्त करते हैं। वास्तव में पर्यावरण हमारा संतुलन बनाए रखता है जहां हम हर पल सांस लेते हैं और जीते हैं। इस प्रकार हमारे जीवन की गुणवत्ता भी हमारे पर्यावरण पर निर्भर करती है। यह तो स्पष्ट है कि हमारे अनियंत्रित कार्यों के कारण हमने अपने पर्यावरण के पारिस्थितिक संतुलन को हानि पहुंचाई है और इसलिए इन मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। यह सही समय है जब हमें अपने पर्यावरण को बनाए रखने के लिए कुछ कठोर कार्रवाइयां करनी चाहिए और हमारी अगली पीढ़ियों के लिए रहने के लिए हमारी जगह एक बेहतर जगह बनानी चाहिए। संस्था की सदस्य पल्लवी सोम ने कहा कि इस सदी में हम लोग विकास के नाम पर पर्यावरण को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं । अब हम ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं कि हम पर्यावरण संरक्षण के बिना इस ग्रह पर लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकते हैं इसलिए हम सभी को पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए । पर्यावरण शब्द का निर्माण दो शब्दों परि और आवरण से मिलकर बना है, जिसमें परि का मतलब है हमारे आसपास अर्थात जो हमारे चारों ओर है, और 'आवरण' जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है । संस्था की अध्यक्षा ऋचा सिंह ने बच्चों को खेल के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि खेलोगे कूदोगे बनोगे खराब, पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब” बच्चों के लिए यह जुमला अक्सर इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या यह वास्तव में सही है। अच्छे भविष्य और बेहतर करियर के लिए पढ़ाई का जितना महत्व है, उतना ही महत्व बेहतर जीवन के लिए खेलों का भी है। शरीर के उचित विकास और फिजिकल फिटनेस के लिए विद्यार्थियों के जीवन में खेलों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।वास्तव में खेल को एकता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए विद्यार्थियों के जीवन में खेल की भूमिका बढ़ जाती है। जो बच्चे अपने स्कूल के समय से विभिन्न तरह के खेल खेलते हैं तो उन्हें ये तो पता चलता ही है कि कोई खेल कैसै खेला जाता है, साथ में टीम के साथ कैसे खेला जाता है, टीम में एकता और एकजुटता के लिए क्या महत्वपूर्ण है, बच्चा यह भी स्किल सीखता है। जिसके कारण उसमें टीम के नेतृत्व की भावना विकसित होती है। कार्यक्रम में पर्यावरण एवं खेल की तरफ बच्चों की रुचि देखते हुए संस्था के सदस्य बिल्लू सिंह ने कुछ सवाल पूछ कर एक प्रतियोगिता भी कराई जिसमें बच्चों से पूछा गया कि वातावरण में सबसे ज्यादा कौनसी गैस पाई जाती है ? भारत का सबसे पुराना टाइगर रिज़र्व कौन सा है ? पारिस्थितिकी से आप क्या समझते हैं ? हॉकी का जनक किसे कहा जाता है ? दुनिया का सबसे तेज़ भागने वाला एथलिट कौन है ? जिन बच्चों ने सही जवाब दिए उनको पर्यावरण मित्र की शील्ड एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया । विद्यालय के बच्चों में एक अलग उत्साह देखने को और इसी उत्साह में एक बालिका भावना कश्यप कक्षा नौंवी ऐसी मिल गयी जो कि बहुत मेधावी है और सभी सवालों के जवाब पूरे विवरण के साथ दे रही थी । इस बालिका को अभिषेक शर्मा की तरफ से आगे सरकारी नौकरी की तैयारी के लिए पढ़ाई में हर तरीके से सहायता करने का वादा किया गया । कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था की अध्यक्षा ऋचा सिंह , सचिव अभिषेक शर्मा , पल्लवी सोम , बिल्लू सिंह , नवीन अग्रवाल , रुद्राक्ष चौधरी , विद्यालय के अध्यापक
अमित चौहान, अध्यापिका सीमा कश्यप, मंजू रानी ,शालू तोमर ,यशोदा ,जफा कुमारी, अर्चना सक्सेना ,सविता यादव आदि का योगदान रहा ।

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