नीट की परीक्षा में रोक लगाने के लिए तमिलनाडु विधानसभा में पेश किया गया बिल

 
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चेन्नई । तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने सोमवार को राज्य के लिए राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) को वापस लेने की मांग वाला एक विधेयक पेश किया। द्रमुक अपने अध्यक्ष स्टालिन के नेतृत्व में राज्य में यह वादा कर सत्ता में आई थी कि वह नीट को रद्द कर देगी।
यह दूसरी बार है जब विधानसभा में इस तरह के उद्देश्य के लिए एक विधेयक पेश किया जा रहा है। ऐसा ही एक विधेयक एआईएडीएमके शासन के दौरान विधानसभा द्वारा पारित किया गया था जिसे राष्ट्रपति की सहमति नहीं मिली थी।
विधेयक को पेश करते हुए स्टालिन ने कहा कि द्रमुक शुरू से ही नीट का विरोध करती रही है और सत्ता में आने के बाद इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू कर दी है।
उन्होंने विधेयक के लिए विपक्षी दलों का समर्थन मांगा है।
स्टालिन ने कहा कि सरकार 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर मेडिकल सीटों के लिए प्रवेश प्रक्रिया लाने की कोशिश कर रही है।
उनके अनुसार, विधेयक सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए मेडिकल कॉलेजों में 7.5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करता है।
स्टालिन ने कहा कि सरकार विधेयक के विधानसभा में पारित होने के बाद राष्ट्रपति की सहमति लेने की कोशिश करेगी।
पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता के. पलानीस्वामी ने कहा कि अन्नाद्रमुक विधेयक को अपना समर्थन देगी।
तमिलनाडु में नीट के छात्रों और राजनीतिक दलों ने इसका कड़ा विरोध किया है।
शनिवार को, तमिलनाडु के सलेम जिले के कुलियूर गांव में मेडिकल सीट के इच्छुक 19 वर्षीय धनुष अपने घर पर मृत पाए गए।
पुलिस सूत्रों ने कहा कि मृतक धनुष को रविवार को राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा में अपने तीसरे प्रयास के लिए उपस्थित होना था।
धनुष ने 2019 में अपनी कक्षा 12 की परीक्षा पास की थी और रविवार को परीक्षा की तैयारी कर रहा था। हालांकि, सुबह जब उसके माता-पिता उसे जगाने गए तो वह मृत पाया गया।
पुलिस उनके घर पहुंची और शव को मेट्टूर के सरकारी सामान्य अस्पताल ले जाया गया। मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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