दमोहः भाजपा को रणनीति पर पूरा भरोसा,कांग्रेस किस्मत के सहारे

 
दमोहः भाजपा को रणनीति पर पूरा भरोसा,कांग्रेस किस्मत के सहारे

दमोह। मतदाताओं द्वारा प्रत्याशियों की किस्मत 17 अप्रैल को ईव्हीएम मशीन में कैद कर दिया गया था और 2 मई को परिणाम सामने आने वाले हैं। किसको मिलेगा ताज और किसको वनवास यह चर्चाओं में बना हुआ है। भारतीय जनता पार्टी को जहां अपनी रणनीति पर पूरा भरोसा है वहीं कांग्रेस को यह यकीन है कि उनका प्रत्याशी लगातार होने वाली हार के दाग को इस बार धो देगा? मतदान के प्रतिशत को देखते हुये कयासों के दौर चल रहे हैं और दोनो राजनीतिक दलों के अपने अपने गणित हैं जो जीत का दावा कर रहे हैं।

ज्ञात हो कि मध्यप्रदेश में दमोह विधानसभा 55 अकेला वह क्षेत्र था जहां उप चुनाव हुआ। भारतीय जनता पार्टी प्रदेश में सत्तारूढ है जबकि कांग्रेस प्रमुख विपक्षी दल है। दोनों ही इस सीट को अपने पास रखना चाहती हैं। रिक्त होने के पूर्व यह सीट कांग्रेस के पास थी और यहां से राहुल सिंह लोधी विधायक हुआ करते थे जो कि वर्तमान में भाजपा में हैं और भारतीय जनता पार्टी की टिकिट पर उन्होंने पुन: उपचुनाव लड़ा है। जबकि सामने कांग्रेस प्रत्याशी अजय टंडन रहे, मुकाबला टक्कर का होने के बाद भी अजय टंडन के पास अच्छे आक्रामक नेताओं की फौज का अभाव स्पष्ट रूप से दिखलायी देता रहा। जबकि भाजपा के नेता, वक्ता, रणनीतिकारों की एक बडी फौज लेकर मैदान में दिखलायी दी। पल-पल बदलती रणनीति के साथ भाजपा लगातार कांग्रेस को भ्रमित कर मतदातों के बीच अपनी बात पहुंचाने में सफल होती रही जबकि कांग्रेस सिर्फ बिकाउ और टिकाउ के बीच आकर अटक जाती थी।

भाजपा का चलो गांव की ओर अभियान का रंग-

दमोह विधानसभा 55 के उपचुनाव में भाजपा के कदवर नेताओं के साथ रणनीतिकारों ने पूरी ताकत झोंक दी और वह सफल होते देखे गये। जहां दमोह नगर में कांग्रेस अपना बेहतरीन प्रदर्शन कर रही थी तो वहीं भाजपा ने शहर के साथ गांव पर ज्यादा फोकस कर दिया। शहर से ज्यादा ग्रामीणांचलों में हुये मतदान ने इस सफलता को परिणाम में बदलने के संकेत तो उसी दिन दे दिये थे। दमोह संासद प्रहलाद सिंह पटेल ने जहां अंतिम दिनों में ताबड़तोड़ सभाएं की, खूब उडनखटोला उडाया। तो वहीं प्रभारी मंत्री भूपेन्द्र सिंह, गोपाल भार्गव एवं प्रदेश के अनेक मंत्रियों ने मोर्चा संभाला।

बात करें संगठन की तो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने स्वयं डेरा डालकर कमान अपने हाथों में ले रखी थी। लगातार प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चैहान एवं उमा भारती ने ताबड़तोडं सभाएं करके बडे अंतर को पाटने में सफलता प्राप्त की। आम मतदाता को यह समझाने में सरकार और पार्टी काफी हद तक कामयाब होते दिखी कि देश प्रदेश में किसकी सरकार है वहीं कार्य करेगा और दूसरा नहीं। सूत्रों की माने तो भाजपा दमोह सीट को अपने पास सुरक्षित रखने में कामयाब हो सकती है और जीत हार का अंतर भी हजारों में रहेगा। राजनीति के जानकारों की माने तो भारतीय जनता पार्टी 5 से 10 हजार मतों के अंतर से विजयी हो सकती है। वहीं कुछ वरिष्ठ और राजनैतिक यह भी अपने गणित के आधार पर बतलाते हैं कि यह अंतर हाल ही में हुये विधानसभा उपचुनाव के परिणामों के अनुरूप भी हो सकता है ?

कांग्रेेस का शहर, असर पर बेअसर भी-

दमोह विधानसभा उपचुनाव के दौरान कांगे्रस का नारा टिकाउ और बिकाउ असर दिखाने के बाद भी बेअसर होता देखा गया। ग्रामों में जहां यह नारा असर नहीं छोड पाया तो शहर भी असर दिखाते दिखाते रह गया। कांग्रेस की पारंपरिक वोटें भी नहीं निकल पायी, अनेक जगहों पर अजय टंडन अकेले दिखे कभी आक्रामक तरीके से मैदान में चुनाव लडने की ताल ठोकने वाले टंडन के साथ अनुभवी, रणनीतिकारों, आक्रामक नेताओं की कमी अनेक जगह दिखी। राहुल सिंह जहां अजय टंडन  के प्रति नर्मी दिखाते तो वहीं आक्रामक होते कांग्रेस प्रत्याशी और नेता असर छोडने में कामयाब नहीं हो पा रहे थे। नाथ के बिना एकदम अनाथ दिखी कांग्रेस दमोह में जबकि नाथ भी अपना असर दिखलाने में उतने सफल नहीं दिखे जितनी कांग्रेस को उम्मीद थी। दिग्विजय सिंह की तो बात सभी जानते हैं उनके आने का कितना असर पार्टी, मतदाताओं पर पड़ा चर्चाओं में बना रहा।

मलैया साथ, सिद्धार्थ के हवाले नगर-

भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति पर कार्य करते हुये आमजन के बीच से भ्रम दूर करने में कामयाबी हासिल कर ली कि जयंत मलैया और उनका परिवार नाराज है। ज्ञात हो कि जयंत कुमार मलैया को राहुल सिंह ने कांग्रेस की टिकिट पर चुनाव लड़ते हुये गत वर्ष 2018 में पराजित किया था। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी और यह सरकार 15 माह भी नहीं चल पायी। राहुल सिंह ने कांग्रेस और विधायकी दोनों से त्यागपत्र दे दिया और भाजपा की सदस्यता ले ली थी। राहुल सिंह लोधी को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया और प्रबल दावेदार जयंत मलैया एवं उनके पुत्र सिद्धार्थ मलैया का नरम गर्म रवैया जन के बीच भ्रम पैदा करता रहा। भाजपा ने जयंत मलैया और सिद्धार्थ मलैया को मनाने काम पर लगाने और जन को समझाने में सफलता प्राप्त की और कांग्रेस की उम्मीद पर पानी फेर दिया। हालांकि चुनाव में क्या हुआ क्या नहीं संगठन और सत्ता पूरी खबर लेेता रहा और रणनीति बदलता रहा। अपनों को साधने और विरोधियों को चकमा देकर आगे बढने में भाजपा कामयाब दिखी जो परिणाम को अपने पक्ष मेें करती दिख रही है?

कोरोना, मतगणना और तैयारियां-

कोरोना महामारी को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने नियम सख्त कर दिए हैं। दमोह में लगातार बढ़ रहे कोरोना पॉजिटिव केसों को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने 2 मई को होने वाली दमोह उपचुनाव मतगणना के लिए नियम सख्त कर दिए हैं। निर्वाचन आयोग ने मतगणना में जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए कोरोना की जांच और नेगेटिव रिपोर्ट को अनिवार्य कर दिया है। जिन लोगों को कोरोना वैक्सीन लग चुकी है उन्हें मतगणना स्थल में प्रवेश से पहले अपना वैक्सीनेशन प्रमाण पत्र दिखाना होगा। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी तरुण राठी ने निर्देश दिए हैं कि सभी मीडिया कर्मियों का एंटीजन टेस्ट 1 मई को सुबह 11बजे से मतगणना स्थल पॉलिटेक्निक कॉलेज में किया जाएगा। इसी तरह मतगणना अभी कर्ताओं का भी एंटीजेन टेस्ट किया जाएगा। जिन लोगों का टेस्ट नहीं हो पाएगा, उन्हें मतगणना शुरू होने के कुछ समय पूर्व ही तुरंत अपना टेस्ट कराना होगा। मतगणना स्थल पर केवल उन्हीं लोगों को प्रवेश मिलेगा जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव होगी।

मोबाइल, आई पॉड नहीं जाएंगे अंदर

मीडिया कर्मियों के साथ ही सभी प्रत्याशियों, मतगणना अधिकारियों, मतगणना अभिकर्ताओं को अपने मोबाइल फोन, आईपॉड और अन्य सभी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स मतगणना स्थल के बाहर ही छोडऩा पड़ेंगे। कोई भी व्यक्ति किसी भी तरह का इलेक्ट्रॉनिक गैजेट मतगणना स्थल पर नहीं ले जा सकेगा।

मतगणना के लिए सभी तैयारियां पूरी 26 राउंड में होगी गिनती

दमोह उपचुनाव में कुल 22 प्रत्याशी मैदान में थे, जिसमें से एक शिवसेना प्रत्याशी राज पाठक 8 अप्रैल को बांसा में मुख्यमंत्री की सभा में भाजपा में शामिल हो चुके थे। हालांकि वोटिंग सभी 22 प्रत्याशियों के लिए हुई थी। मतगणना दो कमरों में सात-सात टेबल पर की जाएगी। एक बार में 14 पोलिंग स्टेशन की गिनती होगी। कुल 26 राउंड गिनती होना है, आखिरी राउंड में कुल 9 पोलिंग की गिनती होगी। एक कक्ष में 7 और दूसरे कक्ष में दो मशीनों की वोटों की गिनती की जाएगी। सबसे पहले डाक मतपत्रों की गणना की जाएगी, उसके बाद मशीनों से मतों की गिनती होगी।

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