लखीमपुर जा रहे उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत बरेली में रोका

 
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बरेली,- लखीमपुर खीरी जा रहे उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब प्रभारी हरीश रावत को बरेली जिले में प्रवेश करने से प्रशासन ने रोक दिया।

श्री रावत अपने काफिले के साथ लखीमपुर खीरी जाना चाह रहे थे। बरेली जिला प्रशासन के अनुरोध को स्वीकार करते हुए वह उत्तराखंड वापस जाने की बात को मान लिया और वापस उत्तराखंड चले गए।

पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री रावत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ लखीमपुर खीरी जाना चाह रहे थे। पुलिस प्रशासन ने अनुरोध किया कि वह अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ बरेली से गुजर सकते हैं काफिले के साथ लखीमपुर नहीं जा सकते। श्री रावत इस बात पर वह राजी नहीं थे उनका कहना था कि हम अपने काफिले के साथ लखीमपुर खीरी जाएंगे। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने उन्हें बरेली उत्तराखंड की सीमा बहेड़ी टोल प्लाजा पर ही रोक लिया।

श्री रावत उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल के साथ हाईवे पर ही बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे, कई बार उन्होंने बरेली सीमा में प्रवेश करने का प्रयास किया लेकिन बड़ी संख्या पुलिस बल के रहते वह बरेली की सीमा में प्रवेश नहीं कर सके।

श्री अग्रवाल का कहना है कि श्री रावत से बहुत विनम्रता के साथ अनुरोध किया गया कि वह अकेले सुरक्षाकर्मियों के साथ जा सकते हैं लेकिन वह नहीं माने। काफी देर हीला हवाली हुज्जत के बाद, वापस उत्तराखंड की ओर चले गए।

इस बीच श्री रातव ने संवाददताओं से कहा कि आज किसान अपने हक की आवाज़ उठाता है तो उसे गाड़ी से कुचल कर मार दिया जाता है और जब प्रियंका गांधी पीड़ित किसानों ने मिलने के लिए जाती है तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है लेकिन किसानों की हत्या के आरोपी अभी गिरफ्तार नहीं किए गये।

उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र खतरे में है जो भी अपने हक की आवाज़ उठाएगा उसे या मार दिया जाएगा या उसे जेल में डाल दिया जाएगा । इतना जुल्म तो अंग्रेजों के दौर में भी नही हुआ है जितना भाजपा सरकार में हो रहा है । उन्होंने कहा कि हमारा काम यहां आकर अपना विरोध दर्ज कराना था जो हो गया है यदि प्रशासन उन्हें लखीमपुर जाने की इजाज़त देता है तो वो पीड़ित किसानों से जरूर मिलेंगे । पूर्व मुख्यमंत्री श्री रावत ने मौके पर पहुंचे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया और उत्तराखंड वापस हो गए।

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