नैनीतालः बंदियों की सुरक्षा, पेरोल मामले में सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

 
नैनीतालः बंदियों की सुरक्षा, पेरोल मामले में सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कोरोना महामारी के चलते जेलों में बंदियों की सुरक्षा और उन्हें पेरोल पर छोड़े जाने पर विचार किये जाने के मामले में सुनवाई करते हुए सोमवार को सरकार से छह मई तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है। साथ ही जेल महानिरीक्षक को अगली सुनवाई पर वर्चुअली अदालत में पेश होने के निर्देश भी दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा ने हरिद्वार निवासी ओमवीर सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किये हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रदेश की जेलों में क्षमता से अधिक बंदी हैं। हरिद्वार, देहरादून व हल्द्वानी की जेलों में यह संख्या कई सौ गुना है।
अत्यधिक संख्या व भीड़भाड़ के चलते कोरोना महामारी के कारण जेलों में बंदियों की सुरक्षा को खतरा है। कई बंदी इस महामारी के शिकार हो चुके हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश पर पिछले साल कोरोना महामारी के दौरान बंदियों को पेरोल पर छोड़े जाने के मामले में प्रदेश में एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया था और कमेटी की समीक्षा के बाद कुछ बंदियों को पेरोल या शार्ट टर्म बेल पर छोड़ गया था।
याचिकाकर्ता की ओर से इस बार भी मांग की गयी कि कोरोना महामारी की भयावहता को देखेते हुए पिछले साल की तरह बंदियों को पेरोल व शार्ट टर्म बेल पर छोड़ने पर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही बंदियों की सुरक्षा को लेकर जेलों में सुरक्षात्मक कदम उठाये जाने चाहिए।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अजयवीर पुंडीर ने बताया कि मामले को सुनने के बाद अदालत ने सरकार और जेल महानिरीक्षक से आगामी छह मई तक विस्तृत जवाब पेश करने को कहा है। अदालत ने सरकार से प्रदेश में जेलों, सजायाफ्ता व विचाराधीन बंदियों, कोरोना महामारी से ग्रसित बंदियों और जेलों में सुरक्षा को लेकर किये गये चिकित्सा उपायों जैसे आक्सीजन टैंक, आक्सीजन बेड, वेंटिलेटर, पीपीई किट, मास्क व ग्लब्स को लेकर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा।

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