भारत ने एनएएम बैठक में पाकिस्तान की कश्मीर मुद्दा उठाने की कोशिश की खारिज, बताया निराधार
नई दिल्ली। भारत ने गुरुवार को अजरबैजान की राजधानी बाकू में गुटनिरपेक्ष आंदोलन (एनएएम) की मंत्रिस्तरीय बैठक में कश्मीर मुद्दा उठाने के पाकिस्तान के प्रयास को खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) संजय वर्मा ने एनएएम मंत्रिस्तरीय बैठक में अपना बयान देते हुए कहा कि भारत पाकिस्तान की “निराधार और आधारहीन टिप्पणियों” को […]
नई दिल्ली। भारत ने गुरुवार को अजरबैजान की राजधानी बाकू में गुटनिरपेक्ष आंदोलन (एनएएम) की मंत्रिस्तरीय बैठक में कश्मीर मुद्दा उठाने के पाकिस्तान के प्रयास को खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) संजय वर्मा ने एनएएम मंत्रिस्तरीय बैठक में अपना बयान देते हुए कहा कि भारत पाकिस्तान की “निराधार और आधारहीन टिप्पणियों” को खारिज करता है।
वर्मा ने कहा, “हम कल फिर से बांडुंग सिद्धांतों के घोर उल्लंघन के गवाह बने, जब पाकिस्तान के हमारे प्रतिष्ठित सहयोगी ने एनएएम एजेंडे में एक द्विपक्षीय मुद्दा लाया। यह खेदजनक है कि हमारे मंच की पवित्रता को फिर से अनुमानित रूप से अपमानित किया गया। हम उनके निराधार और निराधार को खारिज करते हैं टिप्पणी।”
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को “आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि वे खुद को कहां पाते हैं, और क्या चीज उन्हें वहां ले आई है।”
भारत कश्मीर को एक द्विपक्षीय मुद्दा मानता है, जिसे वह पाकिस्तान के साथ बातचीत के जरिए हल करना चाहता है।
ये भी पढ़ें बहू ने ससुर पर लगाए छेड़छाड़ के गंभीर आरोप, मामला दर्ज ससुर की अश्लील हरकतों से परेशान थी पीड़ितावर्मा ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि एनएएम का अतीत गौरवशाली रहा है, लेकिन इसका भविष्य इस बात से परिभाषित होगा कि हम यूएनएससी सुधार, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल प्रौद्योगिकी, मानक सेटिंग, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और आतंकवाद जैसे मुद्दों सहित हमारे समय की कुछ परिभाषित चुनौतियों से कैसे निपटते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या हम एनएएम के सिद्धांतों पर लौट सकते हैं, जो वास्तव में गुटनिरपेक्ष होना है, और एक दूसरे के साथ खड़े होने में सक्षम होना है।”
वर्मा ने कहा, एनएएम में विकासशील दुनिया के बड़े हिस्से, ग्लोबल साउथ शामिल हैं- जिसने इन अनिश्चितताओं और संघर्षों के लिए अतिरिक्त नुकसान उठाया है और आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान का सामना किया है जो पूरी तरह से उनके स्वयं के निर्माण से नहीं थे।
उन्होंने कहा, “4एफ जो विकासशील दुनिया के लिए सबसे ज्यादा मायने रखते हैं – भोजन, वित्त, ईंधन और उर्वरक – उन्हें निश्चितता, पारदर्शिता और समानता के साथ उपलब्ध कराए जाने चाहिए। एनएएम के सदस्यों के रूप में हमारे लिए अपने पक्ष में खड़ा होना महत्वपूर्ण है विकासशील दुनिया के मित्र, जो संकट में हैं, अस्तित्व संबंधी मुद्दों से जूझ रहे हैं।”
वर्मा ने सभा को सूचित किया कि भारत की जी20 की मौजूदा अध्यक्षता ने ग्लोबल साउथ की चिंताओं को जी20 नेताओं के एजेंडे में सबसे आगे रखा है।
उन्होंने कहा, “यहां, मैं इस वर्ष की शुरुआत में भारत द्वारा आयोजित वॉइस ऑफ द ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन का उल्लेख कर रहा हूं, जिसमें लगभग 130 देशों ने भाग लिया था। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमारे कुछ साथी एनएएम सदस्यों ने जी20 एजेंडे को आकार देने में योगदान दिया है, जैसा कि इसमें जलवायु लचीलापन और पर्यावरण स्थिरता के साथ-साथ डिजिटल व्यापार कनेक्टिविटी और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के लिए वित्तपोषण भी शामिल है, जो हमारे एनएएम भागीदारों के लिए महत्वपूर्ण विषय हैं।”
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

टिप्पणियां