केरल स्नेक बोट सीज़न की शुरुआत रही खराब, महिलाओं से भरी नाव पलटी
तिरुवनंतपुरम। केरल स्नेक बोट सीजन की प्रसिद्ध चंपाकुलम मूलम ‘वल्लम काली’ (नाव दौड़) की शुरुआत उस समय अशुभ हो गई, जब एक ‘सभी महिलाओं’ वाली नाव पलट गई। सौभाग्य से, नाव पर सवार सभी 17 महिलाओं को बचा लिया गया। इसके बाद उन्हें पास के एक अस्पताल लेकर जाया गया। जहां उनकी तबीयत ठीक बताई […]
तिरुवनंतपुरम। केरल स्नेक बोट सीजन की प्रसिद्ध चंपाकुलम मूलम ‘वल्लम काली’ (नाव दौड़) की शुरुआत उस समय अशुभ हो गई, जब एक ‘सभी महिलाओं’ वाली नाव पलट गई। सौभाग्य से, नाव पर सवार सभी 17 महिलाओं को बचा लिया गया। इसके बाद उन्हें पास के एक अस्पताल लेकर जाया गया। जहां उनकी तबीयत ठीक बताई जा रही है।
इसे पारंपरिक रूप से पहली स्नेक बोट रेस के रूप में जाना जाता है, जो राज्य के केंद्रीय जिलों और उसके आसपास नाव रेस की एक श्रृंखला के नए सत्र की शुरुआत करती है। यह रेस पंबा नदी पर होती है। यह घटना सोमवार दोपहर बाद की है जब दो रेसें लगभग एक साथ आयोजित की गई थीं।
रेस के दौरान विभिन्न आकारों और आकृतियों की नावों के बीच प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। यहां एक प्रदर्शनी वस्तु और दो नावें भी हैं जिन्हें ‘थेकेनोडी’ के नाम से जाना जाता है, जिनमें से एक पर चप्पू संभालने वाली सभी महिलाएं हैं, जबकि नाव पर 5 पुरुष होते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दो ‘थेकेनोडी’ की प्रदर्शनी प्रतियोगिता समाप्त होने से पहले, दो थेकेनोडी नौकाओं में से एक पलट गई। यह आयोजकों की गलती थी। इस कार्यक्रम को देखने के लिए जिला अधिकारी और एक राज्य मंत्री मौजूद थे। जैसे ही नाव पलटी, रेस का रोकने का ऐलान कर दिया गया।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

टिप्पणियां