स्मार्ट और सुरक्षित होगा भारत का टेलिकॉम नेटवर्क: TRAI अध्यक्ष ने बताया कैसे AI बदलेगा आपकी दुनिया
नई दिल्ली। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अध्यक्ष अनिल कुमार लाहोटी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब टेलीकॉम सेक्टर में कोई अतिरिक्त तकनीक नहीं रह गई है, बल्कि यह नेटवर्क के डिजाइन, संचालन और उपभोक्ता अनुभव का आधार बन चुकी है। जिम्मेदार एआई से उपभोक्ता भरोसा और पारदर्शिता बढ़ेगी तथा टेलीकॉम सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा में सुधार होगा।
ट्राई के इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान शुक्रवार को यहां सुषमा स्वराज भवन में दूरसंचार में जिम्मेदार एआई विषय पर आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्ष अनिल कुमार लोहाटी ने कहा कि भारत जैसे बड़े देश में, जहां 1.2 अरब से ज्यादा मोबाइल ग्राहक और लगभग एक अरब डेटा उपयोगकर्ता हैं, वहां एआई आधारित ऑटोमेशन अब विकल्प नहीं बल्कि जरूरी हो गया है। कार्यक्रम में सरकार के प्रतिनिधि, वैश्विक तकनीकी कंपनियों के नेता, टेलीकॉम सेवा प्रदाता और अंतरराष्ट्रीय नीति समुदाय के सदस्य शामिल रहे।
अध्यक्ष ने बताया कि एआई का इस्तेमाल नेटवर्क प्रदर्शन सुधारने, खराबी का पूर्वानुमान लगाने, ऊर्जा बचाने, ग्राहक अनुभव बेहतर करने और स्पैम व धोखाधड़ी रोकने में किया जा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि स्पैम कॉल और संदेशों पर कार्रवाई के तहत 21 लाख से ज्यादा नंबर बंद किए गए हैं और एआई व ब्लॉकचेन आधारित फिल्टरिंग से शिकायतें घटकर प्रति करोड़ कॉल और एसएमएस पर लगभग एक तक रह गई हैं।
उन्होंने कहा कि एआई का इस्तेमाल जितना बड़ा होता है, उसका असर भी उतना ही व्यापक होता है। इसलिए पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा बेहद जरूरी है। ट्राई ने 2023 में एआई और बिग डेटा के इस्तेमाल पर सिफारिशें जारी की थीं, जिसमें जोखिम आधारित नियामक ढांचा सुझाया गया था। 2024 में रेगुलेटरी सैंडबॉक्स की सिफारिशें भी दी गईं, ताकि 5जी और भविष्य की 6जी नेटवर्क पर एआई आधारित समाधान सुरक्षित माहौल में परखे जा सकें।
अध्यक्ष ने कहा कि आज की दो मुख्य सत्र इसी जिम्मेदारी को दर्शाते हैं। पहला सेशन नेटवर्क को एआई युग के लिए तैयार करने पर केंद्रित है, जबकि दूसरा सेशन ग्राहक भरोसा बनाने और एआई आधारित संचालन में पारदर्शिता व नैतिकता पर चर्चा करेगा। भारत का अनुभव वैश्विक स्तर पर उपयोगी साबित हो सकता है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से साझा चुनौतियों का समाधान संभव है।
उन्होंने कहा कि एआई टेलीकॉम का भविष्य तय करेगा, लेकिन इसे किस तरह डिजाइन और लागू किया जाता है, वही तय करेगा कि यह भविष्य भरोसेमंद, समावेशी और टिकाऊ होगा। ट्राई सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करता रहेगा ताकि एआई नवाचार के साथ-साथ जनता के हितों की भी रक्षा हो सके।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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