प्रीपेड से पोस्टपेड कनेक्शन में केवाईसी की जरूरत नहीं

 
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नयी दिल्ली।  सरकार ने दूरसंचार के क्षेत्र में प्रक्रियागत सुधार कर जनता को मोबाइल कनेक्शन के लिए बार बार दस्तावेज जमा कराने के झंझट से मुक्ति दे दी है। उपभोक्ताओं को ‘अपने ग्राहक को जानें’ (केवाईसी) फॉर्म बार बार भरने की जरूरत नहीं होगी।
केवाईसी फॉर्म की प्रक्रिया में भी सुधार अब ऐप के माध्यम से ग्राहक को स्वयं ही ई-केवाईसी भरने की अनुमति दी जा रही हैै। ई-केवाईसी के लिए ली जाने वाली राशि को कम करके केवल एक रुपया कर दिया गया है। प्री-पेड से पोस्ट-पेड और इसके विपरीत स्थानांतरण के लिए फिर से नए केवाईसी की आवश्यकता नहीं होगी।
संचार, सूचना प्रौद्याेगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज केन्द्रीय मंत्रिमंडल के इन निर्णयों की जानकारी देते हुए संवाददाताओं को बताया कि सरकार ने दूरसंचार क्षेत्र में चार प्रक्रियागत सुधार किये हैं जिनसे कंपनियों के साथ साथ जनता को सुविधा होगी।
उन्होंने कहा कि लोगों को मोबाइल कनेक्शन देते समय कागजी फॉर्म भरवाये जाते हैं और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के विभिन्न गोदामों में लगभग 300-400 करोड़ ऐसे काग़ज़ी ग्राहक अधिग्रहण फॉर्म (सीएएफ) पड़े हैं। इन सीएएफ को डेटा के डिजिटल स्टोरेज से बदल दिया जाएगा।
अन्य प्रक्रियागत सुधारों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने नीलामी कैलेंडर को पहले से तय करने का निर्णय लिया है। स्पेक्ट्रम नीलामी सामान्यतः प्रत्येक वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही में आयोजित की जाएगी। व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए वायरलेस उपकरण के आयात के लिए 1953 की सीमा शुल्क अधिसूचना के तहत आयात लाइसेंस की कठिन शर्त को हटा दिया गया है। इसे स्व-घोषणा से स्थापित किया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि दूरसंचार टावरों के लिए साक्फा (फ्रीक्वेंसी आवंटन के लिए स्थायी सलाहकार समिति) मंजूरी में ढील दी गई। दूरसंचार विभाग पोर्टल पर स्व-घोषणा के आधार पर डेटा स्वीकार करेगा। अन्य एजेंसियों के पोर्टल (जैसे नागरिक उड्डयन) को दूरसंचार विभाग के पोर्टल से जोड़ा जाएगा।

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