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                <title>अंतर्राष्ट्रीय - रॉयल बुलेटिन</title>
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                <description>अंतर्राष्ट्रीय RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नेपाल बाढ़ तबाही: 275 भारतीय अब भी लापता, भारत राहत और पुनर्वास में सहयोग के लिए प्रतिबद्ध</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली। नेपाल में आई त्रासदी के बाद भारत राहत और बचाव कार्यों में लगातार सहयोग कर रहा है। अभी भी 275 भारतीय नागरिक लापता हैं। इनमें से 49 चीन से लापता हैं। भारत ने नेपाल की सरकार और जनता के प्रति एकजुटता जताते हुए पुनर्निर्माण और पुनर्वास प्रयासों में भी सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।<br /><br /></p>
<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को साप्ताहिक पत्रकार वार्ता में बताया नेपाल में अब तक 166 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचाया गया है। वहीं, चीन से 1,907 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। तिब्बत में फिलहाल कोई भारतीय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/international/nepal-flood-disaster-275-indians-still-missing-india-committed-to/article-224610"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/77472e4d3e1b601a50cfb29be6539a3f_262429263.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। नेपाल में आई त्रासदी के बाद भारत राहत और बचाव कार्यों में लगातार सहयोग कर रहा है। अभी भी 275 भारतीय नागरिक लापता हैं। इनमें से 49 चीन से लापता हैं। भारत ने नेपाल की सरकार और जनता के प्रति एकजुटता जताते हुए पुनर्निर्माण और पुनर्वास प्रयासों में भी सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।<br /><br /></p>
<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को साप्ताहिक पत्रकार वार्ता में बताया नेपाल में अब तक 166 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचाया गया है। वहीं, चीन से 1,907 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। तिब्बत में फिलहाल कोई भारतीय यात्री फंसा नहीं है।<br /><br /></p>
<p>भारत ने राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 54 विशेषज्ञ और कर्मी नेपाल भेजे हैं। इनमें 30 सुरंग बचाव विशेषज्ञ, 19 फोरेंसिक विशेषज्ञ और पांच सदस्यीय चिकित्सा दल शामिल हैं। भारतीय बचाव और फोरेंसिक दल नेपाल में स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।<br /><br /></p>
<p>प्रवक्ता ने बताया कि भारत ने नेपाल के राहत एवं बचाव अभियान में अबतक करीब 95 टन राहत सामग्री और सात विमान भेजे हैं। कल दो भारतीय विमान काठमांडू पहुंचे, जिनमें 21 टन राहत सामग्री थी। नेपाल की जरूरत के अनुसार आने वाले दिनों में और अधिक प्राथमिक उपचार किट तथा अन्य आवश्यक सामग्री भेजी जाएगी।<br /><br /></p>
<p>जलवायु परिवर्तन से जुड़े एक सवाल पर जायसवाल ने कहा कि भारत इसे साझा चुनौती मानता है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने की कार्यवाही साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं के सिद्धांत पर आधारित होनी चाहिए। उनके अनुसार ऐतिहासिक रूप से अधिक उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार विकसित देशों को उत्सर्जन कम करने के साथ विकासशील देशों को वित्त और प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराने में नेतृत्व करना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 20:04:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अर्चना सिंह | Online News Editor]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी के नाम बड़ी उपलब्धि: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार का बनाया रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  रोम। जॉर्जिया मेलोनी के नेतृत्व वाली सरकार इटली गणराज्य के युद्धोत्तर इतिहास की सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार बन गई है। उसने पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। जॉर्जिया मेलोनी ने 22 अक्टूबर 2022 को इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में पद संभाला था। उनकी सरकार अब तक 1,413 दिन पूरे कर चुकी है। इस उपलब्धि पर मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर खुशी जताई और इसे आभार तथा जिम्मेदारी की भावना के साथ स्वीकार किया।</p>
<p>  </p>
<p>उन्होंने लिखा, "आज हमारी सरकार इटालियन गणराज्य के इतिहास की सबसे लंबे समय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/international/giorgia-meloni-italy-prime-minister-record/article-224543"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/202609043929767.jpg" alt=""></a><br /><p> रोम। जॉर्जिया मेलोनी के नेतृत्व वाली सरकार इटली गणराज्य के युद्धोत्तर इतिहास की सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार बन गई है। उसने पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। जॉर्जिया मेलोनी ने 22 अक्टूबर 2022 को इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में पद संभाला था। उनकी सरकार अब तक 1,413 दिन पूरे कर चुकी है। इस उपलब्धि पर मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर खुशी जताई और इसे आभार तथा जिम्मेदारी की भावना के साथ स्वीकार किया।</p>
<p> </p>
<p>उन्होंने लिखा, "आज हमारी सरकार इटालियन गणराज्य के इतिहास की सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार बन गई है। मैं इस तथ्य का स्वागत आभार और बड़ी जिम्मेदारी के साथ करती हूं। क्योंकि स्थिरता कोई ऐसा रिकॉर्ड नहीं है जिसे दिखाया जाए, बल्कि यह वह आधार है जो किसी देश को योजना बनाने, फैसले लेने, अपने वादे निभाने और सम्मान हासिल करने में मदद करता है।"</p>
<p> </p>
<p>मेलोनी ने कहा कि पिछले चार वर्षों में उनकी सरकार ने रोजगार बढ़ाने, बेरोजगारी कम करने, परिवारों और कारोबारों को समर्थन देने, सुरक्षा मजबूत करने, सरकारी वित्त को जिम्मेदारी से संभालने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर इटली की साख और प्रभाव को बढ़ाने के लिए काम किया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार को अच्छे नतीजे मिले हैं, लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, "यह स्थिरता किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है, बल्कि उस एकजुट गठबंधन का परिणाम है जिसने चार वर्षों तक एक साझा दृष्टिकोण के साथ शासन किया।</p>
<p> </p>
<p>हमारा यह साथ किसी के विरोध में नहीं, बल्कि इटली के विकास की योजना को पूरा करने के लिए था। मुझे नहीं लगता कि यह कोई संयोग है कि आज गणराज्य के इतिहास में सबसे लंबे कार्यकाल वाली तीनों सरकारें मध्य-दक्षिणपंथी (सेंटर-राइट) गठबंधन की रही हैं। स्थिरता तभी संभव होती है जब गठबंधन के पास समान मूल्य, लक्ष्य और देश के लिए एक साझा दूरदृष्टि हो।" मेलोनी ने कहा कि यह स्थिरता 2022 में इटली की जनता की ओर से जताए गए भरोसे की वजह से संभव हो सकी है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने जनता के भरोसे को कभी भी 'ब्लैंक चेक' नहीं माना और न ही इसे कभी हल्के में लिया।</p>
<p> </p>
<p>अगले वर्ष होने वाले चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार फिर से जनता के सामने जाएगी और बताएगी कि उसने क्या काम किया है और भविष्य के लिए उसकी क्या योजनाएं हैं। उन्होंने लिखा, "अगले साल हम फिर नागरिकों के सामने जाएंगे। हम बताएंगे कि हमने क्या किया, क्या करना बाकी है और भविष्य के लिए हमारी क्या सोच है। इसके बाद जनता तय करेगी कि क्या हम इस सफर को आगे बढ़ाने के हकदार हैं। तब तक हमारा काम जारी रहेगा।" इटली की प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार इस ऐतिहासिक उपलब्धि को बारी शहर में चिह्नित करेगी, जहां सरकार अपने कामकाज और आगे की योजनाओं पर चर्चा करेगी।</p>
<p> </p>
<p>22 अक्टूबर 2022 को राष्ट्रपति सर्जियो मातारेला ने रोम स्थित क्विरिनाले पैलेस में मेलोनी को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई थी। वह इटली के इतिहास में इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला हैं। मेलोनी ने 15 साल की उम्र में एक छात्रा और युवा आंदोलन की सदस्य के रूप में राजनीति में कदम रखा था। 21 साल की उम्र में वह रोम प्रांत की पार्षद चुनी गईं और 27 साल की उम्र में 'एज‍ियोन जियोवानी' पार्टी के युवा संगठन 'एलेन्जा नाज‍ियोनाले' की नेता बनीं। 29 साल की उम्र में वे पहली बार संसद सदस्य चुनी गईं। 15वीं संसद के दौरान उन्होंने प्रतिनिधि सभा की उपाध्यक्ष के रूप में भी काम किया। मेलोनी के नाम इटली की सबसे कम उम्र की मंत्री बनने का रिकॉर्ड भी है। वर्ष 2008 में, केवल 31 साल की उम्र में, वह इटली की युवा मामलों की मंत्री बनी थीं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 18:17:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अर्चना सिंह | Online News Editor]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेपाल में कुदरत का चमत्कार: 10 दिन बाद अंधी सुरंग से जिंदा निकला संजय शाह, 240 घंटे तक मौत से लड़ी जंग</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>काठमांडू (नेपाल)</strong>। नेपाल में भीषण प्राकृतिक आपदा के बीच उम्मीद और मानवीय हौसले का एक अभूतपूर्व चमत्कार देखने को मिला है। काठमांडू के पास त्रिशूली 3A जलविद्युत परियोजना की गहरी और अंधेरी सुरंग के भीतर पिछले 10 दिनों (240 घंटे) से मलबे के बीच फंसे संजय शाह को बचाव दल ने सुरक्षित और जिंदा बाहर निकाल लिया है। बिना रोशनी, भोजन और बाहरी मदद के उफनती नदी तथा भारी मलबे के बीच इतने दिनों तक संजय की सांसों का चलते रहना किसी करिश्मे से कम नहीं माना जा रहा है।</p>
<h5><strong>सर्ज शाफ्ट से आई आवाज और शुरू हुआ ऑपरेशन</strong></h5>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/international/%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0--10-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%AF-%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B9--240-%E0%A4%98%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%A4-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%82%E0%A4%97/article-224389"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/capture.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>काठमांडू (नेपाल)</strong>। नेपाल में भीषण प्राकृतिक आपदा के बीच उम्मीद और मानवीय हौसले का एक अभूतपूर्व चमत्कार देखने को मिला है। काठमांडू के पास त्रिशूली 3A जलविद्युत परियोजना की गहरी और अंधेरी सुरंग के भीतर पिछले 10 दिनों (240 घंटे) से मलबे के बीच फंसे संजय शाह को बचाव दल ने सुरक्षित और जिंदा बाहर निकाल लिया है। बिना रोशनी, भोजन और बाहरी मदद के उफनती नदी तथा भारी मलबे के बीच इतने दिनों तक संजय की सांसों का चलते रहना किसी करिश्मे से कम नहीं माना जा रहा है।</p>
<h5><strong>सर्ज शाफ्ट से आई आवाज और शुरू हुआ ऑपरेशन</strong></h5>
<p>इस बेहद साहसिक और भावुक रेस्क्यू ऑपरेशन की पुष्टि राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के सांसद और इंजीनियर श्रीराम न्यौपाने ने सोशल मीडिया के जरिए की।<br /><strong>आहट ने बढ़ाई उम्मीद</strong>: बचाव दल जब सर्च शाफ्ट के पास जांच कर रहा था, तब उन्हें अंदर से कुछ इंसानी आहटें और आवाजें सुनाई दीं।<br /><strong>त्वरित कार्रवाई</strong>: आवाजें मिलने की पुष्टि होते ही नेपाली सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) ने राहत एवं बचाव कार्य को पूरी गति दे दी।<br /><strong>सकारात्मक संदेश</strong>: सुरक्षा बलों ने जब लाउडस्पीकर के माध्यम से सुरंग के अंदर आवाज लगाकर ढांढस बंधाया, तो अंदर से संजय ने जवाब दिया, जिसके तुरंत बाद उन्हें सफलतापूर्वक बाहर खींच लिया गया।</p>
<h5><strong>सुरंग के भीतर अभी भी फंसे हो सकते हैं अन्य लोग</strong></h5>
<p>सुरंग से बाहर आते ही मेडिकल टीमों ने संजय शाह को अपनी निगरानी में लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य जांच शुरू कर दी है। हालांकि, रेस्क्यू के दौरान एक और चिंताजनक जानकारी सामने आई है। संजय शाह से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सुरंग के भीतर अभी भी कुछ अन्य लोग फंसे हो सकते हैं जो जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे हैं। सर्ज शाफ्ट के अंदर अन्य लोगों की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद सर्च ऑपरेशन को और व्यापक कर दिया गया है।</p>
<h5><strong>अन्य लोगों के लिए दुआएं</strong></h5>
<p>सांसद (आरएसपी) इंजीनियर श्रीराम न्यौपाने ने बताया कि सुरंग से संजय शाह का सुरक्षित बाहर निकलना न केवल उनके परिजनों बल्कि इस आपदा से जूझ रहे पूरे देश के लिए उम्मीद की एक नई किरण बनकर उभरा है। फिलहाल पूरा देश सुरंग में फंसे बाकी लोगों के सकुशल बाहर आने की प्रार्थना कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>मुख्य समाचार</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 14:30:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ओ.पी. पाल। स्वतंत्र पत्रकार]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बलूचिस्तान में बड़ा हमला! हथियारबंद लोगों ने निर्माण कंपनी के 14 वाहन उड़ाए, इलाके में हाई अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के बलोचिस्तान में हथियारबंद लोगों ने एक निर्माण कंपनी के 14 वाहनों को विस्फोट कर उड़ा दिया। इस घटना की अभी तक किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है। इन वाहनों में आठ डंपर, दो लोडर, एक एक्सकेवेटर, एक ट्रेलर, एक बिटुमेन डिस्ट्रीब्यूटर और एक वॉटर बाउजर हैं। यह वही जगह है जहां हथियारबंद लोगों ने पाकिस्तान की सेना और डिप्टी कमिश्नर के दल पर हमला किया था।<br /><br />द बलोचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक किसी भी संगठन ने कंस्ट्रक्शन कंपनी के वाहनों हुए हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। अलबत्ता<br /><br />बलोच लिबरेशन आर्मी ने जियारत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/breaking-news/big-attack-in-balochistan-armed-people-blew-up-14-vehicles/article-224297"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/b31437c58102d999de0302df902a84e7_2072951858.jpg" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के बलोचिस्तान में हथियारबंद लोगों ने एक निर्माण कंपनी के 14 वाहनों को विस्फोट कर उड़ा दिया। इस घटना की अभी तक किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है। इन वाहनों में आठ डंपर, दो लोडर, एक एक्सकेवेटर, एक ट्रेलर, एक बिटुमेन डिस्ट्रीब्यूटर और एक वॉटर बाउजर हैं। यह वही जगह है जहां हथियारबंद लोगों ने पाकिस्तान की सेना और डिप्टी कमिश्नर के दल पर हमला किया था।<br /><br />द बलोचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक किसी भी संगठन ने कंस्ट्रक्शन कंपनी के वाहनों हुए हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। अलबत्ता<br /><br />बलोच लिबरेशन आर्मी ने जियारत क्रॉस पर पाकिस्तानी सेना पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली है और कहा है कि इस हमले में सेना के 18 जवान मारे गए। बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी के आधिकारिक चैनल हुकल ने आज जियारत क्रॉस हमले का एक मिनट ग्यारह सेकंड का वीडियो भी जारी किया।<br /><br />इसके अलावा ऑल पार्टीज कैच के प्रवक्ता ने बयान में कहा है कि पिछले चार दिनों से तुर्बत में कुछ अनजान यू-ट्यूबर्स की मौजूदगी और अलग-अलग संगठन के दौरे की वजह से सभी सड़कें बंद हैं। इन यू-ट्यूबर्स के तुर्बत प्रेस क्लब के दौरे के दौरान पत्रकारों के साथ बुरा बर्ताव किया गया। टीचिंग हॉस्पिटल के दौरे के दौरान यू-ट्यूबर्स के सुरक्षा कर्मचारियों ने डॉक्टरों की बेइज्जती की और पैरामेडिक स्टाफ को पीटा।<br /><br />उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों, खासकर इस्लामाबाद और लाहौर से लाए गए यू-ट्यूबर्स की सुरक्षा के लिए बलोचिस्तान के तुर्बत शहर में सिक्योरिटी हाई अलर्ट पर रखी गई है। इसकी वजह से लोगों को अपने रोजाना के कामों में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p> </p>
<h3> </h3>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>मुख्य समाचार</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://royalbulletin.in/breaking-news/big-attack-in-balochistan-armed-people-blew-up-14-vehicles/article-224297</link>
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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 10:18:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[रविता ढांगे | Online News Editor ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘मेरे गांव के करीब 200 लोग लापता हैं', नेपाल में तबाही से बचे लोगों ने सुनाई भयावह दास्तान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  काठमांडू। नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के करीब एक सप्ताह बाद भी तबाही का मंजर लोगों के जेहन में ताजा है। प्रभावित इलाकों से बचाए गए और फिलहाल अस्थायी शिविरों में रह रहे लोगों ने गुरुवार को बातचीत में एक दशक से अधिक समय में नेपाल की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक के बाद की भयावह स्थिति बयां की। मुस्तांग के एक मठ में बने अस्थायी शिविर में रह रहे एक व्यक्ति ने बताया कि उनके गांव का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा तबाह हो चुका है और स्थानीय आबादी के लगभग 200</p>
<p> </p>
<p>हमारे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/international/nepal-flood-disaster-survivors-story/article-224253"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/202609033928685.jpg" alt=""></a><br /><p> काठमांडू। नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के करीब एक सप्ताह बाद भी तबाही का मंजर लोगों के जेहन में ताजा है। प्रभावित इलाकों से बचाए गए और फिलहाल अस्थायी शिविरों में रह रहे लोगों ने गुरुवार को बातचीत में एक दशक से अधिक समय में नेपाल की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक के बाद की भयावह स्थिति बयां की। मुस्तांग के एक मठ में बने अस्थायी शिविर में रह रहे एक व्यक्ति ने बताया कि उनके गांव का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा तबाह हो चुका है और स्थानीय आबादी के लगभग 200 लोग अब भी लापता हैं। उन्होंने कहा, “हमारे लोगों को तिमुरे से बड़ी मुश्किल से बचाकर यहां लाया गया।</p>
<p> </p>
<p>हमारे गांव की स्थानीय आबादी में करीब 200 लोग अभी भी लापता हैं। करीब 80 प्रतिशत लोग गायब हैं और हममें से सिर्फ 20 प्रतिशत ही यहां पहुंच पाए हैं। जो लोग काठमांडू या अन्य जगहों पर रह रहे थे, वे सुरक्षित हैं। हजारों लोग मारे गए हैं या लापता हैं। इस समय हालात बेहद खराब हैं।” आपदा की भयावहता बताते हुए उन्होंने कहा कि लोग रोजमर्रा के काम में व्यस्त थे, तभी अचानक बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया। उन्होंने बताया, “लोग अपना सामान्य काम कर रहे थे। बाढ़ इतनी भयानक थी कि पूरा गांव महज दो मिनट के भीतर बह गया। वहां से करीब आठ से दस लोगों को ही बचाया जा सका, बाकी सभी बह गए।”</p>
<p> </p>
<p>उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मदद की अपील करते हुए कहा, “हम शून्य पर पहुंच गए हैं। हमारा घर, रोजी-रोटी का साधन, सब कुछ खत्म हो गया।” नेपाल के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल त्रिशूली में एक स्थानीय निवासी ने बताया कि आपदा में उसका घर और दुकान पूरी तरह बर्बाद हो गए। उसने आईएएनएस से कहा, “मेरा घर यहीं था, लेकिन सब कुछ पूरी तरह तबाह हो गया। पानी पांचवीं मंजिल तक पहुंच गया और सब कुछ बर्बाद कर दिया। मेरी दुकान का सारा सामान पानी में बह गया।</p>
<p> </p>
<p>ऊपरी कमरों में भी पानी घुस गया था, हालांकि हम कुछ सामान बचाने में कामयाब रहे।” उन्होंने बताया कि राहत सामग्री प्रभावित क्षेत्र में पहुंच चुकी है और लोगों तक बांटी जा रही है। वहीं, इंटरनेट और संचार सेवाएं बाधित होने से आपदा प्रभावित इलाकों का नेपाल के बाकी हिस्सों और दुनिया के दूसरे हिस्सों में रह रहे उनके परिवारों से संपर्क टूट गया है। त्रिशूली में इंटरनेट सेवाएं बहाल करने में जुटे नेपाल टेलीकॉम के एक तकनीशियन ने बताया कि आपदा में संचार ढांचा पूरी तरह तबाह हो गया है।</p>
<p> </p>
<p>उन्होंने कहा, “सब कुछ पूरी तरह नष्ट हो गया है। इसलिए हम इंटरनेट कनेक्शन बहाल करने के लिए नेपाल टेलीकॉम से यहां आए हैं। हमें अभी कुल नुकसान की विस्तृत जानकारी नहीं है, क्योंकि हम हाल ही में यहां पहुंचे हैं।” तकनीशियन के मुताबिक, करीब 6 से 7 लाख रुपये मूल्य के उपकरण नष्ट हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि त्रिशूली इलाके में इंटरनेट सेवा आज या कल तक बहाल होने की उम्मीद है। हालांकि, इससे आगे के इलाकों में सेवाएं बहाल करने में कम से कम तीन दिन या उससे अधिक समय लग सकता है और फिलहाल इसकी कोई निश्चित समयसीमा बताना संभव नहीं है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                    

                <link>https://royalbulletin.in/international/nepal-flood-disaster-survivors-story/article-224253</link>
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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 22:32:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अर्चना सिंह | Online News Editor]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप ने वाणिज्य मंत्री लुटनिक का किया बचाव, बोले- 'ईरान पर अमेरिकी हमलों में 18 की मौत'</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अपने वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के उस बयान को स्पष्ट किया जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान में कोई अमेरिकी नहीं मारा गया है। लुटनिक ने भी एक्स प्लेटफॉर्म पर अपनी सफाई दी। ट्रंप ने ईरान में हालिया अमेरिकी हमलों में 18 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर यह जानकारी देते हुए अपने ही वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के बयान को स्पष्ट किया।</p>
<p>  </p>
<p>दरअसल, लुटनिक ने एक इंटरव्यू में कहा था कि ईरान युद्ध में किसी अमेरिकी की मौत नहीं हुई है। ट्रंप</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/international/trump-defended-commerce-minister-lutnik-and-said-18-died/article-224240"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/20260616321f.jpg" alt=""></a><br /><p> वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अपने वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के उस बयान को स्पष्ट किया जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान में कोई अमेरिकी नहीं मारा गया है। लुटनिक ने भी एक्स प्लेटफॉर्म पर अपनी सफाई दी। ट्रंप ने ईरान में हालिया अमेरिकी हमलों में 18 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर यह जानकारी देते हुए अपने ही वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के बयान को स्पष्ट किया।</p>
<p> </p>
<p>दरअसल, लुटनिक ने एक इंटरव्यू में कहा था कि ईरान युद्ध में किसी अमेरिकी की मौत नहीं हुई है। ट्रंप ने उनके बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि लुटनिक के दिमाग में वेनेजुएला था, जब उन्होंने कहा कि कोई नहीं मारा गया। ट्रंप ने इसके बाद स्पष्ट किया, “ईरान में 18 लोग मारे गए!” अमेरिकी मीडिया के अनुसार, लुटनिक का बयान ईरान में जारी युद्ध के संदर्भ में था, जबकि ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अमेरिकी सैनिकों की मौत की संख्या की पुष्टि की। वहीं, लुटनिक ने भी एक्स पोस्ट में कहा कि जी20 एआई मीट में उनसे गलती हो गई थी क्योंकि उनके दिमाग में वेनेजुएला चल रहा था।</p>
<p> </p>
<p>यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच कई महीनों से जारी संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। हालिया अमेरिकी हमलों में ईरान के सैन्य ठिकानों, रडार और मिसाइल रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हालिया अमेरिकी हमलों में 18 ईरानी नागरिकों की मौत और 108 लोग घायल* हुए हैं। ईरानी रेड क्रिसेंट ने यह भी बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक शादी समारोह को निशाना बनाए जाने की घटना में चार लोगों की मौत हुई और 67 घायल हुए। इस बीच, ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>खाड़ी की ख़बरें </category>
                                    

                <link>https://royalbulletin.in/international/trump-defended-commerce-minister-lutnik-and-said-18-died/article-224240</link>
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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 21:53:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अर्चना सिंह | Online News Editor]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेपाल त्रासदी : अब तक 1252 शव बरामद, 95 की हो पाई शिनाख्त, चितवन में सबसे ज्यादा मौतें</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  काठमांडू। नेपाल में अचानक आई व‍िनाशकारी बाढ़ के बाद मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। गुरुवार दोपहर तक 'नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी' (एनडीआरआरएमए) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, मरने वाले वालों की संख्‍या 1252 पहुंच गई है जबकि 4,216 लोग अब भी लापता हैं। काठमांडू पोस्‍ट की र‍िपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्‍यादा मौतें चितवन में दर्ज की गई हैं, जहां 355 शव मिले। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 218, नवलपरासी वेस्ट में 208 और नुवाकोट में 177 मौतें हुई हैं।</p>
<p>  </p>
<p>रसुवा, जहां से यह आपदा शुरू हुई थी, वहां 127 मौतें दर्ज की गई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/international/nepal-flood-tragedy-death-toll-1252/article-224045"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/202609014841.jpg" alt=""></a><br /><p> काठमांडू। नेपाल में अचानक आई व‍िनाशकारी बाढ़ के बाद मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। गुरुवार दोपहर तक 'नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी' (एनडीआरआरएमए) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, मरने वाले वालों की संख्‍या 1252 पहुंच गई है जबकि 4,216 लोग अब भी लापता हैं। काठमांडू पोस्‍ट की र‍िपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्‍यादा मौतें चितवन में दर्ज की गई हैं, जहां 355 शव मिले। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 218, नवलपरासी वेस्ट में 208 और नुवाकोट में 177 मौतें हुई हैं।</p>
<p> </p>
<p>रसुवा, जहां से यह आपदा शुरू हुई थी, वहां 127 मौतें दर्ज की गई हैं। इसके अलावा गोरखा, धाडिंग और तनाहुन जिलों में भी शव बरामद किए गए हैं। इनमें से केवल 95 लोगों की पहचान हो पाई है। पहचान के बाद शवों को उनके परिजनों को सौंप द‍िया गया। काठमांडू पोस्‍ट की र‍िपोर्ट के अनुसार, प्रशासन की ओर से राहत और बचाव अभ‍ियान जारी है। हजारों लोग अभी भी लापता हैं, उनकी तलाश की जा रही है। इनमें व‍िदेशी नागर‍िकों के साथ-साथ पनबिजली परियोजनाओं के कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी और सरकारी कर्मचारी भी शाम‍िल हैं।</p>
<p> </p>
<p>काठमांडू पोस्‍ट की र‍िपोर्ट के अनुसार, अध‍िकार‍ियों ने बताया क‍ि लापता लोगों में स‍िर्फ पनबिजली परियोजनाओं के लगभग 900 कर्मचारी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे प्रभावित इलाकों से और जानकारी मिलेगी तथा रिपोर्टों का सत्यापन होगा, लापता लोगों की संख्या में बदलाव हो सकता है। अधिकारियों ने बताया क‍ि अब तक 11,913 लोगों को सुरक्षित क‍िया जा चुका है।</p>
<p> </p>
<p>खोज, बचाव और राहत कार्यों के लिए 21,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। करीब 3,950 विस्थापित लोग फिलहाल नुवाकोट, धाडिंग, रसुवा और काठमांडू में बने अस्थायी राहत शिविरों में रह रहे हैं। काठमांडू पोस्‍ट की र‍िपोर्ट के अनुसार, क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों के कारण कई गांवों का संपर्क टूट गया है। ऐसे इलाकों में सड़क और हेलीकॉप्टर के जरिए राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। संचार सेवाओं को भी धीरे-धीरे बहाल किया जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                    

                <link>https://royalbulletin.in/international/nepal-flood-tragedy-death-toll-1252/article-224045</link>
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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 16:48:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अर्चना सिंह | Online News Editor]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भू-राजनीतिक तनाव के बीच नीदरलैंड ने बदली सोने की 'तिजोरी': 86 टन गोल्ड अमेरिका-कनाडा से लंदन ट्रांसफर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  एम्स्टर्डम। दुनिया में बढ़ते संघर्ष, राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच नीदरलैंड ने अपने 'सोने की तिजोरी' का पता बदल दिया है। देश ने स्वर्ण भंडार की सुरक्षा और उपलब्धता को लेकर बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने अमेरिका और कनाडा में रखा करीब 86 टन सोना ब्रिटेन स्थानांतरित कर दिया है। नीदरलैंड के केंद्रीय बैंक डी नेदरलैंड्सचे बैंक (डीएनबी) का कहना है कि यह निर्णय किसी एक देश पर भरोसा कम होने की वजह से नहीं, बल्कि संकट के समय सोने को ज्यादा आसानी से इस्तेमाल करने की जरूरत को ध्यान में रखकर लिया गया है।</p>
<p> </p>
<p>बैंक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/international/amidst-geopolitical-tension-netherlands-changed-its-gold-safe-and-transported/article-223961"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/202609033928445.jpg" alt=""></a><br /><p> एम्स्टर्डम। दुनिया में बढ़ते संघर्ष, राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच नीदरलैंड ने अपने 'सोने की तिजोरी' का पता बदल दिया है। देश ने स्वर्ण भंडार की सुरक्षा और उपलब्धता को लेकर बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने अमेरिका और कनाडा में रखा करीब 86 टन सोना ब्रिटेन स्थानांतरित कर दिया है। नीदरलैंड के केंद्रीय बैंक डी नेदरलैंड्सचे बैंक (डीएनबी) का कहना है कि यह निर्णय किसी एक देश पर भरोसा कम होने की वजह से नहीं, बल्कि संकट के समय सोने को ज्यादा आसानी से इस्तेमाल करने की जरूरत को ध्यान में रखकर लिया गया है।</p>
<p> </p>
<p>बैंक का मानना है कि लंदन में रखा सोना जरूरत पड़ने पर न्यूयॉर्क या ओटावा की तुलना में अधिक तेजी से खरीदा-बेचा या वित्तीय लेनदेन में इस्तेमाल किया जा सकता है। डीएनबी के प्रमुख ओलाफ स्लेइपेन ने कहा कि बैंक को उम्मीद है कि ऐसी स्थिति कभी नहीं आएगी, जब उसे संकट से निपटने के लिए अपने सोने का इस्तेमाल करना पड़े। लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए तैयारी और लचीलापन बनाए रखना जरूरी है। नीदरलैंड के पास कुल 612.4 टन सोने का भंडार है।</p>
<p> </p>
<p>इस नए फेरबदल के बाद लंदन में रखे उसके सोने की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत से बढ़कर 32 प्रतिशत से अधिक हो गई है। वहीं, अमेरिका और कनाडा में रखे भंडार का हिस्सा कम हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि पूरा 86 टन सोना विमान या जहाजों के जरिए सीधे अमेरिका और कनाडा से लंदन नहीं पहुंचाया गया। बैंक ने मार्च से अगस्त के बीच एक जटिल प्रक्रिया अपनाई। कुछ सोना भौतिक रूप से स्थानांतरित किया गया, जबकि कुछ मामलों में न्यूयॉर्क में सोना बेचकर लंदन में उसके बराबर मात्रा खरीद ली गई।</p>
<p> </p>
<p>इससे भारी मात्रा में सोने को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का जोखिम भी कम हुआ। लंदन को दुनिया के सबसे बड़े और सबसे सक्रिय स्वर्ण बाजारों में गिना जाता है। यही वजह है कि संकट की स्थिति में वहां रखा सोना जल्दी नकदी में बदला जा सकता है या वित्तीय जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि डीएनबी ने साफ तौर पर यह नहीं कहा कि अमेरिका में राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उसने अपना सोना वहां से हटाया है, लेकिन यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में केंद्रीय बैंक अपने विदेशी भंडार और उनकी सुरक्षा पर नए सिरे से विचार कर रहे हैं।</p>
<p> </p>
<p>युद्ध, व्यापारिक तनाव, प्रतिबंधों के बढ़ते इस्तेमाल और वैश्विक अर्थव्यवस्था की अनिश्चितता ने सोने को एक बार फिर केंद्रीय बैंकों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षित संपत्ति बना दिया है। सोने की बढ़ती कीमतें भी इस बदलते माहौल की तस्वीर पेश करती हैं। निवेशक और केंद्रीय बैंक दोनों ही अनिश्चित समय में सोने को अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प के तौर पर देख रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 14:13:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अर्चना सिंह | Online News Editor]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीयों के लिए बंद हो सकता है US EB-1 ग्रीन कार्ड, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने दी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वॉशिंगटन। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि भारतीयों के लिए रोजगार आधारित प्रथम श्रेणी (ईबी-1) ग्रीन कार्ड की उपलब्धता आने वाले कुछ हफ्तों में खत्म हो सकती है। इसकी वजह इस श्रेणी में बहुत अधिक आवेदन और बढ़ती मांग बताई गई है। इस कारण पहले से ही लंबे इंतजार का सामना कर रहे भारतीय आवेदकों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।</p>
<p>  </p>
<p>अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने सितंबर वीजा बुलेटिन में कहा कि भारत से जुड़े ईबी-1 आवेदनों की संख्या इतनी अधिक है कि वित्तीय वर्ष 30 सितंबर को खत्म होने से पहले इस श्रेणी के लिए निर्धारित वीजा संख्या पूरी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/international/eb-1-green-cards-may-soon-be-closed-for-indians-america/article-223887"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/202609033928201.jpeg" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि भारतीयों के लिए रोजगार आधारित प्रथम श्रेणी (ईबी-1) ग्रीन कार्ड की उपलब्धता आने वाले कुछ हफ्तों में खत्म हो सकती है। इसकी वजह इस श्रेणी में बहुत अधिक आवेदन और बढ़ती मांग बताई गई है। इस कारण पहले से ही लंबे इंतजार का सामना कर रहे भारतीय आवेदकों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।</p>
<p> </p>
<p>अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने सितंबर वीजा बुलेटिन में कहा कि भारत से जुड़े ईबी-1 आवेदनों की संख्या इतनी अधिक है कि वित्तीय वर्ष 30 सितंबर को खत्म होने से पहले इस श्रेणी के लिए निर्धारित वीजा संख्या पूरी तरह इस्तेमाल हो सकती है। विदेश विभाग ने कहा, "ईबी-1 श्रेणी में भारत के लिए उपलब्ध वीजा संख्या वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले पूरी हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो आने वाले हफ्तों में इस श्रेणी को अस्थायी रूप से 'अनुपलब्ध' घोषित करना पड़ सकता है।"</p>
<p> </p>
<p>साथ ही विभाग ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर उचित बदलाव किए जाएंगे। ईबी-1 रोजगार आधारित पहली प्राथमिकता वाली कैटेगरी है, जिसमें असाधारण क्षमता वाले लोग, बेहतरीन प्रोफेसर और रिसर्चर, और कुछ मल्टीनेशनल एग्जीक्यूटिव और मैनेजर जैसे प्राथमिकता वाले वर्कर शामिल हैं। यह चेतावनी भारतीयों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की अन्य प्रमुख श्रेणियों में पहले से ही भारी बैकलॉग है।</p>
<p> </p>
<p>सितंबर के लिए ईबी-1 इंडिया की फाइनल एक्शन डेट 15 अक्टूबर 2022 निर्धारित की गई है। इसका मतलब है कि सामान्य तौर पर केवल उन्हीं भारतीय आवेदकों के मामलों पर अंतिम कार्रवाई हो सकती है जिनकी प्राथमिकता तिथि 15 अक्टूबर 2022 से पहले की है। ईबी-2 श्रेणी, जिसमें उच्च डिग्री वाले पेशेवर और विशेष योग्यता वाले लोग शामिल होते हैं।</p>
<p> </p>
<p>सितंबर वीजा बुलेटिन में 'यू' यानी 'अनुपलब्ध' दिखाई गई है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, 'यू' का अर्थ है कि इस अवधि में उस श्रेणी के लिए कोई वीजा जारी नहीं किया जा सकता। ईबी-2 इंडिया अगस्त में भी उपलब्ध नहीं था और सितंबर में भी उपलब्ध नहीं है। रोजगार आधारित तीसरी प्राथमिकता वाली कैटेगरी में भी बैकलॉग बहुत ज्‍यादा है। सितंबर के लिए ईबी-3 इंडिया की 'फाइनल एक्शन डेट' 1 जनवरी, 2014 है, जिसका मतलब है कि कतार 12 साल से भी ज्‍यादा पुरानी है।</p>
<p> </p>
<p>तुलना के लिए ईबी-3 कैटेगरी में ज्‍यादातर देशों (जिनका नाम बुलेटिन में अलग से नहीं है) के लिए तारीख 1 सितंबर, 2024 है। मुख्य तौर पर चीन के लिए एक जनवरी, 2022 और फिलीपींस के लिए एक अगस्त 2023 है। भारत के लिए ईबी-5 इन्वेस्टर कैटेगरी (जो किसी खास ग्रुप के लिए आरक्षित नहीं है) भी सितंबर में 'फाइनल एक्शन' के लिए उपलब्ध नहीं है, हालांकि ग्रामीण प्रोजेक्ट्स, ज्‍यादा बेरोजगारी वाले इलाकों और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आरक्षित ईबी-5 कैटेगरी सभी देशों के लिए 'करंट' (यानी खुली हुई) बनी हुई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 11:38:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अर्चना सिंह | Online News Editor]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आईआरजीसी का दावा: अमेरिकी हमले के जवाब में कुवैत, जॉर्डन और इराक में सैन्‍य ठिकानों को बनाया निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[<p>तेहरान। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बुधवार को दावा किया कि उसने कुवैत में स्थित अमेरिकी 'अली अल-सलेम' एयर बेस, जॉर्डन में अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के एक सैन्य शिविर और इराक में एक अमेरिकी निगरानी प्रणाली को निशाना बनाकर हमले किए हैं। </p>
<p>  </p>
<p>स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आईआरजीसी ने एक बयान में कहा कि उसने कुवैत के अली अल-सलेम बेस में अमेरिकी कमांडर के आवासीय क्षेत्र और कमांड पोस्ट को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी के मुताबिक, आईआरजीसी ने कहा कि यह कार्रवाई उसके अली अल-सलेम बेस के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/international/irgc-missile-strike-us-bases/article-223538"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/202609023927283.jpg" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बुधवार को दावा किया कि उसने कुवैत में स्थित अमेरिकी 'अली अल-सलेम' एयर बेस, जॉर्डन में अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के एक सैन्य शिविर और इराक में एक अमेरिकी निगरानी प्रणाली को निशाना बनाकर हमले किए हैं। </p>
<p> </p>
<p>स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आईआरजीसी ने एक बयान में कहा कि उसने कुवैत के अली अल-सलेम बेस में अमेरिकी कमांडर के आवासीय क्षेत्र और कमांड पोस्ट को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी के मुताबिक, आईआरजीसी ने कहा कि यह कार्रवाई उसके अली अल-सलेम बेस के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा थी और इससे यह साबित होता है कि उसके पास क्षेत्र में अमेरिकी गतिविधियों से जुड़ी व्यापक खुफिया जानकारी मौजूद है।</p>
<p> </p>
<p>ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, आईआरजीसी ने कहा कि उसने जॉर्डन में अकाबा की खाड़ी के पास स्थित अमेरिकी मरीन बेस कैंप टिटियन पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। आईआरजीसी का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान के सिरिक क्षेत्र में एक शादी समारोह पर हुए कथित अमेरिकी हमले के जवाब में की गई।</p>
<p>बयान के अनुसार, इस हमले में कई सैन्य सुविधाएं और हेलीकॉप्टर नष्ट हो गए तथा अमेरिकी बलों को भारी नुकसान हुआ।</p>
<p> </p>
<p>आईआरजीसी ने दावा किया कि उसने इराक के एरबिल में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मौजूद सर्विलांस बैलून नियंत्रण प्रणाली को नष्ट कर दिया। आईआरएनए के मुताबिक, आईआरजीसी की जमीनी सेना ने एरबिल स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमला कर एक रखरखाव केंद्र और तकनीकी उपकरणों के गोदामों को भी नष्ट कर दिया। संगठन ने दावा किया कि इस कार्रवाई में कई अमेरिकी कर्मी मारे गए और ईंधन भंडारण सुविधाओं में आग लग गई।</p>
<p> </p>
<p>इस बीच, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने बुधवार को कहा कि सिरिक में एक घर पर हुए अमेरिकी हमले में, जहां शादी समारोह चल रहा था, 50 से अधिक लोग मारे गए या घायल हुए। उन्होंने 'एक्‍स' पर लिखा, "ईरान के खिलाफ अमेरिका के अत्याचारों की सूची अब पूरी हो गई है। सिरिक के कुहेस्तक इलाके में एक घर पर उस समय हमला किया गया जब परिवार शादी का जश्न मना रहे थे। 50 से अधिक निर्दोष पुरुष, महिलाएं और बच्चे मारे गए या घायल हुए हैं।"</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>खाड़ी की ख़बरें </category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 15:13:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अर्चना सिंह | Online News Editor]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेपाल बाढ़ और भूस्खलन का कहर: मृतकों की संख्या 1100 के पार, राहत और बचाव कार्य जारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>काठमांडू। नेपाल फ्लैश फ्लड में मरने वालों की संख्या ग्यारह सौ के पार पहुंच गई है। बुधवार को नेपाल प्रशासन ने ताजा आंकड़े साझा करते हुए बताया कि सर्च (खोज), रेस्क्यू (बचाव) और रिलीफ (बचाव) ऑपरेशन जारी है। नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) ने बताया कि पिछले हफ्ते आई भयानक बाढ़ में बहे 1,114 शव बुधवार सुबह 9 बजे तक बरामद कर लिए गए थे।</p>
<p>  </p>
<p>सबसे ज्यादा शव दक्षिणी चितवन जिले से बरामद किए गए (348), इसके बाद नवलपरासी ईस्ट (217), नवलपरासी वेस्ट (190), नुवाकोट (155), गोरखा (66), धाडिंग (59), रसुवा (41) और तनहुं (38)</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/international/%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%96%E0%A4%B2%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%B0--%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-1100-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0--%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%A4-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80/article-223455"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/20260901484.jpg" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। नेपाल फ्लैश फ्लड में मरने वालों की संख्या ग्यारह सौ के पार पहुंच गई है। बुधवार को नेपाल प्रशासन ने ताजा आंकड़े साझा करते हुए बताया कि सर्च (खोज), रेस्क्यू (बचाव) और रिलीफ (बचाव) ऑपरेशन जारी है। नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) ने बताया कि पिछले हफ्ते आई भयानक बाढ़ में बहे 1,114 शव बुधवार सुबह 9 बजे तक बरामद कर लिए गए थे।</p>
<p> </p>
<p>सबसे ज्यादा शव दक्षिणी चितवन जिले से बरामद किए गए (348), इसके बाद नवलपरासी ईस्ट (217), नवलपरासी वेस्ट (190), नुवाकोट (155), गोरखा (66), धाडिंग (59), रसुवा (41) और तनहुं (38) का नंबर आता है। इन आंकड़ों में अलग-अलग जगहों से बरामद शरीर के अंग भी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि अब तक 95 शवों की पहचान कर ली गई है और उन्हें उनके रिश्तेदारों को सौंप दिया गया है। एनडीआरआरएमए के अनुसार, 3,916 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।</p>
<p> </p>
<p>इनमें सरकारी कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी, चुने हुए प्रतिनिधि, विदेशी नागरिक, विदेशी पर्यटकों के साथ आए नेपाली लोग, स्थानीय निवासी और पनबिजली परियोजनाओं में काम करने वाले मजदूर शामिल हैं। हालांकि, एनडीआरआरएमए और नेपाल पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों में अंतर है। नेपाल पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 4,858 लोग (जिनमें 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं) लापता हैं।</p>
<p> </p>
<p>ये आंकड़े बुधवार सुबह 8 बजे तक इकट्ठा की गई जानकारी के आधार पर साझा किए गए। इस बीच, बाढ़ पीड़ित 11 पनबिजली परियोजनाओं से लापता बताए गए कई लोगों का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, नेपाल (आईपीपीएएन) के अनुसार, रसुवा और नुवाकोट में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी कॉरिडोर के किनारे 11 पनबिजली परियोजनाओं से जुड़े 983 लोगों की स्थिति का अभी तक पता नहीं चल पाया है। नेपाली सेना के जवान, भारतीय और चीनी टनल बचाव टीमों के साथ मिलकर, कई पनबिजली परियोजनाओं में सुरंगों के अंदर गहराई तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि लापता लोगों का पता चल सकता है या नहीं।</p>
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<p>पावर डेवलपर्स की प्राइवेट सेक्टर की प्रतिनिधि संस्था ने मंगलवार शाम को बताया कि कई प्रोजेक्ट्स पर बचाव कार्य जारी हैं। इनमें अपर त्रिशूली 3ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (60 एमडब्ल्यू), चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (22 एमडब्ल्यू), लांगटांग खोला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (20 एमडब्ल्यू), त्रिशूली 3बी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (37 एमडब्ल्यू) और अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (216 एमडब्ल्यू) शामिल हैं। आईपीपीएएन के अनुसार, जब बाढ़ आई, तो अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर 1,433 लोग काम कर रहे थे।</p>
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<p>इनमें से 876 लोगों को या तो बचा लिया गया है या उनसे संपर्क हो गया है। आईपीपीएएन के मुताबिक, जिन लोगों का अभी तक कोई पता नहीं चला है, उनमें प्रोजेक्ट कंपनी के 15 कर्मचारी, ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) कॉन्ट्रैक्टर डूसान के 78 कर्मचारी, एंड्रिट्ज हाइड्रो के 94 कर्मचारी, कंसल्टेंट (लाहमेयर इंटरनेशनल जीएमबीएच और जेड कंसल्ट प्राइवेट लिमिटेड के जॉइंट वेंचर) के सात और सिविल सब-कॉन्ट्रैक्टर पावरचाइना के 385 वर्कर शामिल हैं। मंगलवार तक रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (111 एमडब्ल्यू) से लापता बताए गए 91 लोगों का कोई पता नहीं चल सका था। नेपाली सेना की अगुवाई वाली एक टीम ने सोमवार को मौके का मुआयना किया और यह रिपोर्ट देने के बाद लौटी कि उन्हें पावरहाउस टनल के अंदर कोई नहीं मिला।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 12:13:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अर्चना सिंह | Online News Editor]]></dc:creator>
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                <title>होर्मुज की जंग में बारूद की बारिश! ईरान ने जॉर्डन-कुवैत-बहरीन को बनाया निशाना, अमेरिका की और बड़े हमले की खुली धमकी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>तेहरान/वाशिंगटन/ अम्मान/कुवैत सिटी/मनामा। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर छिड़ युद्ध में ईरान ने अमेरिकी हमले के जवाब में जॉर्डन, कुवैत और बहरीन को निशाना बनाया है। अमेरिका ने धमकी दी है कि ईरान पर और ज्यादा आक्रामक हमला किया जाएगा। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) का दावा है कि उसने जवाबी कार्रवाई के अंतर्गत जॉर्डन में प्रिंस हसन एयरबेस और अमेरिकी मरीन बेस पर बैलिस्टिक मिसाइल हमला किया है।<br /><br />अल जजीरा, अरब न्यूज, गल्फ न्यूज और सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन और तेहरान के बीच फिर से हमले शुरू होने के बाद अपने पहले संदेश में सर्वोच्च नेता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/headlines/gunpowder-rained-in-the-battle-of-hormuz-iran-targeted-jordan-kuwait-bahrain/article-223412"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/96752f4845c34192b5f028be19cc8e62_498424551.jpg" alt=""></a><br /><p>तेहरान/वाशिंगटन/ अम्मान/कुवैत सिटी/मनामा। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर छिड़ युद्ध में ईरान ने अमेरिकी हमले के जवाब में जॉर्डन, कुवैत और बहरीन को निशाना बनाया है। अमेरिका ने धमकी दी है कि ईरान पर और ज्यादा आक्रामक हमला किया जाएगा। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) का दावा है कि उसने जवाबी कार्रवाई के अंतर्गत जॉर्डन में प्रिंस हसन एयरबेस और अमेरिकी मरीन बेस पर बैलिस्टिक मिसाइल हमला किया है।<br /><br />अल जजीरा, अरब न्यूज, गल्फ न्यूज और सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन और तेहरान के बीच फिर से हमले शुरू होने के बाद अपने पहले संदेश में सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि इस बार ईरान की सेना अमेरिका को ऐसा दर्द देगी, जो वह कभी हीं भूल पाएगा।<br /><br />कुवैत का कहना है कि वायु रक्षा प्रणाली ड्रोन हमलों का सक्रिय रूप से जवाब दे रही है। बहरीन ने कहा कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान से आ रहे ड्रोनों को सफलतापूर्वक रोककर नष्ट कर दिया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा कि उसकी सेनाओं ने पहली सितंबर को ईरानी ठिकानों पर कई हमले किए। यह कार्रवाई कमर्शियल जहाजों और अमेरिकी सैनिकों पर हमले की कोशिशों के जवाब में की गई ।<br /><br />इस बीच ईरान के सरकारी मीडिया ने दक्षिणी इलाकों में धमाकों की रिपोर्ट प्रसारित की है। रिपोर्ट के अनुसार, असलुयेह, जिरोफ्ट, बंदर अब्बास, केशम द्वीप, कोनारक, चाबहार, जास्क, सिरिक और लावन में जोरदार धमाके हुए हैं। ईरान के रेड क्रिसेंट ने बताया कि सिरिक काउंटी के कुहेस्ताक शहर में शादी के घर पर हुए हमले में एक बच्चे समेत कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और 50 से ज्यादा नागरिक घायल हो गए। रेड क्रिसेंट ने एक्स पर यह जानकारी दी। ईरानी सरकार ने कहा कि अमेरिकी हमले के बाद शादी का घर जमींदोज हो गया। सिरिक काउंटी होर्मुज जलडमरूमध्य के किनारे बसा है।<br /><br />ईरानी मीडिया ने मंगलवार कोहोर्मुज जलडमरूमध्य के साथ और उसके पूरब में कई शहरों के साथ-साथ दक्षिणी केरमान प्रांत के एक एयरपोर्ट पर धमाकों की रिपोर्ट दी। ईरान 28 फरवरी से अमेरिका के साथ जंग में है। इसी तारीख को अमेरिका-इजराइल के एकीकृत सैन्य हमले में इस्लामिक रिपब्लिक के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मारे गए थे। इसके बाद ईरान ने मध्य पूर्व के अमेरिकी मददगार देशों पर हमला किया था। कुछ दिनों की खामोशी के बाद अमेरिका ने रविवार को ईरान पर जोरदार हमला किया।राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किसी भी जवाबी हमले का बहुत कड़ा जवाब देने की धमकी दी है।<br /><br />ईरान ने ट्रंप की धमकी को धता बताते हुए जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाया। आईआरजीसी के प्रवक्ता हुसैन मोहेबी ने एक्स पर चेतावनी दी कि वाशिंगटन को कड़ी सजा दी जाएगी। ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने बाद में कहा कि ईरान की सेना ने अमेरिकी ठिकानों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू कर दिया है। महत्वपूर्ण यह है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला है। अमेरिका की ईरानी पोर्ट्स पर जवाबी नाकाबंदी जारी है।<br /><br />पिछले 48 घंटों में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास कमर्शियल टैंकरों पर दो हमलों की खबर मिली है। इसके बाद जहाज 'जजीरत उम्म अल घनम' के उत्तर-पश्चिम में लगभग एक नॉटिकल मील की दूरी पर लंगर डालकर रुक गया। दूसरी घटना, यूकेएमटीओ 124-26 (टैंकर) से जुड़ी है। इस टैंकर पर ओमान के खसाब से लगभग 17 नॉटिकल मील पूर्व में जलडमरूमध्य से बाहर निकलते समय तीन अज्ञात प्रोजेक्टाइल (हथियार/गोले) से हमला हुआ। टैंकरों पर ये हमले ऐसे समय में हुए हैं जब अमेरिका-ईरान संघर्ष संभावित रूप से अधिक खतरनाक समुद्री चरण में प्रवेश कर चुका है। ईरानी खतरों के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरानी रडार और एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य सैन्य बुनियादी ढांचे पर ताजा हमले किए हैं।<br /><br />सना में हूती नियंत्रित विदेश मंत्रालय ने ईरान पर अमेरिकी हमलों को लेकर तेहरान के साथ एकजुटता का बयान जारी किया है। हूती नियंत्रित सबा समाचार एजेंसी के एक बयान में मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी हमलों से ईरान का संकल्प कमजोर नहीं होगा और तेहरान की प्रतिक्रिया अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एक वैध अधिकार है। मंत्रालय ने अमेरिका पर क्षेत्र को तनाव की ओर धकेलने का आरोप लगाया और कहा कि इसके नतीजों के लिए वाशिंगटन और उसका समर्थन करने वाले जिम्मेदार हैं। उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।<br /><br />जॉर्डन ने कहा कि देश के कई हिस्सों पर ईरानी मिसाइलों से हमला किया गया। जॉर्डन की सेना ने बुधवार सुबह कहा कि उसे "ईरानी क्षेत्र से आए मिसाइल हमले का सामना करना पड़ा। अरब देश की सेना ने बताया कि उसने 13 बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाया, जिनमें से 10 को रोक दिया गया और तीन दूरदराज के इलाकों में गिरीं। हालांकि ईरान के सरकारी मीडिया ने दावा किया कि जॉर्डन पर हुए हमले में अमेरिकी सैनिक मारे गए, लेकिन एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यह सच नहीं है।</p>
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<h3> </h3>
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                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>मुख्य समाचार</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 09:40:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[रविता ढांगे | Online News Editor ]]></dc:creator>
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