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                <title>बिज़नेस - रॉयल बुलेटिन</title>
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                <description>बिज़नेस RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 11.475 बिलियन डॉलर बढ़कर ऑल-टाइम हाई 740.803 बिलियन डॉलर पर पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  नई दिल्ली। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 28 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में 11.475 बिलियन डॉलर बढ़कर अब तक के सबसे उच्चतम स्तर (ऑल-टाइम हाई) 740.803 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है। यह जानकारी शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी किए गए डेटा में दी गई। इससे पहले विदेशी मुद्रा भंडार का ऑल-टाइम हाई 729.328 बिलियन डॉलर था, जो कि 21 अगस्त को समाप्त हुए हफ्ते में दर्ज किया गया था।</p>
<p>  </p>
<p>आरबीआई के डेटा के मुताबिक, 28 अगस्त को समाप्त हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) की वैल्यू 9.337</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/business/market-movements/india-forex-reserve-all-time-high/article-224625"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/202609043930202.jpg" alt=""></a><br /><p> नई दिल्ली। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 28 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में 11.475 बिलियन डॉलर बढ़कर अब तक के सबसे उच्चतम स्तर (ऑल-टाइम हाई) 740.803 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है। यह जानकारी शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी किए गए डेटा में दी गई। इससे पहले विदेशी मुद्रा भंडार का ऑल-टाइम हाई 729.328 बिलियन डॉलर था, जो कि 21 अगस्त को समाप्त हुए हफ्ते में दर्ज किया गया था।</p>
<p> </p>
<p>आरबीआई के डेटा के मुताबिक, 28 अगस्त को समाप्त हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) की वैल्यू 9.337 बिलियन डॉलर बढ़कर 600.670 बिलियन डॉलर हो गई है। एफसीए में डॉलर के साथ दुनिया की कई अहम वैश्विक मुद्राएं जैसे येन, यूरो और पाउंड होती हैं, जिनकी वैल्यू को डॉलर में दिखाया जाता है। इस दौरान, विदेशी मुद्रा भंडार के दूसरे सबसे बड़े घटक गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 2.191 बिलियन डॉलर बढ़कर 116.409 बिलियन डॉलर हो गई है। आरबीआई के अनुसार, 28 अगस्त को समाप्त हुए हफ्ते में एसडीआर की वैल्यू 43 मिलियन डॉलर घटकर 18.810 बिलियन डॉलर रही है।</p>
<p> </p>
<p>वहीं, भारत की आरबीआई में रिजर्व पॉजिशन 11 मिलियन डॉलर घटकर 4.914 बिलियन डॉलर पर पहुंच गई है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने की वजह डॉलर आकर्षित करने की लिए आरबीआई की ओर से शुरू की गई स्कीमों को माना जा रहा है, जिसके तहत देश में करीब 136 बिलियन डॉलर से अधिक का फंड आया है। किसी भी देश के लिए उसका विदेशी मुद्रा भंडार काफी महत्वपूर्ण होता है, और इससे उस देश की आर्थिक स्थिति का पता लगता है।</p>
<p> </p>
<p>इससे अलावा, यह मुद्रा की विनिमय दर को स्थिर रखने में बड़ी भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए अगर किसी स्थिति में डॉलर के मुकाबले रुपए पर अधिक दबाव देखने को मिलता है और उसकी वैल्यू कम होती है तो केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर डॉलर के मुकाबले रुपए को गिरने से रोक सकता है और विनिमय दर को स्थिर रखता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिज़नेस</category>
                                            <category>बाजार की हलचल </category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 20:35:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अर्चना सिंह | Online News Editor]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय शेयर बाजार लगातार चार सत्रों की गिरावट के बाद बढ़त के साथ बंद; सेंसेक्स 76,500 के पार </title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई। भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को लगातार चार सत्रों की गिरावट के बाद बढ़त के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 362.57 अंक या 0.48 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,515.43 और निफ्टी 24.25 अंक या 0.10 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,897.70 पर बंद हुआ। दिन के दौरान बाजार में तेजी का नेतृत्व मेटल और कमोडिटीज ने किया।</p>
<p>  </p>
<p>सूचकांकों में निफ्टी मेटल (1.07 प्रतिशत) और निफ्टी कमोडिटीज (0.55 प्रतिशत) की तेजी के साथ टॉप गेनर्स थे। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (0.49 प्रतिशत), निफ्टी इंडिया डिफेंस (0.39 प्रतिशत), निफ्टी मीडिया (0.30 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (0.28 प्रतिशत), निफ्टी ऑयल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/business/stock-market/indian-stock-market-closed-with-gains-after-four-consecutive-sessions/article-224500"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2025-12/sensex_ed-12.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को लगातार चार सत्रों की गिरावट के बाद बढ़त के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 362.57 अंक या 0.48 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,515.43 और निफ्टी 24.25 अंक या 0.10 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,897.70 पर बंद हुआ। दिन के दौरान बाजार में तेजी का नेतृत्व मेटल और कमोडिटीज ने किया।</p>
<p> </p>
<p>सूचकांकों में निफ्टी मेटल (1.07 प्रतिशत) और निफ्टी कमोडिटीज (0.55 प्रतिशत) की तेजी के साथ टॉप गेनर्स थे। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (0.49 प्रतिशत), निफ्टी इंडिया डिफेंस (0.39 प्रतिशत), निफ्टी मीडिया (0.30 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (0.28 प्रतिशत), निफ्टी ऑयल एंड गैस (0.21 प्रतिशत) और निफ्टी पीएसई (0.04 ) प्रतिशत की मजबूती के साथ हरे निशान में बंद हुए। दूसरी तरफ निफ्टी रियल्टी (0.90 प्रतिशत), निफ्टी हेल्थकेयर (0.87 प्रतिशत), निफ्टी फार्मा (0.68 प्रतिशत), निफ्टी आईटी (0.47 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (0.45 प्रतिशत), निफ्टी पीएसयू बैंक (0.44 प्रतिशत) और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (0.43 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ बंद हुआ। मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हुआ।</p>
<p> </p>
<p>निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 156.15 अंक या 0.25 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 63,079.05 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 44.70 अंक या 0.22 प्रतिशत की तेजी के साथ 20,095.45 पर था। जानकारों ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका कम होने से भारतीय शेयर बाजार में तेजी देखी गई। हालांकि, ऊंचे स्तरों पर मुनाफा वसूली और मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेजी सीमित रही।</p>
<p> </p>
<p>निवेशकों की नजर आज आने वाले अमेरिकी रोजगार के आंकड़ों पर है, जबकि ब्याज दरों के भविष्य का अंदाजा लगाने के लिए अगले हफ्ते आने वाले अमेरिकी खुदरा महंगाई के आंकड़े अहम होंगे। अगस्त में कोर महंगाई दर में मामूली गिरावट की आम उम्मीदों से फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने का सिलसिला रुकने की संभावना मजबूत हो सकती है और इससे बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव को काबू में रखने में मदद मिल सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिज़नेस</category>
                                            <category>शेयर बाजार </category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 17:40:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अर्चना सिंह | Online News Editor]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मजबूत वैश्विक संकेतों से भारतीय शेयर बाजार में तेजी, डिफेंस और आईटी में खरीदारी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई। मजबूत वैश्विक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के सत्र में बढ़त के साथ खुला। सुबह 9:21 पर सेंसेक्स 466 अंक या 0.61 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 76,619 और निफ्टी 46 अंक या 0.20 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,916 पर था। शुरुआती कारोबार में बाजार में तेजी को बढ़ाने का काम डिफेंस और आईटी ने किया। सूचकांकों में निफ्टी इंडिया डिफेंस 0.89 प्रतिशत और निफ्टी आईटी 0.56 प्रतिशत की बढ़त के साथ टॉप गेनर्स थे।</p>
<p>  </p>
<p>इसके अलावा, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी पीएसई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/business/stock-market/indian-share-market-rally-today/article-224373"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/202609043929601.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। मजबूत वैश्विक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के सत्र में बढ़त के साथ खुला। सुबह 9:21 पर सेंसेक्स 466 अंक या 0.61 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 76,619 और निफ्टी 46 अंक या 0.20 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,916 पर था। शुरुआती कारोबार में बाजार में तेजी को बढ़ाने का काम डिफेंस और आईटी ने किया। सूचकांकों में निफ्टी इंडिया डिफेंस 0.89 प्रतिशत और निफ्टी आईटी 0.56 प्रतिशत की बढ़त के साथ टॉप गेनर्स थे।</p>
<p> </p>
<p>इसके अलावा, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी पीएसई भी हरे निशान में थे। दूसरी तरफ निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी एनर्जी और निफ्टी कमोडिटीज लाल निशान में थे। मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 63,237 अंक पर करीब सपाट कारोबार कर रहा था। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 83 अंक या 0.42 प्रतिशत की तेजी के साथ 20,134 पर था।</p>
<p> </p>
<p>सेंसेक्स पैक में बजाज फिनसर्व, इंडिगो, ट्रेंट, इन्फोसिस, टीसीएस, अदाणी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, बीईएल, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाइटन, एमएंडएम, आईटीसी, एसबीआई, एचसीएल टेक, एलएंडटी, पावर ग्रिड और टाटा स्टील गेनर्स थे। एक्सिस बैंक, इटरनल, भारती एयरटेल और एचयूएल लूजर्स थे। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी के साथ कारोबार हो रहा है।</p>
<p> </p>
<p>टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल हरे निशान में थे। अमेरिकी बाजार हरे निशान में बंद हुए थे। इस दौरान मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 1.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक 1.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। जानकारों ने कहा कि बाजार के लिए मौजूदा समय में घरेलू स्तर पर सकारात्मक और वैश्विक स्तर पर नकारात्मक फैक्टर्स बने हुए हैं। घरेलू स्तर शानदार 7.8 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ और निजी निवेश का बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है, लेकिन अमेरिका, यूरोप, यूके और जापान में बॉन्ड यील्ड का बढ़ना वैश्विक बाजारों के लिए एक अहम नकारात्मक कारक बना हुआ है, जिसे लेकर निवेशक सतर्क बने हुए है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>बिज़नेस</category>
                                            <category>शेयर बाजार </category>
                                    

                <link>https://royalbulletin.in/business/stock-market/indian-share-market-rally-today/article-224373</link>
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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 13:07:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अर्चना सिंह | Online News Editor]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एफएसएसएआई ने वाई-वाई नूडल्स बनाने वाली सीजी फूड इंडिया को वेज भुजिया नमकीन का उत्पादन रोकने का दिया आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  नई दिल्ली) भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने गुरुवार को कहा कि उसने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के बाद सीजी फूड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। एफएसएसएआई ने निरीक्षण के दौरान कथित तौर पर असुरक्षित प्रोसेसिंग, बिना लाइसेंस उत्पादन, पैकेजिंग पर पिछली तारीख डालने और स्वच्छता संबंधी कमियां पाए जाने के बाद सीजी फूड इंडिया को वेज भुजिया नमकीन का उत्पादन रोकने का निर्देश दिया है।</p>
<p>  </p>
<p>खाद्य नियामक ने मौके से 32,107.2 किलोग्राम स्टॉक जब्त किया, जिसमें खुले में रखे टूटे हुए नूडल्स भी शामिल थे। एफएसएसएआई ने एक बयान में कहा, “निर्माण</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/business/market-movements/fssai-orders-cg-food-india-maker-of-wai-wai-noodles-to/article-224218"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/202609033929192.jpg" alt=""></a><br /><p> नई दिल्ली) भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने गुरुवार को कहा कि उसने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के बाद सीजी फूड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। एफएसएसएआई ने निरीक्षण के दौरान कथित तौर पर असुरक्षित प्रोसेसिंग, बिना लाइसेंस उत्पादन, पैकेजिंग पर पिछली तारीख डालने और स्वच्छता संबंधी कमियां पाए जाने के बाद सीजी फूड इंडिया को वेज भुजिया नमकीन का उत्पादन रोकने का निर्देश दिया है।</p>
<p> </p>
<p>खाद्य नियामक ने मौके से 32,107.2 किलोग्राम स्टॉक जब्त किया, जिसमें खुले में रखे टूटे हुए नूडल्स भी शामिल थे। एफएसएसएआई ने एक बयान में कहा, “निर्माण और स्वच्छता संबंधी अनुपालन की जांच के लिए सीजी फूड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, रूपनगढ़, अजमेर (राजस्थान) में निरीक्षण किया गया। यूनिट में फर्श से एकत्र किए गए टूटे हुए नूडल्स को बिना हीट ट्रीटमेंट के दोबारा प्रोसेस करके भुजिया उत्पादों में इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके अलावा पैकेजिंग पर पिछली तारीखें भी डाली जा रही थीं।”</p>
<p> </p>
<p>निरीक्षण में “वाई-वाई मामा” और “वाई-वाई मामा पुंटे” भुजिया वेरिएंट का बिना लाइसेंस उत्पादन भी पाया गया, जो एफएसएस एक्ट, 2006 की धारा 31(1) का सीधा उल्लंघन है। एफएसएसएआई ने कहा कि निरीक्षण के दौरान स्वच्छता और दस्तावेजों से जुड़ी कई कमियां भी सामने आईं। इनमें पर्याप्त पेस्ट-कंट्रोल रिकॉर्ड का न होना तथा खाद्य स्वच्छता और सुरक्षा से संबंधित अन्य कमियां शामिल थीं। प्रयोगशाला जांच के लिए कई नियामकीय नमूने लिए गए। इनमें खुले नूडल्स की सामग्री, दोनों वेज भुजिया उत्पाद, फ्राइंग लाइन में इस्तेमाल किया गया कुकिंग ऑयल और “वाई-वाई रेडी टू ईट नूडल्स” शामिल हैं।</p>
<p> </p>
<p>इसके अलावा, समाप्त हो चुकी मियाद वाले तैयार उत्पादों के 1,925 बॉक्स भी हिरासत में लिए गए और कंपनी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। कंपनी को उचित मंजूरी और जरूरी उपायों के बिना “वेज भुजिया नमकीन उत्पादों का उत्पादन बंद करने” का निर्देश दिया गया है। नियामक ने कहा, “प्रयोगशाला जांच और निरीक्षण के निष्कर्षों के आधार पर खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के अनुसार आगे नियामकीय कार्रवाई की जाएगी।” इससे पहले दिन में एफएसएसएआई ने कर्नाटक के बेंगलुरु में ब्रिटिश लाइफसाइंसेज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भी सख्त प्रवर्तन कार्रवाई शुरू की थी।</p>
<p> </p>
<p>निरीक्षण में गलत लेबल वाले और एक्सपायर्ड शिशु खाद्य उत्पाद पाए गए थे। यह कार्रवाई शिशु खाद्य उत्पादों की सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई, खासकर उन उत्पादों के लिए जो शिशुओं और छोटे बच्चों के लिए बनाए जाते हैं। एफएसएसएआई ने कहा, “खाद्य सुरक्षा निरीक्षण के बाद बेंगलुरु स्थित ब्रिटिश लाइफसाइंसेज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ सख्त नियामकीय कदम उठाए गए। बड़ी मात्रा में गलत लेबल वाले शिशु खाद्य उत्पाद जब्त किए गए हैं। कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।” </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>बिज़नेस</category>
                                            <category>बाजार की हलचल </category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 21:15:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अर्चना सिंह | Online News Editor]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत का सर्विसेज पीएमआई अगस्त में बढ़कर 54.1 रहा, रोजगार वृद्धि 15 महीनों के उच्च स्तर पर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  नई दिल्ली। भारत के सर्विसेज सेक्टर में अगस्त में जोरदार वृद्धि देखने को मिली है और एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई बढ़कर 54.1 पर पहुंच गया है। इससे रोजगार वृद्धि भी 15 महीनों के उच्च स्तर पर रही है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक निजी सर्वेक्षण में दी गई। इससे पहले जुलाई में एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई 53.3 पर था। सर्वेक्षण में सेवा प्रदाताओं ने बढ़त की वजह अच्छी मांग और बाजार पहलों से नए बिजनेस में वृद्धि होने को बताया है।</p>
<p>  </p>
<p>इस दौरान अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों से मांग भी बनी रही है और नए निर्यात ऑर्डर करीब जुलाई के समान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/business/market-movements/india-services-pmi-august/article-223937"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/202609033928304.jpg" alt=""></a><br /><p> नई दिल्ली। भारत के सर्विसेज सेक्टर में अगस्त में जोरदार वृद्धि देखने को मिली है और एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई बढ़कर 54.1 पर पहुंच गया है। इससे रोजगार वृद्धि भी 15 महीनों के उच्च स्तर पर रही है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक निजी सर्वेक्षण में दी गई। इससे पहले जुलाई में एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई 53.3 पर था। सर्वेक्षण में सेवा प्रदाताओं ने बढ़त की वजह अच्छी मांग और बाजार पहलों से नए बिजनेस में वृद्धि होने को बताया है।</p>
<p> </p>
<p>इस दौरान अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों से मांग भी बनी रही है और नए निर्यात ऑर्डर करीब जुलाई के समान ही बढ़े हैं। एचएसबीसी के डेटा के मुताबिक, अगस्त में भारतीय सेवा प्रदाताओं को ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, जापान, मलेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका और यूएई से नए निर्यात ऑर्डर मिले थे। इसके अलावा, भारत की सेवा अर्थव्यवस्था में रोजगार तेजी से बढ़ा है। सर्वेक्षण में शामिल लगभग 11 प्रतिशत कंपनियों ने बताया कि उनके यहां कर्मचारियों की संख्या बढ़ी है। साथ ही, पिछले 15 महीनों में नौकरी पैदा होने की दर सबसे ज्यादा रही, क्योंकि कंपनियां अपनी कस्टमर सर्विस, सेल्स और डिजिटल ऑपरेशन को बेहतर बना रही हैं। एचएसबीसी की भारत में मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि अगस्त में सर्विस सेक्टर की गतिविधियां तेजी से बढ़ीं, जिसमें बेहतर आउटपुट और नए बिजनेस का योगदान रहा। भंडारी ने कहा, "रोजगार में तेजी से बढ़ोतरी हुई और नौकरियां पैदा होने का आंकड़ा 15 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया।"</p>
<p> </p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि कीमतों का दबाव बहुत कम बढ़ा। इसके अलावा, अगस्त में एचएसबीसी इंडिया कम्पोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स 54.3 पर रहा, जो जुलाई के बराबर ही है, क्योंकि सर्विस सेक्टर में तेज ग्रोथ ने मैन्युफैक्चरिंग में आई सुस्ती की भरपाई कर दी। एचएसबीसी के डेटा से यह भी पता चला कि कुल रोजगार में 14 महीनों में सबसे तेजी से बढ़ोतरी हुई। सर्विस सेक्टर में जबरदस्त हायरिंग ने मैन्युफैक्चरिंग में रोजगार की कमी की भरपाई से कहीं ज्यादा असर दिखाया है। कुल नए ऑर्डर की मात्रा में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई, जबकि कम्पोजिट इनपुट लागत महंगाई सात महीने के निचले स्तर पर आ गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिज़नेस</category>
                                            <category>बाजार की हलचल </category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 13:00:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अर्चना सिंह | Online News Editor]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सर्राफा बाजार में बिकवाली का दौर: सोना और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, जानें ताजा भाव</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली। सर्राफा बाजार में कमजोरी का दौर लगातार जारी है। आज शुरुआती कारोबार के दौरान सोना और चांदी में जबरदस्त गिरावट का रुख बना हुआ नजर आ रहा है। चेन्नई के अलावा देश के ज्यादातर हिस्सों में सोना आज 1,900 रुपये प्रति 10 ग्राम से लेकर 2,070 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो गया है। वहीं चेन्नई में सोने की कीमत आज 2,400 रुपये प्रति 10 ग्राम से लेकर 2,620 रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिर गई है। चांदी भी आज ज्यादातर सर्राफा बाजार में 5,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक सस्ता हो गया है।<br /><br /></p>
<p>भाव में बदलाव होने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/business/sarrafa-bazar/bullion-market-continues-to-decline-gold-and-silver-lose-their/article-223906"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/45c6573a44506810b5346b098d032b97_1842869173.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सर्राफा बाजार में कमजोरी का दौर लगातार जारी है। आज शुरुआती कारोबार के दौरान सोना और चांदी में जबरदस्त गिरावट का रुख बना हुआ नजर आ रहा है। चेन्नई के अलावा देश के ज्यादातर हिस्सों में सोना आज 1,900 रुपये प्रति 10 ग्राम से लेकर 2,070 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो गया है। वहीं चेन्नई में सोने की कीमत आज 2,400 रुपये प्रति 10 ग्राम से लेकर 2,620 रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिर गई है। चांदी भी आज ज्यादातर सर्राफा बाजार में 5,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक सस्ता हो गया है।<br /><br /></p>
<p>भाव में बदलाव होने की वजह से देश के ज्यादातर सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना आज 1,52,010 रुपये प्रति 10 ग्राम से लेकर 1,52,160 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह 22 कैरेट सोना आज 1,39,340 रुपये प्रति 10 ग्राम से लेकर 1,39,490 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच बिक रहा है। चांदी के भाव में भी गिरावट आने के कारण ये चमकीली धातु दिल्ली सर्राफा बाजार में आज शुरुआती कारोबार में 2,44,900 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बिक रही है।<br /><br /></p>
<p>दिल्ली में 24 कैरेट सोना आज 1,52,160 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत 1,39,490 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 24 कैरेट सोना 1,52,010 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,39,340 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। इसी तरह अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने की रिटेल कीमत 1,52,060 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,39,390 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है।<br /><br /></p>
<p>इन प्रमुख शहरों के अलावा चेन्नई में 24 कैरेट सोना आज 1,52,010 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर और 22 कैरेट सोना 1,39,340 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर बिक रहा है। इसी तरह कोलकाता में 24 कैरेट सोना 1,52,010 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,39,340 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। भोपाल में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,52,060 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,39,390 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।<br /><br /></p>
<p>जयपुर में 24 कैरेट सोना 1,52,160 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,39,490 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। पटना में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,52,060 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,39,390 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। लखनऊ के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना आज 1,52,160 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर और 22 कैरेट सोना 1,39,490 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।<br /><br /></p>
<p>देश के अन्य राज्यों की तरह कर्नाटक, तेलंगाना और ओडिशा के सर्राफा बाजार में भी आज शुरुआती कारोबार के दौरान सोने के भाव में कमजोरी का रुख बना हुआ नजर आ रहा है। इन तीनों राज्यों की राजधानियों बेंगलुरु, हैदराबाद और भुवनेश्वर में 24 कैरेट सोना 1,52,010 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह इन तीनों शहरों के सर्राफा बाजारों में 22 कैरेट सोना 1,39,340 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>बिज़नेस</category>
                                            <category>सर्राफा बाजार </category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 11:59:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अर्चना सिंह | Online News Editor]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जन्माष्टमी पर बाजार में बंपर उछाल: देशभर में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार की उम्मीद, CAIT का अनुमान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  नई दिल्ली। देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां जोरों पर है। बड़े पैमाने पर लोग खरीदारी कर रहे हैं। घरों और मंदिरों को सजाया है। जन्माष्टमी सिर्फ आस्था का ही त्योहार नहीं है, बल्कि भारत की 'सनातन अर्थव्यवस्था' का एक जीता-जागता प्रतीक है। इस वर्ष जन्माष्टमी के दौरान देशभर में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा व्यापार होने की उम्मीद की जा रही है। रक्षाबंधन के दौरान हुए जबरदस्त व्यापार के बाद इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर देशभर में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा व्यापार होने का अनुमान है।</p>
<p>  </p>
<p>कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) की ओर से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/business/market-movements/more-than-rs-40-thousand-crore-business-expected-across-the/article-223902"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/202609033928261.jpg" alt=""></a><br /><p> नई दिल्ली। देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां जोरों पर है। बड़े पैमाने पर लोग खरीदारी कर रहे हैं। घरों और मंदिरों को सजाया है। जन्माष्टमी सिर्फ आस्था का ही त्योहार नहीं है, बल्कि भारत की 'सनातन अर्थव्यवस्था' का एक जीता-जागता प्रतीक है। इस वर्ष जन्माष्टमी के दौरान देशभर में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा व्यापार होने की उम्मीद की जा रही है। रक्षाबंधन के दौरान हुए जबरदस्त व्यापार के बाद इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर देशभर में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा व्यापार होने का अनुमान है।</p>
<p> </p>
<p>कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) की ओर से यह अनुमान अलग-अलग सेक्टर में होने वाली संभावित बिक्री, घर और धार्मिक कामों के लिए खरीदारी, मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर होने वाले खर्च, देशभर में बड़े पैमाने पर होने वाले जश्न और धार्मिक पर्यटन से जुड़े खर्चों पर आधारित है। सीएआईटी के सेक्रेटरी जनरल और भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव सिर्फ भक्ति और आस्था का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक भागीदारी और आर्थिक गतिविधियों का एक अद्भुत संगम भी है।</p>
<p> </p>
<p>जन्माष्टमी एक अनोखा त्योहार है जहां आस्था सीधे तौर पर आर्थिक गतिविधियों में बदल जाती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "वोकल फॉर लोकल" (स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने) के आह्वान का असर देश भर के त्योहारों वाले बाजारों में साफ दिख रहा है। भारतीय उत्पादों को ज्यादा प्राथमिकता मिल रही है। जिससे स्थानीय व्यापार, कुटीर उद्योगों, हस्तशिल्प और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को काफी बढ़ावा मिल रहा है। पूजा के सामान से लेकर सजावट और धार्मिक उत्पादों तक, जन्माष्टमी के दौरान स्वदेशी सामान की भारी मांग रहती है।</p>
<p> </p>
<p>प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि जन्माष्टमी से जुड़ी हर रस्म और जश्न लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा है। किसान, डेयरी उत्पादक, फूल उगाने वाले, मिठाई बनाने वाले, कपड़े के व्यापारी, मूर्तिकार, कारीगर, महिला उद्यमी, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर, होटल और रेस्टोरेंट के मालिक और कई तरह की सेवाएं देने वाले लोग इस त्योहार से सीधे या परोक्ष रूप से फायदा उठाते हैं। सीएआईटी के अनुसार, 2024 में जन्माष्टमी के दौरान व्यापार लगभग 25 हजार करोड़ रुपए था और 2025 में यह बढ़कर लगभग 30 हजार करोड़ रुपए हो गया।</p>
<p> </p>
<p>इस वर्ष, ग्राहकों की ज्यादा मांग, सामान और सेवाओं की कीमतों में बदलाव, बढ़ते सामाजिक उत्सव, धार्मिक पर्यटन में बढ़ोतरी, और मॉडर्न रिटेल व डिजिटल कॉमर्स के विकास के कारण, व्यापार में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि होने और इसके 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा होने की उम्मीद है। प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि इस साल जिन उत्पादों की मांग खास तौर पर ज्यादा है, उनमें माखन-मिश्री, दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद, मिठाइयां, फल, सूखे मेवे, पूजा का सामान, फूलों की मालाएं, सजावटी तोरण, झूले, लड्डू गोपाल की मूर्तियां, मुकुट, बांसुरी, मोर पंख, आभूषण और त्योहार के खास कपड़े शामिल हैं।</p>
<p> </p>
<p>खंडेलवाल की ओर से इस बात पर जोर दिया गया है कि भारतीय त्योहारों को सिर्फ धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन मानना ​​उनके असली महत्व को कम करके आंकना होगा। दिवाली, होली, रक्षाबंधन, नवरात्रि, गणेश चतुर्थी, जन्माष्टमी, दुर्गा पूजा, करवा चौथ, छठ पूजा और कई अन्य त्योहार लाखों व्यापारियों, कारीगरों, शिल्पकारों, किसानों, महिला उद्यमियों, स्वरोजगार करने वाले लोगों और सेवा प्रदाताओं के लिए आर्थिक अवसरों का एक बड़ा नेटवर्क बनाते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय त्योहारों की सबसे खास बात यह है कि इन मौकों पर होने वाला खर्च सिर्फ उपभोग तक सीमित नहीं रहता; बल्कि यह आय और रोजगार के रूप में समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचता है।</p>
<p> </p>
<p>यह प्रक्रिया भारत की जमीनी स्तर की, समावेशी और विकेंद्रीकृत "सनातन अर्थव्यवस्था" को मजबूत करती है। खंडेलवाल ने कहा कि जन्माष्टमी के दौरान लाखों श्रद्धालु देश भर में अलग-अलग तरीकों से यह त्योहार मनाएंगे, खासकर मथुरा-वृंदावन, द्वारका, नाथद्वारा, दिल्ली, मुंबई, जयपुर, अहमदाबाद, इंदौर, यूपी, महाराष्ट्र, राजस्थान, एमपी, छत्तीसगढ़ और कृष्ण के अन्य प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर।</p>
<p> </p>
<p>इससे धार्मिक पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलेगा और होटल, ट्रांसपोर्ट, रेस्टोरेंट, प्रसाद की बिक्री, फूलों, स्थानीय हस्तशिल्प और संबंधित सेवाओं में अच्छी-खासी आर्थिक गतिविधि होगी। उन्होंने कहा कि भारत की 'धार्मिक अर्थव्यवस्था' को अब सिर्फ आध्यात्मिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। इसे एक बड़े आर्थिक इकोसिस्टम के तौर पर भी पहचाना जाना चाहिए जो रोजगार, पर्यटन, स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग और छोटे व्यवसायों को सहारा देता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>बिज़नेस</category>
                                            <category>बाजार की हलचल </category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 11:54:31 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जीडीपी की वृद्धि दर 2.6 प्रतिशत होने के दावे को केंद्र ने किया खारिज, कहा- नई सीरीज पर आधारित है डेटा </title>
                                    <description><![CDATA[<p>नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को उन दावों को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के आंकड़े को अच्छा दिखाने के लिए पिछले साल की पहली तिमाही की चालू जीडीपी के आंकड़े को संशोधित करके 86 लाख करोड़ रुपए से घटाकर 80 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है। अगर ऐसा नहीं किया गया होता तो चालू कीमतों में जीडीपी की ग्रोथ 2.6 प्रतिशत थी।</p>
<p>  </p>
<p>सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर जारी बयान में कहा गया कि 2026-27 की पहली तिमाही की जीडीपी का अनुमान 2022-23 को आधार वर्ष</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/business/market-movements/center-rejected-the-claim-of-gdp-growth-rate-being-26/article-223736"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/202609023927615.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को उन दावों को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के आंकड़े को अच्छा दिखाने के लिए पिछले साल की पहली तिमाही की चालू जीडीपी के आंकड़े को संशोधित करके 86 लाख करोड़ रुपए से घटाकर 80 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है। अगर ऐसा नहीं किया गया होता तो चालू कीमतों में जीडीपी की ग्रोथ 2.6 प्रतिशत थी।</p>
<p> </p>
<p>सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर जारी बयान में कहा गया कि 2026-27 की पहली तिमाही की जीडीपी का अनुमान 2022-23 को आधार वर्ष मानकर नई सीरीज के आधार पर लगाया गया है। इस कारण, इसकी तुलना 2025-26 की पहली तिमाही के 86 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े से नहीं की जा सकती, क्योंकि वह आंकड़ा पुरानी सीरीज का हिस्सा था जिसमें 2011-12 आधार वर्ष था।</p>
<p> </p>
<p>सही तुलना केवल 2022-23 को आधार वर्ष मानकर नई सीरीज के डेटा के आधार पर निकाले गए 80 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े से ही की जा सकती है। मंत्रालय ने कहा कि पहली तिमाही के जीडीपी अनुमानों की तुलना से पहले जीडीपी सीरीज में किए गए बदलावों को समझना जरूरी है। पहली तिमाही 2025-26 के अनुमान में बदलाव का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा साल की ग्रोथ को ज्यादा दिखाने के लिए इसे घटाया गया है। यह जीडीपी सीरीज में लगातार किए गए तरीके और डेटा से जुड़े बदलावों को दिखाता है।</p>
<p> </p>
<p>तिमाही जीडीपी के अनुमान 'बेंचमार्क-इंडिकेटर' तरीके से तैयार किए जाते हैं। इस तरीके में तिमाही अनुमानों में बदलाव संबंधित 'हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स' में होने वाले संशोधनों के आधार पर तय होता है। बयान में कहा गया है कि तिमाही सीरीज में सौ से ज्यादा वॉल्यूम या वैल्यू इंडिकेटर्स का इस्तेमाल किया जाता है, जैसे कि फसल उत्पादन में बढ़ोतरी, सीमेंट उत्पादन इंडेक्स में बढ़ोतरी, तैयार स्टील की खपत में बढ़ोतरी और कमर्शियल गाड़ियों की बिक्री में बढ़ोतरी आदि। पिछले साल के बेंचमार्क में बदलाव से, अपने आप चालू वर्ष की वास्तविक आर्थिक गतिविधि या अनुमान लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले संकेतकों में कोई बनावटी बढ़ोतरी नहीं होती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिज़नेस</category>
                                            <category>बाजार की हलचल </category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 19:18:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अर्चना सिंह | Online News Editor]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उदय कोटक ने बढ़ती ग्लोबल बॉन्ड यील्ड को लेकर दी चेतावनी, कहा- सरकारों पर कर्ज बनेगा महंगाई का कारण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  नई दिल्ली। दिग्गज बैंकर उदय कोटक ने बुधवार को निवेशकों को बढ़ती ग्लोबल बॉन्ड यील्ड को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ता सरकारी कर्ज और राजकोषीय घाटे के चलते केंद्रीय बैंक को अपनी बैलेंट शीट को बढ़ना (अधिक मात्रा में नोट छपाना) पड़ सकता है। इससे महंगाई में इजाफा होगा और छोटी अवधि में अधिक ब्याज दरों का सामना करना पड़ सकता है। उनका यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब जापान के 10 साल के सरकारी बॉन्ड यील्ड 3 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर गई है, जो कि 1996 के बाद अब</p>
<p> </p>
<p>सोशल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/business/uday-kotak-warned-about-rising-global-bond-yields-said/article-223613"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/202609023927560.jpg" alt=""></a><br /><p> नई दिल्ली। दिग्गज बैंकर उदय कोटक ने बुधवार को निवेशकों को बढ़ती ग्लोबल बॉन्ड यील्ड को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ता सरकारी कर्ज और राजकोषीय घाटे के चलते केंद्रीय बैंक को अपनी बैलेंट शीट को बढ़ना (अधिक मात्रा में नोट छपाना) पड़ सकता है। इससे महंगाई में इजाफा होगा और छोटी अवधि में अधिक ब्याज दरों का सामना करना पड़ सकता है। उनका यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब जापान के 10 साल के सरकारी बॉन्ड यील्ड 3 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर गई है, जो कि 1996 के बाद अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है। वहीं, अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड 4.8 प्रतिशत के आसपास है।</p>
<p> </p>
<p>सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर उदय कोटक ने लिखा कि सरकारी कर्ज और बढ़ते घाटे के कारण केंद्रीय बैंक के पास अपनी बैलेंसशीट को बढ़ाने यानी पैसा छापने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। उन्होंने आगे कहा कि अगर ऐसा होता है तो महंगाई और छोटी अवधि में ब्याज दरें बढ़ सकती हैं और निवेशकों को ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए। कोटक ने कहा, "जापान के 10 साल की बॉन्ड यील्ड 3 प्रतिशत और अमेरिका की 4.8 प्रतिशत के पार पहुंच गया है। जैसे-जैसे सरकारों पर कर्ज और घाटा बढ़ रहा है, केंद्रीय बैंकों के पास बैलेंस शीट बढ़ाने (यानी और पैसे छापने) के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा।</p>
<p> </p>
<p>ऐसा होने पर महंगाई बढ़ेगी और छोटी अवधि में ब्याज दरें भी ऊपर जाएंगी। ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहें!" जापानी बॉन्ड यील्ड में आई यह तेज हलचल ग्लोबल मार्केट के लिए बहुत अहम है। पारंपरिक रूप से जापान बचत का एक बहुत बड़ा केंद्र रहा है, जहां बहुत कम ब्याज दरों की वजह से जापानी निवेशक विदेशों में बॉन्ड और दूसरी संपत्तियों में भारी निवेश करते रहे हैं।</p>
<p> </p>
<p>जापानी बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी से यह स्थिति धीरे-धीरे बदल सकती है। अगर जापान में घरेलू एसेट्स से बेहतर रिटर्न मिलने लगे, तो निवेशक विदेशी बॉन्ड की अपनी अतिरिक्त खरीदारी कम कर सकते हैं, जिससे ग्लोबल यील्ड पर ऊपर की ओर दबाव पड़ सकता है। जापान में, पिछले दो सालों में 10-साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड तीन गुना से ज्यादा बढ़ गई है। इसकी वजह बढ़ती महंगाई, देश की राजकोषीय स्थिति को लेकर चिंताएं और ऐसी उम्मीदें हैं कि बैंक ऑफ जापान ब्याज दरों में बढ़ोतरी की रफ्तार बढ़ा सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिज़नेस</category>
                                            <category>बाजार की हलचल </category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 17:01:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अर्चना सिंह | Online News Editor]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एप्पल के नए सीईए जॉन टर्नस को मिलेगा 58 मिलियन डॉलर का पैकेज, टिम कुक की सैलरी घटी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  नई दिल्ली। टेक कंपनी एप्पल में नेतृत्व बदलने के साथ ही नए सीईओ के सैलरी पैकेज का भी खुलासा हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एप्पल के नए चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर जॉन टर्नस को वित्त वर्ष 2027 में करीब 58 मिलियन डॉलर का पैकेज मिलेगा, जबकि निवर्तमान सीईओ टिम कुक को एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर करीब 47 मिलियन डॉलर मिलेंगे। कंपनी ने मंगलवार को यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन में फाइलिंग कर यह जानकारी दी। मंगलवार ही टर्नस के सीईओ के तौर पर कार्यकाल का पहला दिन था।</p>
<p>  </p>
<p>फाइलिंग के मुताबिक वित्त वर्ष 2027 में जॉन टर्नस को 3</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/business/market-movements/apples-new-cea-john-ternes-will-get-a-package-of/article-223515"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/202609023927031.jpg" alt=""></a><br /><p> नई दिल्ली। टेक कंपनी एप्पल में नेतृत्व बदलने के साथ ही नए सीईओ के सैलरी पैकेज का भी खुलासा हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एप्पल के नए चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर जॉन टर्नस को वित्त वर्ष 2027 में करीब 58 मिलियन डॉलर का पैकेज मिलेगा, जबकि निवर्तमान सीईओ टिम कुक को एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर करीब 47 मिलियन डॉलर मिलेंगे। कंपनी ने मंगलवार को यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन में फाइलिंग कर यह जानकारी दी। मंगलवार ही टर्नस के सीईओ के तौर पर कार्यकाल का पहला दिन था।</p>
<p> </p>
<p>फाइलिंग के मुताबिक वित्त वर्ष 2027 में जॉन टर्नस को 3 मिलियन डॉलर की सालाना बेस सैलरी मिलेगी और 55 मिलियन डॉलर के टारगेट वैल्यू वाला स्टॉक अवॉर्ड दिया जाएगा। इसके अलावा वित्त वर्ष 2026 के लिए, जो सितंबर में खत्म हो रहा है, उन्हें करीब 2.5 मिलियन डॉलर का प्रोरेटेड रिस्ट्रिक्टेड स्टॉक यूनिट अवॉर्ड भी मिलेगा। जॉन टर्नस के इक्विटी अवॉर्ड का 75 फीसदी हिस्सा एप्पल के परफॉर्मेंस से जुड़ा होगा, जिसे एस एंड पी 500 के मुकाबले मापा जाएगा। बाकी 25 फीसदी टाइम-बेस्ड स्टॉक यूनिट्स होंगी, जो हर छह महीने में वेस्ट होंगी।</p>
<p> </p>
<p>टिम कुक जब एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका में जाएंगे तो उनकी सालाना सैलरी 3 मिलियन डॉलर से घटकर 2 मिलियन डॉलर हो जाएगी। हालांकि 2027 के लिए उनका स्टॉक अवॉर्ड 45 मिलियन डॉलर का होगा, जिसमें आधा हिस्सा कंपनी के परफॉर्मेंस से जुड़ा होगा। बता दें कि 2025 में एप्पल सीईओ के तौर पर टिम कुक का कुल पैकेज 74.3 मिलियन डॉलर था। दोनों अधिकारियों के स्टॉक अवॉर्ड की वैल्यू एप्पल के शेयर प्राइस के साथ घट-बढ़ सकती है। कंपनी ने फाइलिंग में कैश बोनस की जानकारी नहीं दी है, जो आमतौर पर सैलरी और परफॉर्मेंस पर आधारित होता है। टिम कुक ने 15 साल तक सीईओ की जिम्मेदारी संभाली।</p>
<p> </p>
<p>इस दौरान एप्पल ने नए प्रोडक्ट कैटेगरी में विस्तार किया और सालाना रेवेन्यू को करीब 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचा दिया। उनके कार्यकाल में कंपनी के शेयरों में 2,200 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। जॉन टर्नस ने मंगलवार को सीईओ का पद संभाला है। इससे पहले वह एप्पल में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, हार्डवेयर इंजीनियरिंग के तौर पर काम कर रहे थे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिज़नेस</category>
                                            <category>बाजार की हलचल </category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 14:24:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अर्चना सिंह | Online News Editor]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध शुरू होने से भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में खुला; निफ्टी 24,000 के नीचे फिसला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  मुंबई। कमजोर वैश्विक संकेतों से भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत मंगलवार को गिरावट के साथ हुई। इस दौरान सेंसेक्स 472.96 अंक या 0.61 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 76,471.32 और निफ्टी 197.80 अंक या 0.82 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,858.00 पर था। बाजार में बिकवाली व्यापक आधार पर देखी गई। करीब सभी सूचकांक लाल निशान में थे। निफ्टी ऑटो, निफ्टी आईटी, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज सबसे ज्यादा गिरने वाले सूचकांकों में शामिल थे। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बड़ी बिकवाली देखी गई।</p>
<p>  </p>
<p>निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 725.80 अंक या</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/business/stock-market/share-market-crash-today/article-223466"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-03/2024_12image_15_30_214157514sensex.jpg" alt=""></a><br /><p> मुंबई। कमजोर वैश्विक संकेतों से भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत मंगलवार को गिरावट के साथ हुई। इस दौरान सेंसेक्स 472.96 अंक या 0.61 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 76,471.32 और निफ्टी 197.80 अंक या 0.82 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,858.00 पर था। बाजार में बिकवाली व्यापक आधार पर देखी गई। करीब सभी सूचकांक लाल निशान में थे। निफ्टी ऑटो, निफ्टी आईटी, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज सबसे ज्यादा गिरने वाले सूचकांकों में शामिल थे। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बड़ी बिकवाली देखी गई।</p>
<p> </p>
<p>निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 725.80 अंक या 1.15 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 62,608.70 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 199.85 अंक या 1.00 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 19,686.40 पर था। सेंसेक्स पैक में सन फार्मा और अदाणी पोर्ट्स गेनर्स थे। इन्फोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस, इंडिगो, एमएंडएम, एचडीएफसी बैंक, एनटीपीसी, टेक महिंद्रा, बीईएल, एचडीएफसी बैंक, एशियन पेंट्स, इटरनल, आईटीसी, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी, बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील और टाइटन लाल निशान में थे। ज्यादातर एशियाई बाजारों में गिरावट के साथ कारोबार हो रहा है। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, सोल और बैंकॉक लाल निशान में थे।</p>
<p> </p>
<p>अमेरिकी बाजार भी मंगलवार को लाल निशान में बंद हुए थे, जिसमें डाओ जोन्स 0.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ और नैस्डैक 1.03 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ। भारत के साथ वैश्विक बाजारों के गिरने की वजह अमेरिका और ईरान के बीच फिर से युद्ध शुरू होना है। विदेशी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसने मंगलवार को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के ठिकानों पर कई हमले किए। इन ठिकानों में एयर डिफेंस साइट्स, रडार सिस्टम, समुद्री संपत्तियां और सुविधाएं, माइन बिछाने की क्षमताएं और कम्युनिकेशन साइट्स शामिल थीं। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन और इराक में अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया। इससे कच्चे तेल में बड़ा उछाल देखने को मिला है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का दाम 4 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 95 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड का दाम 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिज़नेस</category>
                                            <category>शेयर बाजार </category>
                                    

                <link>https://royalbulletin.in/business/stock-market/share-market-crash-today/article-223466</link>
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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 12:41:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अर्चना सिंह | Online News Editor]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केंद्र सरकार चीनी की जमाखोरी पर सख्त: व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा घटाई, अब दो हजार क्विंटल का स्टॉक, 15 सितंबर से लागू होंगे कड़े नियम</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली</strong>। केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और जमाखोरी तथा सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा को 4,000 क्विंटल से आधा घटाकर 2,000 क्विंटल करने का फैसला लिया है। यह संशोधित प्रावधान 15 सितंबर 2026 से लागू होगा और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। वर्तमान में 1 अगस्त 2026 से देश भर में 4,000 क्विंटल की सीमा लागू थी।</p>
<h5><strong>स्टॉक सीमा 30 दिनों के लिए की तय</strong></h5>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/headlines/central-governments-strictness-on-hoarding-of-sugar-stock-limit-reduced/article-223325"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/chini.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली</strong>। केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और जमाखोरी तथा सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा को 4,000 क्विंटल से आधा घटाकर 2,000 क्विंटल करने का फैसला लिया है। यह संशोधित प्रावधान 15 सितंबर 2026 से लागू होगा और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। वर्तमान में 1 अगस्त 2026 से देश भर में 4,000 क्विंटल की सीमा लागू थी।</p>
<h5><strong>स्टॉक सीमा 30 दिनों के लिए की तय</strong></h5>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सरकार के नए प्रावधानों के लागू होने के बाद किसी भी व्यापारी को चीनी की प्राप्ति की तारीख से 30 दिनों से अधिक समय तक स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। देश में कहीं भी कोई भी व्यापारी किसी भी समय 2,000 क्विंटल से अधिक चीनी जमा नहीं रख सकेगा।</p>
<h5><strong>कोलकाता को विशेष छूट</strong></h5>
<p>सरकार ने क्षेत्र की विशिष्ट बाजार जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कोलकाता और इसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्रों के लिए स्टॉक रखने की सीमा 4,000 क्विंटल ही बरकरार रखी गई है। कोलकाता क्षेत्र मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से चीनी प्राप्त करता है और वहां से पूर्वोत्तर राज्यों सहित पूरे पूर्वी भारत में आपूर्ति करता है।</p>
<h5><strong>सघन चेकिंग और भौतिक सत्यापन गिरे दाम</strong></h5>
<p>सरकार ने हाल के दिनों में चीनी मिलों, डीलरों और व्यापारियों के गोदामों पर बड़े पैमाने पर सघन जांच व भौतिक सत्यापन अभियान चलाया। इस दौरान अतिरिक्त स्टॉक छिपाने और बिक्री में अनियमितता के कई मामले सामने आए। प्रशासनिक सख्ती और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति का ही असर है कि हाल के दिनों में मिलों से निकलने वाली चीनी की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही खुदरा कीमतों में भी कमी का रुझान दिखने लगा है।</p>
<h5><strong>सालाना आधार पर 37% महंगी हुई चीनी</strong></h5>
<p>केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त के अंत में चीनी का अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य 63.28 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष के 46.02 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में लगभग 37 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह थोक कीमतें भी 36.28 प्रतिशत बढ़कर 58.40 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई थीं।</p>
<h5><strong>देश में पर्याप्त चीनी का स्टॉक</strong></h5>
<p>सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि 2025-26 विपणन वर्ष के लिए उत्पादन अनुमान को पहले के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन किया गया है, लेकिन देश की वार्षिक खपत मांग लगभग 280-285 लाख टन ही है। सरकार ने मिलों पर अकारण कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाया है, जबकि हाल के दिनों में मिल स्तर पर कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।</p>
<h5><strong>पोर्टल के जरिए नियमित निगरानी </strong></h5>
<p>खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने व्यापारियों और मिलों के लिए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से नियमित रूप से अपने स्टॉक की घोषणा करना अनिवार्य बना दिया है। सरकार का कहना है कि आने वाले हफ्तों में भी पूरे देश में चीनी के भंडारों का भौतिक सत्यापन जारी रहेगा। सरकार ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया है कि बाजार में मूल्य स्थिरता और निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Breaking News</category>
                                            <category>मुख्य समाचार</category>
                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>बिज़नेस</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>बाजार की हलचल </category>
                                    

                <link>https://royalbulletin.in/headlines/central-governments-strictness-on-hoarding-of-sugar-stock-limit-reduced/article-223325</link>
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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 01:47:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ओ.पी. पाल। स्वतंत्र पत्रकार]]></dc:creator>
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