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                <title>धर्म ज्योतिष - रॉयल बुलेटिन</title>
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                <description>धर्म ज्योतिष RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भांग-आभूषणों से सजे बाबा महाकाल! चंदन लेप के बाद हुई भस्म आरती, ‘जय श्री महाकाल’ से गूंजा मंदिर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि, शनिवार को बाबा महाकाल की भस्म आरती की गई। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। शनिवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठा। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा।</p>
<p>महाकाल मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/dharma-astrology/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%86%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%9C%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2--%E0%A4%9A%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%A8-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%AA-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%88-%E0%A4%AD%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AE-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80--%E2%80%98%E0%A4%9C%E0%A4%AF-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E2%80%99-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%82%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0/article-224719"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/202609053930723.jpg" alt=""></a><br /><p>उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि, शनिवार को बाबा महाकाल की भस्म आरती की गई। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। शनिवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठा। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा।</p>
<p>महाकाल मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद, और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। बाबा महाकाल की पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े, और शंखनाद के साथ भस्म आरती की गई।</p>
<p>बाबा महाकाल का चंदन से लेप किया गया। भांग और आभूषणों से भव्य शृंगार किया गया। महाकाल मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन किए। अपने आराध्य देव के दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध थे। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य होता है। परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। बाबा की इस आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन की पावन नगरी पहुंचते हैं।</p>
<p> </p>
<h3> </h3>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 09:20:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[रविता ढांगे | Online News Editor ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शिक्षक दिवस पर मंथन: मां पहली गुरु, शिक्षक दूसरा; बच्चों के बौद्धिक विकास के साथ संस्कार देना भी जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आज शिक्षक दिवस है। शिक्षक अर्थात् 'गुरु', क्योंकि पुरातन काल से आचार्य को 'गुरु' की संज्ञा से विभूषित किया जाता रहा है। देखना यह है कि बच्चे का प्रथम गुरु कौन है। हमारी संस्कृति में प्रथम गुरु का स्थान माता को प्राप्त है, क्योंकि शिशु अवस्था में शिक्षण संस्थाओं जाने तक माता ही गुरु होती है। मनुस्मृति का श्लोक 105 के अनुसार "उपाध्याया दशाचार्य:, आचार्याणां शतम् पिता। सहस्रं तु पितृन् माता गौरवेणातिरिच्यते।" अर्थात् उपाध्याय से आचार्य का गौरव दश गुना, आचार्य के गौरव से माता-पिता का गौरव सौ गुना और उससे हजार गुना स्थान मिला है। तात्पर्य यह है कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/dharma-astrology/wisdom-quotes/brainstorming-on-teachers-day-mother-is-the-first-teacher-second/article-224611"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/25d6cf59-72be-459c-a3c4-5110b59d41411.png" alt=""></a><br /><p>आज शिक्षक दिवस है। शिक्षक अर्थात् 'गुरु', क्योंकि पुरातन काल से आचार्य को 'गुरु' की संज्ञा से विभूषित किया जाता रहा है। देखना यह है कि बच्चे का प्रथम गुरु कौन है। हमारी संस्कृति में प्रथम गुरु का स्थान माता को प्राप्त है, क्योंकि शिशु अवस्था में शिक्षण संस्थाओं जाने तक माता ही गुरु होती है। मनुस्मृति का श्लोक 105 के अनुसार "उपाध्याया दशाचार्य:, आचार्याणां शतम् पिता। सहस्रं तु पितृन् माता गौरवेणातिरिच्यते।" अर्थात् उपाध्याय से आचार्य का गौरव दश गुना, आचार्य के गौरव से माता-पिता का गौरव सौ गुना और उससे हजार गुना स्थान मिला है। तात्पर्य यह है कि माता अपने बच्चे को भौतिक अथवा बौद्धिक रूप में तो ढाल सकती है, क्योंकि यह उसे जन्म देने से पूर्व ही उसका निर्माण आरम्भ कर देती है। माता के पश्चात् दूसरा गुरु शिक्षक होता है। शिक्षक का दायित्व होता है कि वह अपने विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ नैतिक तथा सद्गुणों का विकास करे। शिक्षक सुधारने वाला होता है और विद्यार्थी सुधरने वाला। अनुपात के हिसाब से हम तुलना धरातल में ऊँच नीच की करेंगे। क्या निर्दोष शिशुओं को बच्चा जब शिक्षण संस्थान में प्रवेश करता है, अति से उत्तरी धरातल की ओर प्रकृति बदलती दिखेगी। शिक्षण संस्थान जाने के पश्चात यह सम्भावना नहीं रहेगी कि बच्चा परीक्षा में शिक्षक से नंबर माँग ले। यह तो कहना पड़ा रहा है कि आज शिक्षक की साख पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है। विचार करें तो ऐसा नहीं होना चाहिए। यह ही एक ऐसा मुख्य 'साधन' है जो कि अंधकार को दूर करता है। शिक्षक दिवस को इसके उपयुक्त धरातल स्तर पर गम्भीरता से विचार करने की आवश्यकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 23:59:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[प्रणपाल सिंह राणा | स्तंभकार – जीवन दर्शन ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दैनिक राशिफल: 5 सिंतबर, 2026, शनिवार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><img src="https://royalbulletin.in/media/2026-09/c41f993621e8201cba9e57c959d479fc_919490550.jpg" alt="c41f993621e8201cba9e57c959d479fc_919490550" width="950" height="1200" /><br /><br />मेष - कहीं रुका हुआ पैसा वसूलने में मदद मिल जाएगी। व्यर्थ प्रपंच में समय नहीं गंवाकर अपने काम पर ध्यान दीजिए। विरोधियों के सक्रिय होने की संभावना है। जमीन जायदाद का लाभ भी हो सकता है। श्रम साध्य कार्यों में सफल होंगे। भय तथा शत्रुहानि की आशंका रहेगी। शुभांक.5.6.7<br /><br />वृष - जमीन जायदाद का लाभ भी हो सकता है। श्रम साध्य कार्यों में सफल होंगे। आवास, मकान तथा वाहन की सुविधाएं मिलेंगी। कर्ज तथा रोगों से मुक्ति भी संभव है। नियोजित धन से लाभ होने लगेगा। घर के सदस्य मदद करेंगे और साथ ही आर्थिक बदहाली से भी मुक्ति</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/dharma-astrology/horoscope/daily-horoscope-5-september-2026-saturday/article-224607"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/b52dfe79-7ba9-44b4-a9fe-5ed3db5e96ff.png" alt=""></a><br /><p><img src="https://royalbulletin.in/media/2026-09/c41f993621e8201cba9e57c959d479fc_919490550.jpg" alt="c41f993621e8201cba9e57c959d479fc_919490550" width="950" height="1660"></img><br /><br />मेष - कहीं रुका हुआ पैसा वसूलने में मदद मिल जाएगी। व्यर्थ प्रपंच में समय नहीं गंवाकर अपने काम पर ध्यान दीजिए। विरोधियों के सक्रिय होने की संभावना है। जमीन जायदाद का लाभ भी हो सकता है। श्रम साध्य कार्यों में सफल होंगे। भय तथा शत्रुहानि की आशंका रहेगी। शुभांक.5.6.7<br /><br />वृष - जमीन जायदाद का लाभ भी हो सकता है। श्रम साध्य कार्यों में सफल होंगे। आवास, मकान तथा वाहन की सुविधाएं मिलेंगी। कर्ज तथा रोगों से मुक्ति भी संभव है। नियोजित धन से लाभ होने लगेगा। घर के सदस्य मदद करेंगे और साथ ही आर्थिक बदहाली से भी मुक्ति मिलने लगेगी। शुभांक.6.7.9<br /><br />मिथुन- कल का परिश्रम आज लाभ देगा। घर के सदस्य मदद करेंगे और साथ ही आर्थिक बदहाली से भी मुक्ति मिलने लगेगी। बुद्घिए बल व पराक्रम सफल होगा। व्यापार व व्यवसाय में स्थिति उत्तम रहेगी। नौकरी में पदोन्नति की संभावना है। व्यापार में स्थिति नरम रहेगी। संतोष रखने से सफलता मिलेगी। शुभांक.5.7.8<br /><br />कर्क- संतोष रखने से सफलता मिलेगी। नौकरी में स्थिति सामान्य ही रहेगी। कल का परिश्रम आज लाभ देगा। बुद्घिए बल व पराक्रम सफल होगा। व्यापार में वृद्घि व उत्तम लाभ मिलेगा। यार-दोस्तों के साथ सांझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। शुभांक.5.6.8<br /><br />सिंह - कल का परिश्रम आज लाभ देगा। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। यार-दोस्तों के साथ सांझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। जोखिम से दूर रहना ही बुद्घिमानी होगी। आपकी योजना से लोग प्रभावित होंगे। शुभांक.3.5.7<br /><br />कन्या - महत्त्वपूर्ण कार्य को समय पर बना लें तो अच्छा ही होगा। कामकाज में आ रही बाधा दूर होगी। बाहरी और अंदरूनी सहयोग मिलता चला जाएगा। अपने काम पर ध्यान दीजिए। लेन-देन में आ रही बाधा को दूर करने के प्रयास सफल होंगे। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। शुभांक.3.6.8<br /><br />तुला - राजकीय कार्यों से लाभ। पैतृक सम्पत्ति से लाभ। मेहमानों का आगमन होगा। पुरानी गलती का पश्चाताप होगा। विद्यार्थियों को लाभ। दाम्पत्य जीवन सुखद रहेगा। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। पुराने मित्र से मिलन होगा। शुभांक.5.7.9<br /><br />वृश्चिक - आय के अच्छे योग बनेगें। संतान की उन्नति के योग हैं। स्त्री-संतान पक्ष का सहयोग मिलेगा। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। नवीन जिम्मेदारी बढऩे के आसार रहेंगे। काम को प्राथमिकता से करें। शुभांक.2.5.7<br /><br />धनु - आशा और उत्साह के कारण सक्रियता बढ़ेगी। आगे बढऩे के अवसर लाभकारी सिद्घ होंगे। कुछ आर्थिक संकोच पैदा हो सकते है। कोई प्रिय वस्तु या नवीन वस्त्राभूषण प्राप्त होंगे। सभाओं में मान-सम्मान बढ़ेगा। धार्मिक आस्थाएं फलीभूत होंगी। माता पक्ष से विशेष लाभ। पुराने मित्र से मिलन होगा। शुभांक.1.5.7<br /><br />मकर- कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। सांझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। कामकाज की व्यस्तता से सुख-आराम प्रभावित होगा। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। कार्यक्रम बदलने होंगे। व्यापार में वृद्घि होगी। स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार होगा। शुभांक.1.2.6<br /><br />कुंभ - अपना काम दूसरों के सहयोग से पूरा होगा। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। सांझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। भाई-बहनों का प्रेम बढ़ेगा। आय के स्त्रोत बनेंगे। स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार होगा। शुभांक.2.6.8<br /><br />मीन - ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। महत्वपूर्ण कार्य को समय पर बना लें तो अच्छा ही होगा। व्यापार में स्थिति नरम रहेगी। आशा और उत्साह के कारण सक्रियता बढ़ेगी। अल्प-परिश्रम से ही लाभ होगा। यार-दोस्तों के साथ सांझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। शुभांक.2.4.9</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                            <category>राशिफल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 23:58:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[पं. अरविन्द पांडेय | कर्मकांड विशेषज्ञ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जन्माष्टमी पर कृष्ण रूप में सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब; ‘जय श्री महाकाल’ से गूंजा मंदिर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, शुक्रवार को बाबा महाकाल की भस्म आरती की गई। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। शुक्रवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठा। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा।</p>
<p>महाकाल मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/dharma-astrology/%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%AE%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A3-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%AA-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%9C%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2--%E0%A4%AD%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AE-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%89%E0%A4%AE%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AC--%E2%80%98%E0%A4%9C%E0%A4%AF-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E2%80%99-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%82%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0/article-224308"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/202609043929566.jpg" alt=""></a><br /><p>उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, शुक्रवार को बाबा महाकाल की भस्म आरती की गई। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। शुक्रवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठा। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा।</p>
<p>महाकाल मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद, और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। बाबा महाकाल की पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े, और शंखनाद के साथ भस्म आरती की गई।</p>
<p>जन्माष्टमी के अवसर पर श्रीकृष्ण के स्वरूप में बाबा महाकाल ने श्रद्धालुओं को दर्शन दिया। बाबा का श्रीकृष्ण भगवान के रूप में शृंगार किया गया। महाकाल मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन किए। अपने आराध्य देव के दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध थे।</p>
<p>भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य होता है। परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। बाबा की इस आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन की पावन नगरी पहुंचते हैं। </p>
<p> </p>
<h3> </h3>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 10:28:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[रविता ढांगे | Online News Editor ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जन्माष्टमी पर गीता का संदेश: कर्म ही जीवन की दिशा तय करते हैं, अच्छे कर्मों से संवारें अगला जन्म</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आज श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पुनीत अवसर पर उनके द्वारा दिये गये उपदेश जो श्री श्रीमद्भगवद् गीता के रूप में संगृहीत हैं समयोचित हैं, सदैव प्रासंगिक रहेंगे। गीता के सभी अध्याय जीवन के सभी पहलुओं की विवेचना करते हैं। श्री कृष्ण कहते हैं कि सृष्टि चार प्रकार की होती है: पिण्डज अर्थात् पेट में बच्चा बनकर तैयार होता है जैसे मनुष्य, पशु; दूसरे अण्डज जो अंडे के रूप में पेट से बाहर आता है; स्वेदज जो पसीने से उत्पन्न हो जैसे जूँ, खटमल आदि; चौथे उद्भिज जो भूमि को फाड़कर बाहर निकले जैसे वृक्ष, वनस्पति। इस प्रकार जलचर, थलचर, नभचर,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/dharma-astrology/wisdom-quotes/geetas-message-on-janmashtami-karmas-decide-the-direction-of-life/article-224186"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/6d477a2c-ad2d-4e6d-8e8e-877ae1cebeae.png" alt=""></a><br /><p>आज श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पुनीत अवसर पर उनके द्वारा दिये गये उपदेश जो श्री श्रीमद्भगवद् गीता के रूप में संगृहीत हैं समयोचित हैं, सदैव प्रासंगिक रहेंगे। गीता के सभी अध्याय जीवन के सभी पहलुओं की विवेचना करते हैं। श्री कृष्ण कहते हैं कि सृष्टि चार प्रकार की होती है: पिण्डज अर्थात् पेट में बच्चा बनकर तैयार होता है जैसे मनुष्य, पशु; दूसरे अण्डज जो अंडे के रूप में पेट से बाहर आता है; स्वेदज जो पसीने से उत्पन्न हो जैसे जूँ, खटमल आदि; चौथे उद्भिज जो भूमि को फाड़कर बाहर निकले जैसे वृक्ष, वनस्पति। इस प्रकार जलचर, थलचर, नभचर, वनचर आदि जीवों को उनके उनके कर्मानुसार ईश्वर ने बनाया। कोई राजमहल का राजा है तो कोई झोपड़ी का कंगाल। भगवान दयालु भी हैं और दयाळू भी। प्रत्येक जीव को उसके कर्मानुसार ही देते हैं, न कम न अधिक। जीवन एक पुस्तक है जैसे पुस्तक के पन्नों की संख्या निश्चित तथा सीमित होती है वैसे ही जीवन पुस्तक भी वर्ष, मास, दिन, घड़ी, पल आदि के रूप में निश्चित एवं सीमित है। पुस्तक में एक पृष्ठ आदि का अर्थात् जन्म की तिथि तथा अन्त में मृत्यु की होती है। बीच के पृष्ठ हानि, लाभ, यश, अपयश, सुख, दुख आदि के। अतः मृत्यु जो निश्चित है और ईश्वर द्वारा पूर्व निर्धारित है उसका भय क्यों? वह आयेगी ही वह भी अपने निश्चित समय पर। इसलिये भगवान कृष्ण की शिक्षाओं पर चलते हुये केवल अच्छे कार्य करें ताकि अगले जन्म की पुस्तक अनुकूलता ही अनुकूलता हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 23:59:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[प्रणपाल सिंह राणा | स्तंभकार – जीवन दर्शन ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दैनिक राशिफल: 4 सिंतबर, 2026, शुक्रवार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><img src="https://royalbulletin.in/media/2026-09/9b76dcc3c246936dfb2a73995feecf56_700196931.jpg" alt="9b76dcc3c246936dfb2a73995feecf56_700196931" width="945" height="1200" /><br /><br />मेष- अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। अपने अधीनस्त लोगों से कम सहयोग मिलेगा। बाहरी सहयोग की अपेक्षा रहेगी। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। समय नकारात्मक परिणाम वाला बन रहा है। शुभांक-1-5-7<br /><br />वृष - अवरुद्घ कार्य संपन्न हो जाएंगे। प्रियजनों से समागम का अवसर मिलेगा। आशा और उत्साह के कारण सक्रियता बढ़ेगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। घर के सदस्य मदद करेंगे और साथ ही आर्थिक बदहाली से भी मुक्ति मिलने लगेगी। पद-प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए कुछ सामाजिक कार्य संपन्न होंगे। शुभांक-2-5-7<br /><br />मिथुन - बाहरी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/dharma-astrology/horoscope/daily-horoscope-4-september-2026-friday/article-224147"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/b1529fa4-de9e-4a04-8e5b-2aa9ec5819be.png" alt=""></a><br /><p><img src="https://royalbulletin.in/media/2026-09/9b76dcc3c246936dfb2a73995feecf56_700196931.jpg" alt="9b76dcc3c246936dfb2a73995feecf56_700196931" width="945" height="1660"></img><br /><br />मेष- अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। अपने अधीनस्त लोगों से कम सहयोग मिलेगा। बाहरी सहयोग की अपेक्षा रहेगी। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। समय नकारात्मक परिणाम वाला बन रहा है। शुभांक-1-5-7<br /><br />वृष - अवरुद्घ कार्य संपन्न हो जाएंगे। प्रियजनों से समागम का अवसर मिलेगा। आशा और उत्साह के कारण सक्रियता बढ़ेगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। घर के सदस्य मदद करेंगे और साथ ही आर्थिक बदहाली से भी मुक्ति मिलने लगेगी। पद-प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए कुछ सामाजिक कार्य संपन्न होंगे। शुभांक-2-5-7<br /><br />मिथुन - बाहरी और अंदरूनी सहयोग मिलता चला जाएगा। कल का परिश्रम आज लाभ देगा। कामकाज में आ रही बाधा दूर होगी। पर प्रपंच में ना पड़कर अपने काम पर ध्यान दीजिए। लेन-देन में आ रही बाधा को दूर करने के प्रयास सफल होंगे। धार्मिक कार्य में समय और धन व्यय होगा। शुभांक-3-6-7<br /><br />कर्क - अपनी गतिविधियों पर पुनर्विचार करें। परिवार में किसी का स्वास्थ्य खराब हो सकता है। वैचारिक द्वन्द्व और असंतोष बना रहेगा। किसी सूचना से पूर्ण निर्णय सम्भव। सुख आरोग्य प्रभावित होगा। शत्रुभय, ङ्क्षचता, संतान को कष्ट, अपव्यय के कारण बनेंगे। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। शुभांक-4-3-6<br /><br />सिंह - दुर्लभ स्वप्न साकार होंगे। व्यर्थ की भाग-दौड़ से बचा जाए तो अच्छा है। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। कोई प्रिय वस्तु अथवा नवीन वस्त्राभूषण प्राप्त होंगे। पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। शुभांक-4-6-9<br /><br />कन्या- सभा-गोष्ठियों में मान-सम्मान बढ़ेगा। सुख-आनंद कारक समय है। आगे बढऩे के अवसर लाभकारी सिद्घ होंगे। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। कोई प्रिय वस्तु अथवा नवीन वस्त्राभूषण प्राप्त होंगे। धार्मिक आस्थाएं फलीभूत होंगी। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। शुभांक-3-5-6<br /><br />तुला - भ्रातृपक्ष में विरोध होने की संभावना है। पारिवारिक विवाद टालें। आशानुकूल कार्य होने में संदेह है। मध्याह्न से ही आशाएं बलवती होंगी। महत्त्वपूर्ण कार्यों को आज ही निपटा लें उसके बाद समय व्ययकारी सिद्घ होगा। व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। कामकाज की अधिकता रहेगी। शुभांक-2-6-7<br /><br />वृश्चिक - व्यवसायिक अभ्युदय भी होगा और प्रसन्नताएं भी बढ़ेगी। कामकाज की व्यस्तता से सुख-आराम प्रभावित होगा। धर्म-कर्म के प्रति रुचि जागृत होगी। श्रेष्ठजनों की सहानुभूतियां होगी। रुका हुआ लाभ आज प्राप्त हो सकता है। बातचीत में संयम बरतें। व्यावसायिक उपक्रम में उलटफेर की शुरूआत हो सकती है। शुभांक-1-5-7<br /><br />धनु - खान-पान में विशेष सावधानी बरतें। मेहमानों का आगमन होगा। राजकीय कार्यों से लाभ। पैतृक सम्पत्ति से लाभ। नैतिक दायरे में रहें। पुरानी गलती का पश्चाताप होगा। विद्यार्थियों को लाभ। दाम्पत्य जीवन सुखद रहेगा। वाहन चालन में सावधानी बरतें। बातचीत में संयम बरतें। आय के योग बनेगें। शुभांक-2-4-5<br /><br />मकर - मन प्रसन्न बना रहेगा। अचल संपति की खरीद अथवा कृषि उद्यम में रुचि पैदा होगी। परिवार के साथ मनोरांजनिक स्थल की यात्रा होगी। आपसी प्रेम-भाव में बढ़ोतरी होगी। भविष्य की योजनाओं पर विचार विमर्श होगा। अपनों का सहयोग होगा। अपने आपको अधिक सक्रिय पायेगें। शुभांक-5-7-9<br /><br />कुम्भ- शुभ कार्यों का लाभदायक परिणाम होगा। कामकाज की अधिकता रहेगी। लाभ भी होगा और पुराने मित्रों का समागम भी। व्यवसायिक अभ्युदय भी होगा और प्रसन्नताए भी बढ़ेगी। धर्म-कर्म के प्रति रुचि जागृत होगी। श्रेष्ठजनों की सहानुभूति मिलेगी। रुका हुआ लाभ आज प्राप्त हो सकता है। शुभांक-3-6-9<br /><br />मीन- स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार की अपेक्षा रहेगी। आमोद-प्रमोद का दिन होगा और व्यावसायिक प्रगति भी होगी। ज्ञान-विज्ञान की वृद्घि होगी और सज्जनों का साथ भी रहेगा। व्यर्थ की भाग-दौड़ से यदि बचा ही जाए तो अच्छा है। प्रियजनों से समागम का अवसर मिलेगा। शुभांक-3-5-6</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                            <category>राशिफल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 23:58:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[पं. अरविन्द पांडेय | कर्मकांड विशेषज्ञ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जब द्वारका में बढ़ने लगे थे अपशकुन, श्रीकृष्ण ने दिया बड़ा संदेश: मोह में बंधकर नहीं, सही समय पर बदलना सीखिए,जानिए क्यों</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd"><strong>धार्मिक कथा।</strong> महाभारत काल की द्वारका नगरी कभी सुख, शांति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती थी। वहां श्रीकृष्ण का निवास था और चारों ओर खुशहाली का वातावरण था। लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदलने लगीं। जिस नगरी में कभी शांति और समृद्धि का वास था, वहां धीरे-धीरे तरह-तरह के अपशकुन और उत्पात दिखाई देने लगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">लोगों के बीच विवाद बढ़ने लगे। परिवारों में कलह का वातावरण बनने लगा और नई पीढ़ी भी अनुशासन से दूर होती जा रही थी। धीरे-धीरे द्वारका का सामाजिक वातावरण बदलने लगा। इन परिस्थितियों को देखकर श्रीकृष्ण भी चिंतित हुए और उन्होंने द्वारका के बुजुर्गों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/dharma-astrology/when-bad-omen-started-increasing-in-dwarka-shri-krishna-gave/article-223862"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/screenshot-2026-09-03-101309.png" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd"><strong>धार्मिक कथा।</strong> महाभारत काल की द्वारका नगरी कभी सुख, शांति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती थी। वहां श्रीकृष्ण का निवास था और चारों ओर खुशहाली का वातावरण था। लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदलने लगीं। जिस नगरी में कभी शांति और समृद्धि का वास था, वहां धीरे-धीरे तरह-तरह के अपशकुन और उत्पात दिखाई देने लगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">लोगों के बीच विवाद बढ़ने लगे। परिवारों में कलह का वातावरण बनने लगा और नई पीढ़ी भी अनुशासन से दूर होती जा रही थी। धीरे-धीरे द्वारका का सामाजिक वातावरण बदलने लगा। इन परिस्थितियों को देखकर श्रीकृष्ण भी चिंतित हुए और उन्होंने द्वारका के बुजुर्गों से इस विषय पर चर्चा की।</p>
<h2><strong>श्रीकृष्ण ने बताया, क्यों बदल रहे हैं द्वारका के हालात</strong></h2>
<p class="isSelectedEnd">श्रीकृष्ण ने बुजुर्गों से कहा कि द्वारका में जगह-जगह अपशकुन दिखाई दे रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण ऋषियों द्वारा उनके कुल को दिया गया शाप है। उन्होंने बताया कि अब उस शाप के निदान का अवसर भी निकल चुका है और उसके परिणाम से बचना संभव नहीं है।</p>
<p class="isSelectedEnd">श्रीकृष्ण की बातें सुनकर द्वारका के बुजुर्ग चिंतित हो गए। उन्होंने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें श्रीकृष्ण पर ही भरोसा है। द्वारका में परिस्थितियां लगातार बिगड़ रही हैं, लोग एक-दूसरे से लड़ रहे हैं और नई पीढ़ी भी उद्दंड होती जा रही है। ऐसे में अब क्या किया जाए, इसका मार्गदर्शन श्रीकृष्ण ही कर सकते हैं।</p>
<h2><strong>श्रीकृष्ण ने कहा, जरूरत पड़े तो स्थान छोड़ देना चाहिए</strong></h2>
<p class="isSelectedEnd">तब श्रीकृष्ण ने एक ऐसी बात कही, जो आज के जीवन में भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। उन्होंने कहा कि यदि अपने प्राणों और जीवन की रक्षा करनी है तो इस स्थान को छोड़ देना ही उचित होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">श्रीकृष्ण ने समझाया कि व्यक्ति को अपने स्थान से स्वाभाविक रूप से मोह हो जाता है। घर, जमीन, रिश्ते और वर्षों की यादें इंसान को एक जगह से बांधे रखती हैं। लेकिन जब वही स्थान लगातार विपरीत परिस्थितियों और दुख का कारण बनने लगे, तब केवल मोह के कारण वहां टिके रहना बुद्धिमानी नहीं है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि परिस्थितियां जब बदल जाएं तो व्यक्ति को भी अपने निर्णयों पर विचार करना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर स्थान परिवर्तन भी जीवन को बचाने और बेहतर दिशा देने का माध्यम बन सकता है।</p>
<h2><strong>प्रभास क्षेत्र जाने का दिया सुझाव</strong></h2>
<p class="isSelectedEnd">श्रीकृष्ण ने द्वारका के लोगों को पास स्थित प्रभास क्षेत्र जाने का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि प्रभास एक पवित्र स्थान है और वहां जाना सभी के लिए हितकारी होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रभास क्षेत्र के महत्व को समझाते हुए श्रीकृष्ण ने चंद्रदेव का उदाहरण दिया। कथा के अनुसार दक्ष प्रजापति के शाप के कारण चंद्रमा को कष्ट का सामना करना पड़ा था। शाप के प्रभाव से मुक्ति पाने के लिए चंद्रदेव ने प्रभास क्षेत्र में जाकर स्नान किया और भगवान की आराधना की। इसके बाद उन्हें शाप के प्रभाव से मुक्ति मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd">श्रीकृष्ण ने कहा कि वे भी प्रभास क्षेत्र जाकर पवित्र स्नान करेंगे, अपने पितरों का तर्पण करेंगे और सत्संग सुनेंगे। इससे कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए मन को शांति और आत्मबल प्राप्त होगा।</p>
<h2><strong>सभी ने स्वीकार की श्रीकृष्ण की बात</strong></h2>
<p class="isSelectedEnd">श्रीकृष्ण की बातों को सभी ने स्वीकार किया और द्वारका के लोग प्रभास क्षेत्र की ओर चल पड़े। यह प्रसंग केवल एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि जीवन में परिस्थितियों को पहचानने और समय के अनुसार निर्णय लेने का संदेश भी देता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कई बार मनुष्य किसी स्थान, व्यक्ति या परिस्थिति से इतना जुड़ जाता है कि उससे बाहर निकलने की कल्पना भी नहीं कर पाता। लेकिन यदि वही वातावरण लगातार तनाव, विवाद, असुरक्षा और नकारात्मकता बढ़ाने लगे तो उससे दूरी बनाना आवश्यक हो सकता है।</p>
<h2><strong>परिस्थितियों के संकेतों को पहचानना जरूरी</strong></h2>
<p class="isSelectedEnd">जीवन में आने वाली हर परेशानी को नजरअंदाज करना सही नहीं है। यदि किसी स्थान या वातावरण में लगातार तनाव, विवाद और नकारात्मकता बढ़ रही है तो उसके कारणों को समझना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">समस्या को समय रहते पहचान लेना समाधान की दिशा में पहला कदम होता है। कई बार हम समस्या को इसलिए नजरअंदाज करते रहते हैं क्योंकि हमें लगता है कि परिस्थितियां अपने आप ठीक हो जाएंगी। लेकिन यदि समस्या लगातार बढ़ती जा रही है तो उसके समाधान के लिए ठोस निर्णय लेना जरूरी हो जाता है।</p>
<h2><strong>मोह के कारण गलत जगह पर टिके रहना ठीक नहीं</strong></h2>
<p class="isSelectedEnd">किसी स्थान से वर्षों का जुड़ाव हो सकता है। वहां घर हो सकता है, परिवार की यादें हो सकती हैं और भावनात्मक संबंध जुड़े हो सकते हैं। लेकिन केवल मोह के कारण ऐसी परिस्थिति में बने रहना उचित नहीं है, जो व्यक्ति की शांति और विकास को प्रभावित कर रही हो।</p>
<p class="isSelectedEnd">श्रीकृष्ण के संदेश का सार यही है कि भावनाओं का सम्मान करते हुए भी जीवन की वास्तविक परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।</p>
<h2><strong>बदलाव को हार नहीं, नई शुरुआत समझें</strong></h2>
<p class="isSelectedEnd">जगह बदलना, नौकरी बदलना या किसी नकारात्मक वातावरण से बाहर निकलना हमेशा असफलता का संकेत नहीं होता। कई बार बदलाव ही आगे बढ़ने का रास्ता बनता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सही समय पर लिया गया निर्णय व्यक्ति को भविष्य की बड़ी परेशानी से बचा सकता है। इसलिए बदलाव को हमेशा हार की नजर से नहीं देखना चाहिए। परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदलना और नए रास्ते तलाशना भी जीवन का हिस्सा है।</p>
<h2><strong>किसी परिस्थिति से निकलने से पहले कारण समझें</strong></h2>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि हर परेशानी में तुरंत जगह या परिस्थिति बदल देना भी उचित नहीं है। कोई बड़ा निर्णय लेने से पहले यह समझना जरूरी है कि समस्या वास्तव में क्या है और उसकी जड़ कहां है।</p>
<p class="isSelectedEnd">खुद से यह सवाल करना चाहिए कि हम इस परिस्थिति से क्यों निकलना चाहते हैं। क्या समस्या अस्थायी है या लंबे समय से बनी हुई है। क्या बातचीत, सुधार या प्रयास से स्थिति ठीक हो सकती है। यदि सुधार की वास्तविक संभावना नहीं है और वातावरण लगातार नुकसान पहुंचा रहा है, तभी बदलाव की दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए।</p>
<h2><strong>नए स्थान में बेहतर भविष्य की संभावनाएं तलाशें</strong></h2>
<p class="isSelectedEnd">केवल पुरानी जगह छोड़ देना ही पर्याप्त नहीं है। जिस नए स्थान या परिस्थिति को चुना जा रहा है, उसके बारे में भी विचार करना जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">नया वातावरण सकारात्मक हो, अच्छे लोगों का साथ मिले, सीखने और आगे बढ़ने के अवसर हों तथा मानसिक शांति बनी रहे, तो बदलाव जीवन के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। इसलिए निर्णय भावनाओं के बजाय विवेक के आधार पर लेना चाहिए।</p>
<h2><strong>कठिन समय में आत्मबल बनाए रखना जरूरी</strong></h2>
<p class="isSelectedEnd">श्रीकृष्ण ने प्रभास क्षेत्र में स्नान, पितरों के तर्पण और सत्संग की बात कही। इसका एक व्यावहारिक संदेश यह भी समझा जा सकता है कि कठिन परिस्थितियों में व्यक्ति को अपने मन और आत्मबल को मजबूत करने वाले कार्य करने चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">अच्छी संगति, सकारात्मक विचार, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक चिंतन व्यक्ति को कठिन समय में सही निर्णय लेने की शक्ति दे सकते हैं। जब मन मजबूत होता है तो बड़ी से बड़ी परिस्थिति का सामना भी धैर्य के साथ किया जा सकता है।</p>
<h2><strong>हर समस्या का समाधान लड़ाई नहीं होता</strong></h2>
<p class="isSelectedEnd">जीवन में कई लोग हर विपरीत परिस्थिति का सामना संघर्ष के जरिए करना चाहते हैं। लेकिन हर लड़ाई लड़ना जरूरी नहीं होता। कुछ परिस्थितियों में पीछे हटना, दूरी बनाना या स्थान बदल लेना ही सबसे समझदारी भरा निर्णय हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कभी-कभी किसी परिस्थिति से बाहर निकलना कमजोरी नहीं, बल्कि अपने जीवन और भविष्य की रक्षा करने का विवेकपूर्ण तरीका होता है।</p>
<h2><strong>सही समय पर लिया गया फैसला बदल सकता है जीवन की दिशा</strong></h2>
<p class="isSelectedEnd">इस प्रसंग की सबसे बड़ी सीख यही है कि व्यक्ति को परिस्थितियों के संकेतों को समझना चाहिए। यदि कोई वातावरण लगातार जीवन में नकारात्मकता, तनाव और संकट बढ़ा रहा है तो केवल पुराने लगाव के कारण उससे चिपके रहना उचित नहीं है।</p>
<p class="isSelectedEnd">श्रीकृष्ण का संदेश हमें सिखाता है कि जीवन में बदलाव से डरना नहीं चाहिए। जरूरत पड़ने पर स्थान, वातावरण या अपनी परिस्थितियों को बदलने का साहस रखना चाहिए। लेकिन यह निर्णय जल्दबाजी में नहीं, बल्कि सोच-विचार, आत्मचिंतन और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>जीवन में हर जगह हमेशा टिके रहना जरूरी नहीं होता। कभी-कभी सही समय पर उठाया गया एक कदम ही व्यक्ति को संकट से निकालकर नई दिशा और नई शुरुआत की ओर ले जाता है।</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

                <link>https://royalbulletin.in/dharma-astrology/when-bad-omen-started-increasing-in-dwarka-shri-krishna-gave/article-223862</link>
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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 10:13:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[रविता ढांगे | Online News Editor ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वैष्णव तिलक और राम नाम के बेल पत्रों से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में गूंजा जय श्री महाकाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि, गुरुवार को बाबा महाकाल की भस्म आरती की गई। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। गुरुवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठा। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा।</p>
<p>महाकाल मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/dharma-astrology/baba-mahakal-decorated-with-vaishnav-tilak-and-ram-name-leaves/article-223864"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/202609033928210.jpg" alt=""></a><br /><p>उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि, गुरुवार को बाबा महाकाल की भस्म आरती की गई। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। गुरुवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठा। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा।</p>
<p>महाकाल मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद, और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। बाबा महाकाल की पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े, और शंखनाद के साथ भस्म आरती की गई।</p>
<p>वैष्णव तिलक और राम नाम के बेल पत्र से बाबा को सजाया गया। महाकाल मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन किए। अपने आराध्य देव के दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध थे। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य होता है।</p>
<p>परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। बाबा की इस आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन की पावन नगरी पहुंचते हैं। </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 10:00:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[रविता ढांगे | Online News Editor ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मानव जीवन अनमोल है, इसे यूं ही न गंवाएं! सेवा, सदाचार और कर्तव्य परायणता से ही जीवन की सच्ची सार्थकता</title>
                                    <description><![CDATA[<p>असंख्य योनियों में भ्रमण करके प्रभु कृपा से सर्वश्रेष्ठ योनि मानव योनि प्राप्त हुई है। हमें बुद्धि व विवेक दिया यह चिन्तन करने के लिए कि यह सुन्दरतम प्रभु ने हमें क्या करने के लिए दिया और वर्तमान में हम क्या करा रहे हैं। स्मरण रहे कि यह मानव तन हमें केवल भोग के लिये नहीं मिला। इस तन की सार्थकता हमसे जुड़े लोगों तथा समाज की जितनी भी सम्भव हो सेवा करने में है। आयु भोग के लिये जीवन की अवधि हमें एक निश्चित अवधि ही मिलती है। इसका प्रत्येक क्षण का सदुपयोग होना चाहिये। अन्यथा व्यर्थ की बातों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/dharma-astrology/wisdom-quotes/%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%B5-%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B2-%E0%A4%B9%E0%A5%88--%E0%A4%87%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%A8-%E0%A4%97%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%82--%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%BE--%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%BE/article-223745"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/25d6cf59-72be-459c-a3c4-5110b59d4141.png" alt=""></a><br /><p>असंख्य योनियों में भ्रमण करके प्रभु कृपा से सर्वश्रेष्ठ योनि मानव योनि प्राप्त हुई है। हमें बुद्धि व विवेक दिया यह चिन्तन करने के लिए कि यह सुन्दरतम प्रभु ने हमें क्या करने के लिए दिया और वर्तमान में हम क्या करा रहे हैं। स्मरण रहे कि यह मानव तन हमें केवल भोग के लिये नहीं मिला। इस तन की सार्थकता हमसे जुड़े लोगों तथा समाज की जितनी भी सम्भव हो सेवा करने में है। आयु भोग के लिये जीवन की अवधि हमें एक निश्चित अवधि ही मिलती है। इसका प्रत्येक क्षण का सदुपयोग होना चाहिये। अन्यथा व्यर्थ की बातों में समय नष्ट करने के पश्चात् एक समय ऐसा आता है जहाँ आदमी पछताता है और स्वयं को कोसता है परन्तु सब व्यर्थ। प्रभु उन्हीं की सहायता करते हैं जो कर्तव्य परायण हैं, पुरुषार्थी हैं, सदाचारी हैं। अब हमें स्वयं देखना है कि हम किस स्थिति में हैं। इस आपाधापी के युग में लोगों में कर्तव्य बोध का अभाव होता जा रहा है। सदाचार की परिभाषा भी लोगों ने अपने हिसाब से गढ़ ली है। ऐसी दशा में समाज का क्या होगा? सदाचार और कर्तव्य परायणता मानव जीवन के आधार स्तम्भ हैं जिन पर सभ्य समाज की नींव टिकी है। हमें पूर्ण निष्ठा और उत्तरदायित्व की भावना से इन स्तम्भों को मजबूत बनाने में सहयोग देना चाहिये जिससे सभी का हित निहित है। व्यक्तिगत रूप से भी यदि हमें प्रभु कृपा का पात्र बनना है तो सदाचारी और कर्तव्य परायण तो हमें बनना ही चाहिये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 23:59:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[प्रणपाल सिंह राणा | स्तंभकार – जीवन दर्शन ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दैनिक राशिफल: 3 सिंतबर, 2026, गुरुवार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><img src="https://royalbulletin.in/media/2026-09/49d3c9fd89311997e7c6107335193d39_1712885137.jpg" alt="49d3c9fd89311997e7c6107335193d39_1712885137" width="943" height="1200" /><br /><br />मेष- समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने में रुकावट का एहसास होगा। विरोधियों के सक्रिय होने की संभावना है। कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। जो चल रहा है उसे सावधानीपूर्वक संभालें। शुभांक-1-3-6<br /><br />वृष- परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। पर प्रपंच में ना पड़कर काम पर ध्यान दीजिए। कल का परिश्रम आज लाभ देगा। आलस्य का त्याग करें। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। यार-दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। शुभांक-3-4-5</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/dharma-astrology/horoscope/daily-horoscope-3-september-2026-thursday/article-223741"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/a150d328-208e-4c17-9e7e-79450a7e575e.png" alt=""></a><br /><p><img src="https://royalbulletin.in/media/2026-09/49d3c9fd89311997e7c6107335193d39_1712885137.jpg" alt="49d3c9fd89311997e7c6107335193d39_1712885137" width="943" height="1661"></img><br /><br />मेष- समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने में रुकावट का एहसास होगा। विरोधियों के सक्रिय होने की संभावना है। कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। जो चल रहा है उसे सावधानीपूर्वक संभालें। शुभांक-1-3-6<br /><br />वृष- परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। पर प्रपंच में ना पड़कर काम पर ध्यान दीजिए। कल का परिश्रम आज लाभ देगा। आलस्य का त्याग करें। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। यार-दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। शुभांक-3-4-5<br /><br />मिथुन- जोखिम से दूर रहना ही बुद्घिमानी होगी। महत्वपूर्ण कार्य को समय पर बना लें तो अच्छा ही होगा। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। कामकाज में आ रही बाधा दूर होगी। बाहरी और अंदरूनी सहयोग मिलता चला जाएगा। पर प्रपंच में ना पड़कर अपने काम पर ध्यान दीजिए। शुभांक-5-6-6<br /><br />कर्क- शैक्षणिक कार्य आसानी से पूरे होते रहेंगे। परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। लेन-देन में आ रही बाधा को दूर करने के प्रयास सफल होंगेे।समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। नौकरी में सावधानीपूर्वक कार्य करें। शुभांक-7-8-9<br /><br />सिंह- पठन-पाठन में स्थिति कमजोर रहेगी। स्त्री-संतान पक्ष का सहयोग मिलेगा। अपनों का सहयोग प्राप्त होगा। पत्नी व संतान पक्ष से थोड़ी ङ्क्षचता रहेगी। शारीरिक सुख के लिए व्यसनों का त्याग करें। खान-पान में सावधानी रखें। व्यापार में प्रगति होगी। अपने अधीनस्त लोगों से कम सहयोग मिलेगा। शुभांक-7-8-9<br /><br />कन्या- शुभ कार्यों की प्रवृत्ति बनेगी और शुभ समाचार भी मिलेंगे। रुका हुआ लाभ आज प्राप्त हो सकता है। पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। जोखिम से दूर रहना ही बुद्घिमानी होगी। किसी से कहा सुनी न हो यह ध्यान रहे। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। शुभांक-7-8-9<br /><br />तुला- समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। कार्यक्षेत्र में आगे बढऩे में रुकावट का एहसास होगा। विरोधियों के सक्रिय होने की संभावना है। जो चल रहा है उसे सावधानीपूर्वक संभालें। शुभांक-4-7-9<br /><br />वृश्चिक- किसी से वाद-विवाद अथवा कहासुनी होने का भय रहेगा। कार्य भार बढ़ेगा। विरोधियों के सक्रिय होने की संभावना है। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। शुभ कार्यों में अड़चनें और परिवार के बुुजुर्ग- जनों से मतभेद रहेगा। शुभांक-5-7-9<br /><br />धनु- बढ़ते घाटे से कुछ राहत मिलने लगेगी। कुछ आर्थिक ङ्क्षचताएं भी कम होंगी। नियोजित धन से लाभ होने लगेगा। घर के सदस्य मदद करेंगे और साथ ही आर्थिक बदहाली से भी मुक्ति मिलने लगेगी। समय का सदुपयोग करें। साधन और भोग-विलास के प्रचुर अवसर होंग। शुभांक-4-7-8<br /><br />मकर- व्यर्थ की भाग-दौड़ से यदि बचा ही जाए तो अच्छा है। कुछ कार्य भी सिद्घ होंगे। प्रियजनों से समागम का अवसर मिलेगा। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। महत्त्वपूर्ण कार्य को समय पर बना लें तो अच्छा ही होगा। परामर्श व परिस्थिति का सहयोग मिलेगा। शुभांक-6-8-9<br /><br />कुम्भ- आगे बढ़ने के अवसर लाभकारी सिद्घ हो रहे है। कल का परिश्रम आज लाभ देगा। आशा और उत्साह के कारण सक्रियता बढ़ेगी। कुछ आर्थिक संकोच पैदा हो सकते है। कोई प्रिय वस्तु अथवा नवीन वस्त्राभूषण प्राप्त होंगे। धार्मिक आस्थाएं फलीभूत होंगी। सुख-आनंद कारक समय है। शुभांक-4-7-8<br /><br />मीन- कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। सक्रियता से अल्प लाभ का हर्ष होगा। सुखद समय की अनुभूतियां प्रबल होगी। मनोविनोद बढ़ेंगे। व्ययाधिक्य का अवसर आ सकता है। कार्यों का लाभदायक परिणाम होगा। आध्यात्मिक रुचि बनेगी। शुभांक-4-6-9</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                            <category>राशिफल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 23:59:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[पं. अरविन्द पांडेय | कर्मकांड विशेषज्ञ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाद्रपद पंचमी पर बाबा महाकाल का अलौकिक शृंगार, भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब; ‘जय श्री महाकाल’ से गूंजा मंदिर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर, बुधवार तड़के बाबा महाकाल की भस्म आरती संपन्न हुई। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार किया गया। इस अलौकिक दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे। बाबा के दर्शन होते ही पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गूंज उठा।</p>
<p>बुधवार तड़के परंपरा के अनुसार भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। कपाट खुलते ही मंदिर में मंत्रोच्चार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/dharma-astrology/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A6-%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A4%AE%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%B2%E0%A5%8C%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%B6%E0%A5%83%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B0--%E0%A4%AD%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AE-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%89%E0%A4%AE%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AC--%E2%80%98%E0%A4%9C%E0%A4%AF-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E2%80%99-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%82%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0/article-223416"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/202609023926966.jpg" alt=""></a><br /><p>उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर, बुधवार तड़के बाबा महाकाल की भस्म आरती संपन्न हुई। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार किया गया। इस अलौकिक दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे। बाबा के दर्शन होते ही पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गूंज उठा।</p>
<p>बुधवार तड़के परंपरा के अनुसार भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। कपाट खुलते ही मंदिर में मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच पूजा-अर्चना शुरू हुई। सबसे पहले भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से बाबा का अभिषेक किया गया। पूजा की विशेष परंपराओं के तहत प्रथम घंटाल बजाकर बाबा महाकाल को हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती हुई और बाबा महाकाल को मुकुट धारण कराया गया।</p>
<p>शृंगार के दौरान बाबा को चांद, चंदन और सूखे मेवों से आकर्षक रूप में सजाया गया। इसके बाद भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। भस्म अर्पण के बाद झांझ-मंजीरों, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच भस्म आरती शुरू हुई। मंदिर के पुजारी ने विधि-विधान के साथ महाआरती संपन्न कराई। आरती के दौरान मंदिर परिसर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु आरती में शामिल हुए और अपने आराध्य के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है।</p>
<p>धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही वजह है कि भस्म आरती को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था रहती है। बाबा महाकाल की इस दिव्य आरती में शामिल होने और उनके दर्शन पाने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु उज्जैन की पावन नगरी पहुंचते हैं। </p>
<p> </p>
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<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 10:08:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[रविता ढांगे | Online News Editor ]]></dc:creator>
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                <title>दैनिक राशिफल: 2 सिंतबर, 2026, बुधवार</title>
                                    <description><![CDATA[<p><img src="https://royalbulletin.in/media/2026-09/whatsapp-image-2026-09-01-at-6.06.10-pm.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026-09-01 at 6.06.10 PM" width="914" height="1200" /></p>
<p>मेष- निकटस्थ व्यक्ति का सहयोग काम को गति दिला देगा। व्यर्थ प्रपंच में समय नहीं गंवाकर अपने काम पर ध्यान दीजिए। अच्छे कार्य के लिए रास्ते बना लेंगे। पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। व्यापार व व्यवसाय में स्थिति उत्तम रहेगी। जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। शुभांक-1-3-5</p>
<p>वृष- अपने हित के काम सुबह-सवेरे निपटा लें। यात्रा शुभ रहेगी। अपने काम पर पैनी नजर रखिए। विरोधी नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा। अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। आर्थिक हित के काम को साधने में मदद मिल जाएगी। शुभांक-2-4-6</p>
<p>मिथुन- अपने काम को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://royalbulletin.in/dharma-astrology/horoscope/-draft--add-your-title/article-223241"><img src="https://royalbulletin.in/media/400/2026-09/126241e0-92a3-4ee8-b999-4bbbbc7e264d.png" alt=""></a><br /><p><img src="https://royalbulletin.in/media/2026-09/whatsapp-image-2026-09-01-at-6.06.10-pm.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026-09-01 at 6.06.10 PM" width="914" height="1600"></img></p>
<p>मेष- निकटस्थ व्यक्ति का सहयोग काम को गति दिला देगा। व्यर्थ प्रपंच में समय नहीं गंवाकर अपने काम पर ध्यान दीजिए। अच्छे कार्य के लिए रास्ते बना लेंगे। पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। व्यापार व व्यवसाय में स्थिति उत्तम रहेगी। जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। शुभांक-1-3-5</p>
<p>वृष- अपने हित के काम सुबह-सवेरे निपटा लें। यात्रा शुभ रहेगी। अपने काम पर पैनी नजर रखिए। विरोधी नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा। अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। आर्थिक हित के काम को साधने में मदद मिल जाएगी। शुभांक-2-4-6</p>
<p>मिथुन- अपने काम को प्राथमिकता से करें। बुरी संगति से बचें। आशानुकूल कार्य होने में संदेह है। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। लेन-देन में अस्पष्टता ठीक नहीं। निर्मूल शंकाओं के कारण मनस्ताप भी पैदा हो सकते है। भय तथा शत्रुहानि की आशंका रहेगी। पारिवारिक परेशानी बढ़ेगी। हाथ-पैरों में पीड़ा हो सकती है। शुभांक-4-7-9</p>
<p>कर्क- दूसरों के कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप न करें। कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। अच्छे कार्य के लिए रास्ते बना लेंगे। अपने हित के काम सुबह-सबेरे ही निपटा लें। रुपए पैसों की सुविधा मिल पाएगी। कामकाज सीमित तौर पर ही बन पाएंगे। शुभांक-2-4-5</p>
<p>सिंह- चिंतनीय वातावरण से मुक्ति मिलेगी। मान-सम्मान में वृद्घि होगी। यात्रा प्रवास का सार्थक परिणाम मिलेगा। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। नवीन जिम्मेदारी बढऩे के आसार रहेंगे। यात्रा शुभ रहेगी। सुविधाओं में बाधा आएगी। शुभांक-4-5-6</p>
<p>कन्या- निष्ठा से किया गया कार्य पराक्रम व आत्मविश्वास बढ़ाने वाला होगा। संतोषजनक सफलता मिलेगी। मेहमानों का आगमन होगा। पैतृक सम्पत्ति से लाभ। नैतिक दायरे में रहें। पुरानी गलती का पश्चाताप होगा। विद्यार्थियों को लाभ। वाहन चालन में सावधानी बरतें। आय के अच्छे योग बनेंगे। शुभांक-2-4-7</p>
<p>तुला- परिवारजन का सहयोग व समन्वय काम को बनाना आसान करेगा। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। शैक्षणिक कार्य आसानी से पूरे होते रहेंगे। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। बुरी संगति से बचें। ज्ञानार्जन का वातावरण बनेगा। शुभांक-5-6-9</p>
<p>वृश्चिक- संतान पक्ष से थोड़ी चिंता रहेगी। अपनों का सहयोग प्राप्त होगा। शिक्षा में आशानुकूल कार्य होने में संदेह है। व्यापार व व्यवसाय में स्थिति उत्तम रहेगी। नौकरी में पदोन्नति की संभावना है। मित्रों से सावधान रहें तो ज्यादा उत्तम है। शारीरिक सुख के लिए व्यसनों का त्याग करें। शुभांक-3-6-8</p>
<p>धनु- शत्रुभय, चिंता, संतान को कष्ट, अपव्यय के कारण बनेंगे। व्यवसाय में प्रतिद्वंद्वी परेशान कर सकते हैं। समय व्ययकारी सिद्घ होगा। वैचारिक उत्तेजना पर नियत्रंण रखें। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। अपनी परिसंपत्ति को संभालकर रखें। शुभांक-3-5-7</p>
<p>मकर- मित्रों की उपेक्षा करना ठीक नहीं रहेगा। व्यापार में वृद्घि व उत्तम लाभ मिलेगा। नौकरी क्षेत्र में कुछ उलझनें रहेंगी। यश-प्रतिष्ठा में वृद्घि व शिक्षा में परेशानी आ सकती है। व्यापार में वृद्घि होगी। नौकरी में सहयोगियों का सहयोग प्राप्त होगा। मेहमानों का आगमन होगा। शुभांक-4-6-8</p>
<p>कुम्भ- महत्वपूर्ण निर्णय के लिए दूरदर्शिता से काम लें। कोष में कमी व व्यय की अधिकता से परेशान होंगे। किसी से वाद-विवाद अथवा कहासुनी होने का भय रहेगा। जल्दबाजी में कोई भूल संभव है। कार्य भार बढ़ेगा। जरा-सी लापरवाही आपको परेशानी में डाल सकती है। सलाह उपयोगी सिद्घ होगी। शुभांक-2-6-9</p>
<p>मीन- प्रतिष्ठा बढ़ाने वाले कुछ सामाजिक कार्य संपन्न होंगे। कई प्रकार के हर्ष उल्लास के बीच अप्रत्याशित विघ्न पैदा होंगे। आमोद-प्रमोद का दिन होगा और व्यावसायिक प्रगति भी होगी। स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार की अपेक्षा रहेगी। ज्ञान-विज्ञान की वृद्घि होगी और सज्जनों का साथ भी रहेगा। शुभांक-5-6-8</p>
<p> </p>
<p> </p>
<h3 class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"> </h3>
<h3> </h3>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म ज्योतिष</category>
                                            <category>राशिफल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 23:59:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[पं. अरविन्द पांडेय | कर्मकांड विशेषज्ञ]]></dc:creator>
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