ह्वाट्सऐप पिंक से बढ़ रही धोखाधड़ी, मुंबई पुलिस ने एंड्रॉयड यूजरों के लिए जारी किया रेड अलर्ट
नई दिल्ली। मुंबई पुलिस ने उन एंड्रॉयड यूजर्स के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जिन्होंने ह्वाट्सऐप पिंक नामक ऐप डाउनलोड किया है। मुंबई पुलिस ने एक ट्विटर पोस्ट में कहा, “व्हाट्सएप पिंक – एंड्रॉयड उपयोगकर्ताओं के लिए एक रेड अलर्ट”, साथ ही एक तस्वीर के साथ इस ऐप को डाउनलोड करने के नतीजों और […]
नई दिल्ली। मुंबई पुलिस ने उन एंड्रॉयड यूजर्स के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जिन्होंने ह्वाट्सऐप पिंक नामक ऐप डाउनलोड किया है।
मुंबई पुलिस ने एक ट्विटर पोस्ट में कहा, “व्हाट्सएप पिंक – एंड्रॉयड उपयोगकर्ताओं के लिए एक रेड अलर्ट”, साथ ही एक तस्वीर के साथ इस ऐप को डाउनलोड करने के नतीजों और इससे बचने के उपायों के बारे में बताया है।
तस्वीर में लिखा है, “‘अतिरिक्त फीचर्स के साथ नए पिंक लुक वाले ह्वाट्सएप के बारे में हाल ही में ह्वाट्सएप उपयोगकर्ताओं के बीच चल रही खबर एक अफवाह है जो दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर के माध्यम से आपके मोबाइल को हैक कर सकती है।”
“यह कोई असामान्य उदाहरण नहीं है, जब जालसाज भोले-भाले उपयोगकर्ताओं को साइबर धोखाधड़ी करने के लिए अपने जाल में फंसाने के लिए तरह-तरह की नई तरकीबें और तरीके अपनाते हैं। उपयोगकर्ताओं के लिए जागरूक, सतर्क और चौकस रहने की जरूरत है। डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहें।”
ह्वाट्सएप को गुलाबी रंग में डाउनलोड करने से मोबाइल फोन के सारे डाटा यह ऐप चुरा लेता है। इसमें फोन में सेव नंबरों और तस्वीरों का दुरुपयोग, वित्तीय नुकसान, आपकी साख का दुरुपयोग, स्पैम संदेश और बहुत कुछ हो सकता है।
मुंबई पुलिस ने लोगों को तत्काल ह्वाट्सऐप पिंक को अनइंस्टाल करने की सलाह दी है।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

टिप्पणियां