जदयू में आंतरिक कलह, पार्टी एमएलसी के आरोप पर प्रदेश अध्यक्ष का पलटवार
पटना। जदयू के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जहां देश के विपक्षियों को एकजुट करने में जुटे हैं, वही उनकी ही पार्टी में आंतरिक कलह अब सड़कों पर दिखने लगा है। पार्टी के विधान पार्षद रामेश्वर महतो ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा पर पार्टी के कमजोर करने का आरोप लगाया तो […]
पटना। जदयू के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जहां देश के विपक्षियों को एकजुट करने में जुटे हैं, वही उनकी ही पार्टी में आंतरिक कलह अब सड़कों पर दिखने लगा है।
पार्टी के विधान पार्षद रामेश्वर महतो ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा पर पार्टी के कमजोर करने का आरोप लगाया तो पार्टी अध्यक्ष ने महतो को ही धूर्त और आधारहीन बताते हुए कहा उनके बयान पर नोटिस नहीं लेता। उमेश कुशवाहा ने कहा कि किसी भी पार्टी में नीति, सिद्धांत और प्रोटोकाल है। किसी की बात अगर प्रदेश अध्यक्ष द्वारा नहीं सुनी जा रही है तो वे राष्ट्रीय अध्यक्ष के यहां जाकर अपनी बात रखते। पार्टी का प्लेटफार्म है।
ये भी पढ़ें आईडीबीआई बैंक में जूनियर असिस्टेंट मैनेजर के 1100 पदों पर बंपर वैकेंसी, 19 मार्च तक करें आवेदनउन्होंने रामेश्वर महतो पर ही आरोप लगाया कि कभी वे भाजपा की तारीफ करते हैं तो कभी उपेंद्र कुशवाहा का गुणगान करने लगते हैं। पार्टी द्वारा कारवाई करने के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पार्टी उनके बयानों पर कोई नोटिस नहीं लेती।
इससे पहले महतो ने प्रदेश अध्यक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुशवाहा संकुचित विचार से काम कर रहे हैं, जिससे पार्टी को कभी भला नहीं हो सकता है।
ये भी पढ़ें पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में पश्चिमी एशिया के हालातों पर सरकार की अहम बैठकउन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की महानता है कि उन्होंने उमेश कुशवाहा को फिर से पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। एमएलसी महतो ने साफ लहजे में कहा कि उमेश कुशवाहा को जिस तरह से पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करना चाहिए वे नहीं कर पा रहे हैं और सिर्फ गुटबाजी में फंसकर रह गए हैं।
उन्होंने कुशवाहा को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें पार्टी के सभी लोगों को साथ लेकर चलना चाहिए, लेकिन वे संकुचित विचार से पार्टी चलाना चाह रहे हैं। उन्होंने कहा कि उमेश कुशवाहा के कार्यों से यही लगता है कि पार्टी मजबूत हो या नहीं हो इससे उनको कोई मतलब नहीं है, वे खुद कैसे मजबूत हों इसमें अधिक दिमाग लगाते हैं। हमें अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर पार्टी की मजबुती के लिए काम करना चाहिए।
एमएलसी ने यहां तक आरोप लगाया कि वे कुछ नेताओं को दरकिनार करना चाहते हैं जिससे उनकी स्वार्थसिद्धि हो सके।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

टिप्पणियां