विनम्रता: एक बड़ा गुण

 
विनम्रता: एक बड़ा गुण
विनम्रता बहुत बड़ा गुण है, जिसे सदैव धारण करते रहना है। कितनी भी सम्पन्नता आ जाये, कितना भी बड़ा पद प्राप्त हो जाये, कितने भी सम्मानित बन जाये, किन्तु विनम्रता कमी न छोडो। विनम्रता अपनाये रक्खोगे तो कल्याण होगा। विनम्र व्यक्ति सदैव सम्मानित और सुखी रहता है। शेखसादी कहते हैं 'कभी देखना आंधी-तूफान के बीच टूटे वृक्षो को जो इस बात से परिचायक हैं कि वे अकड़े रहे तो तूफान ने उन्हें तोड़कर रख दिया, पर नीचे हरी, घास इसलिये हरी-भरी है कि तूफान को देखकर विनम्र बनी रही, वह तूफान का सामना कर भी लहलहा रही है। तूफान उसे प्रणाम करके चला गया और अकड़ने वाले को तोड़कर चला गया। इसीलिये कभी अभिमान मत करना। परमात्मा को जो इस संसार का स्वामी है उसे मनुष्य की विनम्रता पसन्द है, किसी की अकड़ उसे अच्छी नहीं लगती, क्योंकि वह सब कुछ देता है और देने के बाद चाहता है कि लेने वाला विनम्र बना रहे, शांत रहे, परन्तु व्यक्ति लेता भी जाता है और अकड़ता भी जाता है। परमात्मा को यह बात प्रिय नहीं है। सदैव लेने वाले को देने वाले का कृतज्ञ रहना चाहिये और विनम्र बने रहकर शुक्रिया अदा करना चाहिये।

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