अपने आप से बात करना क्यों है ज़रूरी...

 
अपने आप से बात करना क्यों है ज़रूरी...
जब कभी निराशा घेरे तो उससे उबरने का सबसे सरल उपाय है अपने आपसे बात करें, अपनी आत्मा से मार्ग दर्शन लें। यह विधि दूसरों के परामर्श से अधिक प्रभावशाली है। स्वयं से प्रश्न करें कि क्या आपका विचार तार्किक है। आप दूसरों से जिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षाएं रखते हैं क्या वह सही है? यदि आप उनके स्थान पर होते तो क्या व्यवहार करते। आपको स्वयं अपने से तथा दूसरों से क्या अपेक्षाएं करनी चाहियें। आपको अपना मूल्यांकन करना सरल हो जायेगा। विचार करें कि हमने अपने जीवन में आज तक जो भी कार्य किये हैं उनमें से कौन-कौन से कार्य निकृष्ट किये हैं, अनैतिक किये हैं, धर्म विरुद्ध किये हैं, अपनी आत्मा के विरुद्ध किये हैं। भविष्य में ऐसे निकृष्ट कार्य न करने का संकल्प करे। मनुष्य जीवन परमात्मा की ओर से इसलिये मिला है कि वह शुभ कर्म करे, निकृष्ट कर्मों से दूर रहे। समाज में कहीं अनाचार, अत्याचार देंखे उसका विरोध करें। यह क्षमता आपमें तब आयेगी जब आप स्वयं की कसौटी पर खरे उतरेंगे। संसार में यदि कुछ पाना है तो देना भी सीखना होगा।

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