अनमोल वचन

 
मानव जीवन सत्य की क्रांति से ही शोभायमान होता है। सत्य की पवित्रता से पुण्य कर्मों की प्राप्ति होती है। पुण्य धर्म का साधन है। पुण्य शुभ है और पाप अशुभ है। 'सत्य कठस्य भूषणम' अर्थात सत्य गले का आभूषण है। सत्य से वाणी पवित्र होती है। जैसे स्नान करने से शरीर निर्मल हो जाता है, साबुन से वस्त्र स्वच्छ होता है, वैसे ही सत्य से वाणी निर्मल होती है। मिथ्यावादी के मन में यह बात घर किये रहती है कि कदाचित सत्य मुझे परास्त न कर दें। मिथ्या बोलने में अनेक युक्तियां खोजनी पड़ती हैं, मनघडन्त कथाएं घडऩी पड़ती है, परन्तु सत्य कहने में ऐसी कोई समस्या नहीं आती, फिर भी लोग मिथ्या भाषण को सहज समझते हैं और सत्य नहीं बोल पाते। आज कल कुछ लोग गले में सोने और मोतियों की माला पहनकर उसे कंठ का आभूषण मानते हैं, परन्तु कंठ के वास्तविक आभूषण को भूल जाते हैं। यह उनके लिए उचित भी हो सकता है, क्योंकि जो लोग सत्य की पूर्ति किसी स्थानापन्न वस्तु से करते हैं, उन्हें वैसा ही अभ्यास हो जाता है।

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