अनमोल वचन

 
अनमोल वचन
परमात्मा को सुख स्वरूप इसलिए कहा जाता है कि उनका रूप और स्वाभाव ही सुख स्वरूप हैं। अग्रि का स्वभाव है ताप देना, जल का स्वभाव है शीतलता देना, वायु का स्वभाव है स्पर्श देना। भगवान का भी एक स्वभाव है, सुख देना। जितना उसका कोई सानिध्य करेगा, निकट आयेगा, बस उतना ही सुख मिल जायेगा। आग के जितना समीप हाथ करोगे उतनी गर्मी लगेगी। जल के अन्दर जीतना देर उतनी शीतलता मिलेगी। वायु के साथ जितना अपने शरीर को स्पर्श करोगे, वायु उतना आपको स्पर्श करेगी, हवा शरीर को लगती रहेगी। ऐसे ही जितने निकट भगवान के जायेंगे, भगवान उतने ही दुख दूर करेंगे और सुख मिलता जायेगा। भगवान सुख स्वरूप है, सच्चिदानंद स्वरूप है, उसका रूप ही आनन्दमय है। उस आनन्दमय को पाने का प्रयास हमें अवश्य करना चाहिए, ताकि हमें भी परम आनन्द की प्राप्ति हो। प्रभु दुख विनाशक है, उनकी शरण मिलेगी, तो दुख भाग जायेंगे और परम आनन्द की प्राप्ति होगी।

From around the web