अनमोल वचन

 
अनमोल वचन


प्रभु कृपा करें, सबको सुमति दे ताकि इंसान आवागमन के बंधन से मुक्त होने के लिए जीवन यात्रा मानवता की राह पर चलते तय करें, जिससे सारे विश्व का वातावरण प्यार से परिपूर्ण हो जाये। संसार में कुछ लोग केवल भौतिक सुखों को ही महत्व देते हैं। कुछ जीवन को क्षण भंगुर मानकर इन सुखों के  चक्कर में नहीं पड़ते। ब्रह्मज्ञानी दोनों को ठीक नहीं मानते। उनका विश्वास है कि संसार में न आसक्त होना है न ही त्यागना। उनका दृष्टिकोण विशाल होता है। वह संसार में व्यवहार करते हुए मोह माया से मुक्त होते हैं। वह सांसारिक उत्तरदायित्वों को जीवन का उद्देश्य समझकर नहीं, बल्कि कर्तव्य समझ कर निभाते हैं। वह निर्लिप्त भाव से कर्म करते हैं। उनका जीवन संसार के लिए एक उदाहरण होता है। जितना दृश्यमान जगत है वह पांच तत्वों से बना है। हमारा शरीर भी इन पांच तत्वों से बना है। इनमें आपस में गहरा सम्बन्ध है, जो इंसान स्वयं को शरीर समझता है, वह संसार से जुड़ जाता है, किन्तु ब्रह्मज्ञानी जानता है कि 'मैं शरीर नहीं हूं इसलिए वह इसमें लिप्त नहीं होता। निर्लिप्त भाव से सारे कर्तव्य पूरे करता हूै।

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