अनमोल वचन

 
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साहस सफल जीवन के लिए एक अनिवार्य तत्व है। इसके बिना कोई विचार कार्य रूप से नहीं बदलता। जीवन में व्यक्ति विचार तो लेटे-लेटे रोगावस्था में पड़े रहकर भी कर सकता है, पर विचारों के क्रियान्वयन के बिना विचारों का कोई महत्व नहीं होता। कोई भी विचार कोई भी योजना कार्य रूप में बदलकर ही सार्थक होता है। हमें कोई भी कार्य कठिन लगता है, तो हम उसे छोड़कर आसान कार्य में लगने का विचार कर एक तरह से स्वयं को निरूत्साहित कर देते हैं। इस स्थिति में साहस भावातिरेक की बहुत आवश्यकता पड़ती है। साहस भावना के बलबूते जीवन के दुर्गम-दुरूह रास्ते हमें सुगमता का बोध कराते हैं। जब हमारे भीतर कार्य करने का भाव जागृत हो जाता है, वहां से साहस का भाव आना शुरू हो जाता है। साहस का तात्पर्य इरादे के साथ हौंसले के साथ कठोर श्रम से है, साधारण श्रम तो आदमी प्रतिदिन की दिनचर्या में करता है, परन्तु बड़े और जटिल लगने वाले कार्यों को तत्काल निपटाने के प्रति जो लहरे मन में उठती हैं, उनकी प्रेरक शक्ति का नाम साहस है।

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