अनमोल वचन

 
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कामनाओं का जन्म कमी में हो, अभाव में हो यह स्वाभाविक है, किन्तु आश्चर्य तब होता है, जब कमी न होने के बावजूद कामनाएं बनी रहती हैं। ऐसी कामनाओं की पूर्ति तो धन के देवता कुबेर भी नहीं कर सकते, क्योंकि अभाव में अभाव की प्रतीति भाव से दूर हो सकती है, किन्तु भाव में अभाव की प्रतीति का उपाय कुछ नहीं। वास्तव में तो कमी और कामना दो नहीं अपितु चित्तवृत्ति की एक ही अवस्था के दो किनारे है। जैसे एक ही जीवन में जन्म हुआ है तो मृत्यु भी अवश्य होगी। वैसे ही कामना है तो कमी अवश्य होगी। इसलिए कामनाएं न पाले, किन्तु सच्चाई यह है कि प्रत्येक मनुष्य हर क्षेत्र में स्वयं को सबसे आगे देखना चाहता है, क्षेत्र चाहे क्रीड़ा का हो, अध्ययन, लेखन या ज्ञान का हो, कला का हो, व्यापार का हो या अमीरी का हो, हर व्यक्ति सबसे अधिक सफलता चाहता है। यदि यह मांग एक की होती तो सम्भवत: पूरी हो जाती, परन्तु प्रभु के दरबार में सभी अपनी प्रार्थना लगाते रहते हैं, तो सब की मांग कैसे पूरी हो। मांग तो उसी की पूरी होगी, जिसके पुरूषार्थ और भाग्य का समन्वय सबसे श्रेष्ठ होगा।

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