अनमोल वचन

 
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आप अपने नाम के पहले जितने भी अलंकार, पद व पुरस्कारों के नाम लगाना चाहे लगा लें ताकि आपको यह याद रहे कि इतने अलंकारों से युक्त नाम के अकेले मालिक हैं। यदि हम किसी व्यक्ति के बारे में यह कहना आरम्भ कर दें कि अमुक व्यक्ति बड़ा ही चरित्रवान जीवन जीता है, तो ऐसा सुनने के बाद उस व्यक्ति के मन में भी ऐसी ही भावना का विकास होने लगेगा। इसी भावना को आगे बढाने की जरूरत है। छत्रपति शिवाजी की माता जीजाबाई ने यदि अपने बेटे को समझाया नहीं होता तो शिवाजी इतने महान न बन पाते। आजकल अधिकांश माता-पिता तथा शिक्षक तो केवल डांटते ही रहते हैं। इस  डांट-डपट को सुनते-सुनते बच्चों की मानसिक ग्रंथी सिकुड़ जाती है। परिणाम स्वरूप बच्चा कुंठाग्रस्त हो जाता है। बच्चा भी यह मानने लगता है कि उसका जीवन निरर्थक है और वह कभी सफल नहीं हो पायेगा। ऐसी सोच इसलिए बनी कि उसे स्कूल और घर दोनों स्थान पर एक ही चीज सुनने को मिलती है। तुम यह हो, तुम वह हो, तुमसे यह नहीं होगा, वह नहीं होगा। बच्चा यही समझने लगता है कि जब सभी यही बोल रहे हैं तो फिर यही सही होगा और धीरे-धीरे उसमें हीन भावना घर कर जाती है और वह उससे कभी उभर नहीं पाता।

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