अनमोल वचन

 
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जिस दिन सूर्य अपनी प्रकाश फैलाने की मर्यादा भूल जाये, या पृथ्वी अपनी कीली पर सूर्य की परिक्रमा करने की मर्यादा छोड़ दे या समुद्र अपनी मर्यादा का उल्लंघन कर सभी तटबन्धों को लील जाये उस दिन पृथ्वी पर क्या-क्या अनर्थ नहीं होंगे। यदि परिवार की निर्मात्री माता अपनी मर्यादाओं का उल्लंघन करने लगे तो परिवार का पतन निश्चित है। परिवार को संवारने और उसकी प्रतिष्ठा बढ़ाने का उत्तरदायित्व पुरूष से अधिक घर की स्त्री का होता है। आज के परिवारों में हम जो देख रहे हैं वह देखना नहीं चाहिए, जो सुन रहे हैं वह सुनना नहीं चाहिए था, जो कह रहे हैं वह कहना नहीं चाहिए था अर्थात इस प्रकार की अप्रिय परिस्थितियां बननी ही नहीं चाहिए थी। कारण यह है कि मदार्याएं टूट रही हैं, परिवार बिखर रहे हैं, परिवार के सम्मानित बुजुर्गों की उपेक्षा हो रही है, उन्हें अपमानित किया जाता है। इसी कारण सब अशांत है, जिन्हें अपमानित और उपेक्षित किया जा रहा है, वे भी और जो अपमान और उपेक्षा कर रहे हैं वे भी। जिस परिवार की स्त्रियां मर्यादाओं का पालन करती हैं, ऐसी स्त्रियां श्वसुर कुल की दस पीढिय़ों को और मातृ कुल की दस पीढिय़ों को तार देती हैं। वे सभी देवताओं की पूज्य भी हो जाती हैं। उन्हें निश्चित ही स्वर्गलोक की प्राप्ति इसी जन्म में हो जाती है, क्योंकि उनका परिवार ही स्वर्ग तुल्य हो जाता है।

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