अनमोल वचन

 
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जब जन्म लिया है तो पूर्व कर्मों के अनुसार सुख भी प्राप्त होगा और दुखों और विपत्तियों का सामना भी करना पड़ेगा, प्रसन्नता के क्षण भी आयेंगे, भय और चिंता भी रहेगी, जैसा कर्म किया है, उसके अनुसार उनका फल भोगना भी अनिवार्य है। दुख-सुख को आप किस रूप में लेते हैं, यह आपके चिन्तन पर निर्भर है। विषम परिस्थितियों के प्रभाव से चिंताओं से मुक्ति हो जायेगी। किसी भी आकस्मिक दुर्घटना से घबराये नहीं, न ही धैर्य छोड़े, क्योंकि भय से शक्ति तथा बुद्धि का नाश होता है। कैसी भी विपत्ति आये, उसके आगे आत्मसमर्पण न करो, बल्कि गम्भीरतापूर्वक उनका सामना करो, जो बीत गया सो बीत गया, उसके लिए दुखी न हो, बल्कि उसके अनुभव का लाभ उठाकर अपने भविष्य को संवारने के लिए वर्तमान को संवारों। आत्म विश्लेषण कर जो त्रुटियां पूर्व में की गई है, उनको न दोहराते हुए अपने निर्धारित लक्ष्य को पाने के लिए सत्पुरूषार्थ करें। प्रभु के प्रति आस्थावान रहते हुए व्यर्थ की चिंताओं से अपनी शक्ति का हृास न होने दें, दुखों की अनुभूति हो ही नहीं पायेगी।

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