अनमोल वचन

 
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दूसरों के प्रति सच्चा और ईमानदार रहना बहुत जरूरी है, किन्तु दूसरों के प्रति सच्चा और ईमानदार वही रह सकता है, जो अपने प्रति सच्चा और ईमानदार हो। केवल दूसरों की दृष्टि में अच्छा दिखने के कृत्रिम प्रयास बाद में आपके अफसोस का कारण बन सकते हैं। आप जैसे हो वैसे ही दिखने का प्रयास करो। अच्छाई और सच्चाई आपके विचारों और कृतित्व दोनों में होनी चाहिए। यह न सोचो कि दूसरे क्या सोचेंगे, वही कहो और वही करो, जिसे आपकी आत्मा स्वीकारती हो। जिन लोगों पर आपको विश्वास है, उनकी बात सुने, परन्तु फैसला अपने विवेक से करें, क्योंकि परिणाम के साथ आपको अकेले ही रहना है। लाभ हानि आपको होनी है। दूसरे  तो अपनी सम्मति देकर एक और हो जायेंगे, परिणाम आप ही भुगतेंगे। अपनी सभी भावनाओं का दम न घोंटे। वे या तो गलत समय पर फूट पड़ेगी अथवा उनके कारण आपमें क्रोध और रोग अपना डेरा जमा लेंगे। यदि कोई आपको दुख पहुंचाता है आपका अपमान करता है अथवा आपको हल्के में लेता है, उससे उसके बारे में साफ कह दें, किन्तु अपना पक्ष सभ्यता, सकारात्मकता और चतुराई से रखें। जिन्हें आप पसंद करते हैं, प्यार करते हैं, जिनके आप हृदय से हितैषी हैं, किसी न किसी प्रकार उनके प्रति अपनी भावनाओं को शब्दों में भी व्यक्त करें। उन्हें इस बात का ज्ञान अवश्य होना चाहिए कि आप उनके बारे में कैसा सोचते हैं।

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