अनमोल वचन

 
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पशु की जाति और नस्ल की पहचान उसकी जिह्वा से निकली ध्वनि से होती है, परन्तु मनुष्य की वाणी से जो ध्वनि निकलती है, गुणीजन उसी से उसके स्वाभाव, सज्जनता और दुर्जनता की पहचान कर लेते हैं।  उसके पश्चात उनका व्यवहार और आचरण उसकी पुष्टि कर देते हैं। आप भी तो अपनी पहचान स्वयं करें। आपके लिए आपसे बड़ा कोई और दूसरा पारखी, न्यायाधीश नहीं हो सकता। स्वयं को जांचने-परखने के लिए एकान्त बहुत जरूरी है। एकान्त अवसर देता है, अपने भीतर झांकने का, अपने गुण-अवगुणों को परखने का, अपनी अच्छाईयों, बुराईयों के मूल्याकंन करने का। एकान्त में शांत मन से ईमानदारी से देखिए आप क्या हैं। दूसरे तो आपकी बोल-वाणी और व्यवहार से बाद में ही आपका मूल्यांकन करेंगे। देखिए हम कितने पानी में हैं, अपने कितने निकट हैं, मानवता के कितने समीप हैं। हम अपने तथा दूसरों के लिए कितने उपयोगी हैं। हम अपना जीवन जी रहे हैं या किसी दूसरे किसी और का। हमारी वास्तविकता को जानकर दूसरे हमारे विषय में हमारा कैसा मूल्यांकन करेंगे। सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बात यह है कि व्यक्ति अपने सबसे निकट एकांत  में ही होता है।

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