भगवान का घर !

 
भगवान का घर !
हम मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर को भगवान का घर कहते हैं और यही मानकर उनमें जाकर पूजा, इबादत करते हैं। यह ठीक है कि ये पूजा घर भगवान का घर है, किन्तु केवल वे ही भगवान के घर हैं, यह हमारा भ्रम है। भगवान का घर तो सारा संसार है। वह केवल इन पूजा घरों में ही नहीं रहता, वह तो इस ब्रह्मांड के कण-कण में व्याप्त है। आपके घर में भी है, आपके खेत में भी है, आपके व्यावसायिक प्रतिष्ठान में भी है। वह भीतर भी है और बाहर भी है, हर स्थान में है। इस बात से कोई अन्तर नहीं पड़ता कि तुम उसकी पूजा घर की चारदीवारी में करते हो या देवालय में अथवा अपनी कर्म सथली को ही आपने पूजा स्थली बना रखा है, यह बात भी निरर्थक है कि तुमने उसे पाने के लिए प्रचलित धार्मिक चिन्हों और प्रतीकों को धारण किया है या नहीं तुमने उसे किस नाम से याद किया किस नाम से सम्बोधित किया। बस तुम्हारा आचरण निर्मल, निष्कपट और निष्पाद होना चाहिए और मन में उसका ध्यान।

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