अनमोल वचन

 
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निराश, खिन्न और उद्विग्र रहने से कठिनाईयां पहाड़ सी दिखाई देने लगती है, क्योंकि चिंताएं मनुष्य की शक्ति, योग्यता और प्रतिभा को नष्ट-भ्रष्ट करके रख देती है और व्यक्ति सामर्थ्यवान होता हुआ भी अपनी कल्पनाओं से निर्मित मुसीबतों से व्यर्थ में ही डरता-मरता रहता है। आवश्यकता है चिंतन की, जिससे चेतना जागृत रहे और व्यक्ति जीवन में आई कठिनाईयों को दृढ़तापूर्वक हटाता रहे। अज्ञानी व्यक्ति चिंतन नहीं करता है। थोडी सी कठिनाई भी उसके लिए मुसीबत बन जाती है, वह घबरा जाता है, कुंठित हो जाता है। अपनी हताशा और कुंठाओं के कारण अपनी ऊर्जा को विकास के सापेक्ष दूसरों को नीचा दिखाने में ही नष्ट करता रहता है, जबकि बुद्धिमान व्यक्ति कठिन से कठिन समय को आसानी से निकाल देता है तथा सांसारिक दायित्वों की पूर्ति के साथ-साथ वर्तमान जीवन और परलोक दोनों के संवारने के भी उपाय करता रहता है।

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