अनमोल वचन

 
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प्रतिदिन की कलह से अच्छे-अच्छे घर नष्ट हो जाते हैं। कटु वाक्यों के प्रयोग से आपस में प्यार स्नेह और सम्मान कम हो जाता है। अविश्वास के कारण सुदृढ़ मैत्री भी टूट जाती है। अयोग्य तथा अक्षम राजा के कारण राज्य विनाश के कगार पर पहुंच जाता है और दुष्कर्म करने वाले व्यक्ति का यश समाप्त हो जाता है। किसी भी गड्ढे को भरने के लिए टोकरी पर टोकरी मिट्टी डालते रहना होगा फिर कुछ पानी डालोगे, दुरमट से दबायेंगे फिर उसी क्रम को रखते हुए मिट्टी समतल करना होगा। तभी गड्ढा भरा हुआ माना जायेगा। लोहे, सोने या चांदी को तपाना हो, पिघलाना हो, तो बार-बार धौंकनी चलाकर अग्रि की लौ तीव्र करनी होगी, तभी वे पिघल पायेंगे और इच्छानुसार उन्हें ढाला जा सकेगा। मन को तपाने के लिए सत रज और तम की अवस्था सम करने के लिए बार-बार अभ्यास (जप तप) की आवश्यकता होगी अन्यथा वह तपेगा नहीं। परिवार में विवाद हो जाये, आपस में दूरियां बढ जाये। एक दूसरे के प्रति अविश्वास हो जाये, कलह क्लेश की स्थिति पैदा हो जाये उन्हें आपस में बैठकर बात करनी चाहिए। विवाद और कलह के कारण को मूल में जाकर उन्हें दूर करना चाहिए। आपसी संवाद बने रहने चाहिए। संवादहीनता कलह में वृद्धि करती है, दूरियां बढती है, घर की शान्ति समाप्त हो जाती है। जिस घर में कलह होगी, उसे समाज में हेय दृष्टि से देखा जाता है। समाज में उपहास होता है। घर की समृद्धि अवरूद्ध हो जाती है।

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