अनमोल वचन

 
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हे सर्वशक्तिमान प्रभो मुझे वह शक्ति प्रदान करो, उस क्षमता का आशीष दो कि मैं जो मुझसे घृणा करता है, उसे मैं अपने प्यार में भागीदार बना सकूं। जो मुझे नष्ट करना चाहते हैं, उन्हें मैं क्षमा कर सकूं, जो मुझमें अविश्वास और संदेह की दृष्टि से देखते हैं। अपने कृतित्व से अपने प्रति विश्वास और आस्था पैदा कर सकूं। जहां-जहां निराशा ने अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया है, वहां आशा की किरण जगा सकूं। अपने भीतर का अंधकार समाप्त करके सारे संसार में प्रकाश फैला सकूं, जहां खिन्नता है, पीड़ा की कराह है, वहां आनन्द उडेल सकूं, मरहम का कार्य कर सकूं। हे प्रभो मुझे वह शक्ति प्रदान करे कि मैं दूसरों से सांत्वना की अभिलाषा न रखूं, किन्तु जहां आवश्यकता है, वहां मैं उनके प्रति सांत्वना प्रदान कर सकूं। दूसरों से अपने लिए चिन्तित रहने की अपेक्षा न करूं, किन्तु दूसरों के कष्टों में सहायक बनने की चिंता अवश्य करूं। मैं अभावग्रस्त लोगों की उपेक्षा न करूं, जहां तक सम्भव हो अपनी क्षमताओं के अनुसार उनकी सहायता करने की भावना मुझमें बनी रहे।

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